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शाह फ़ैसलः 'मैं कश्मीर की राजनीति का हिस्सा बनना चाहूंगा'
साल 2009 में कश्मीर के सिविल सेवा परीक्षा टॉपर आईएएस अधिकारी शाह फ़ैसल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने ट्विटर के ज़रिए अपने इस्तीफ़े की जानकारी दी.
अपने इस्तीफ़े पर शाह फ़ैसल ने श्रीनगर में बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर से विस्तार से बातचीत की और इस बात के संकेत दिए कि वे राजनीति में क़दम रखने की योजना बना रहे हैं.
''मैंने कभी नहीं कहा कि नौकरी नहीं छोड़ सकता. मेरे लिए हमेशा नौकरी एक इंस्ट्रूमेंट था, लोगों की ख़िदमत करने का. अवाम की ख़िदमत कई तरीक़ों से हो सकती है, जो भी पब्लिक सर्विस में होते हैं, वो सब लोगों की ख़िदमत करते हैं. पिछले साल-दो साल से हमने जिस तरह से मुल्क में हालात देखे, जम्मू-कश्मीर में देखे. कश्मीर में हत्याओं का एक सिलसिला देखने को मिला.''
''हिंदू-मुस्लिम के बीच बढ़ते अंतर को देखा. रोंगटे खड़े करने वाले वीडियो हमने देखे. गौरक्षा के नाम पर उपद्रव देखने को मिला. ये तो कभी देखने को नहीं मिला था. अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश की कोशिशें हमने देखीं. ''
''ऐसे में एक ऑफ़िसर का नौकरी में रहना संभव नहीं था. और समाज के नैतिक सवालों से अलग हो कर रहना और उनपर रिएक्ट नहीं करना, मेरे लिए संभव नहीं था. मैंने चीज़ों पर पहले भी बोला है, लेकिन अब वो वक़्त आ चुका था कि इस खुलकर बोलने की ज़रूरत थी, ये काम नौकरी छोड़कर ही किया जा सकता था.''
''सिविल सर्विस कोड की बात जब होती है, तो उसके मुताबिक़ अभिव्यक्ति की आज़ादी थोड़ी प्रभावित होती है. राजनीति पब्लिक सर्विस का एक्सटेंशन है. अब तक मैं राजनेताओं के साथ काम कर रहा था. ''
''अब ख़ुद पॉलिटिक्स कर सकता हूं, एक्टिविस्ट बन सकता हूं. अवाम की बात करना और अवाम का काम करना, पॉलिटिक्स ये दो चीज़ें मुहैया कराती हैं. मैं सोच रहा हूं कि अगर मुझे मौक़ा मिलता है तो पॉलिटिक्स में जा सकता हूं. ''
क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी में शामिल होने पर विचार
''अभी ये तय नहीं है कि किस पार्टी से जुड़ूँगा. हर पार्टी की अपनी लीगेसी है. अगर कभी पॉलिटिक्स में गया तो उस पार्टी से जुड़ूँगा जो मुझे राज्य के इस मौजूदा हालात पर खुलकर बात करने की आज़ादी देगी. ''
''मैं ऐसी पार्टी का हिस्सा बनना चाहूँगा जिसमें मुझे अल्पसंख्यकों के साथ, कश्मीरियों के साथ हो रही राजनीति को लेकर खुलकर बात करने का मौक़ा मिले. मैं अपने विकल्पों के बारे में सोच रहा हूं और जल्द ही इसपर फ़ैसला करूंगा.''
''मेरे लिए रीजनल पार्टी में जाना ज़्यादा सही होगा. मैं कश्मीर की बात करना चाहता हूं. हमें समझना होगा कि संसद की मुहर के बिना कोई भी तब्दीली नहीं की जा सकती. मैं संसद में कश्मीरियों की आवाज़ बनना चाहता हूं.''
''कई लोग मुझसे कह रहे हैं कि नई पार्टी बनानी चाहिए लेकिन मुझे लगता है कि अभी राज्य को एकता की ज़रूरत है. जितनी ज़्यादा पार्टियां बनेंगी उतना ही ज़्यादा जनमत विभाजित होगा.''
''ये ज़रूरी नहीं कि आप एक नौकरी में 30 साल या 50 साल तक रहें. 10 साल में मुझे आईएएस रहते हुए बेहतरीन अवसर मिले. मैंने संस्थाओं को समझा, लोगों के लिए काम किया, प्रक्रिया समझने का मौक़ा मिला. दुनिया में हर कोई नौकरी बदलता है. मैंने इस लिए ये पद छोड़ा क्योंकि पद पर रहते हुए कई मुद्दों पर बात करना मेरे लिए ठीक नहीं होता.''
''अब तक हमने झूठ की राजनीति देखी है, मैं कुछ छोड़कर राजनीति में आ रहा हूं. मैं अपने आदर्शों को अपने विजन को राजनीति में लाना चाहता हूं अगर ऐसा मौक़ा नहीं मिल पाता है तो राजनीति मेरे लिए आख़िरी पड़ाव नहीं है.''
''साख की बात करूं तो राज्य में अगर मैं राजनीति का हिस्सा नहीं बनूंगा तो कोई और बनेगा, कश्मीर को बेहतर लोगों और नौजवानों की ज़रूरत है. यही सोचकर मैं राजनीति में क़दम रखने की सोच रहा हूं.''
''मौजूदा कश्मीर में लोगों के बीच एक कंफ़्यूजन की स्थिति है. ये बेहद ज़रूरी है कि लोगों में यक़ीन लाया जाए कि ये लोग कश्मीर की बात करेंगे. जबतक मुख्य धारा की राजनीतिक पार्टियां सच नहीं बोलना शरू करेंगी तब तक कश्मीर में उनका भविष्य धुंधला रहेगा.''
''या तो हमें राज्य में इलेक्टोरल राजनीति करनी ही नहीं चाहिए थी या फिर अगर हम ऐसा कर रहे हैं तो क्यों ना अच्छे लोगों को चुनकर संसद में भेजें. हमें अवाम के साथ न्याय करने की ज़रूरत है. ''
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