You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर: जब प्यार का जुनून 'मानसिक बीमारी' बन जाता है
- Author, सिन्धुवासिनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'तू हां कर या न कर तू है मेरी क...क...किरन'
'ठुकराके मेरा प्यार, मेरी मोहब्बत का इन्तक़ाम देखेगी…'
'तुमने मुझे ठुकराया तो मैं अपनी जान दे दूंगी'
इससे पहले की आप सोचें कि यहां बॉलीवुड फ़िल्मों की डायलॉगबाजी और ड्रामा चल रहा है, ज़रा ठहर जाइए.
ये पहली नज़र में भले बॉलीवुड का ड्रामा लगे लेकिन असल ज़िंदगी से ज़्यादा दूर नहीं है, जहां लोग प्यार में ठुकराया जाना स्वीकार नहीं कर पाते और ना कहे जाने के बाद अजीबोग़रीब हरकतें करने लगते हैं.
इसका उदाहरण अख़बारों और टीवी चैनलों की कुछ ऐसी सुर्खियों में देखने को मिलता है:
'प्रेमिका का महीनों तक पीछा करता रहा सिरफ़िरा आशिक़'
'प्रेमी का पीछा करते हुए उसके घर तक पहुंची'
ऐसा ही कुछ वाक़या अमरीका में हुआ जहां एक महिला ने किसी पुरुष को लगातार 65,000 मेसेज भेजे.
ये भी पढ़ें: अगर लड़कियां लड़कों का पीछा करें तो...
दोनों एक डेटिंग वेबसाइट के ज़रिए मिले थे और महिला उस पुरुष को पसंद करने लगी थी. बाद में जब पुरुष ने उसके प्रेम प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया तो वो इसे स्वीकार नहीं कर पाई और उसे लगातार ब्लैकमेल करने लगी.
इतना ही नहीं, उसने पुरुष को तक़रीबन 65,000 मेसेज भेजे. इतना ही नहीं वो पुरुष के घर तक पहुंच गई. बात इतनी बढ़ गई कि पुलिस को उसे गिरफ़्तार करके जेल भेजना पड़ा.
यूके की न्यूज़ वेबसाइट 'मेट्रो' के मुताबिक महिला ने पुलिस से पूछताछ में कहा, "उससे मिलकर मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा सोलमेट मिल गया हो. वो बहुत क्यूट है. मुझे अंदाज़ा नहीं था कि मेरे मेसज से वो इतना परेशान हो जाएगा."
महिला की इन सारी हरक़तों को देखने के बाद मनोवैज्ञानिकों को आशंका है कि वो 'ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर' से जूझ रही है.
वैसे तो किसी का पीछा करना, ब्लैकमेल करना, लगातार मेसेज और कॉल तंग करना 'स्टॉकिंग' कहलाता है जो क़ानूनन अपराध है. लेकिन कई बार ये महज स्टॉकिंग का मामला नहीं होता बल्कि इसके पीछे 'ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर' होता है.
ये भी पढ़ें:'ज़बरदस्ती किस करके भागना प्रैंक नहीं होता'
क्या है ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर?
अमरीकी हेल्थ वेबसाइट 'हेल्थलाइन' के मुताबिक़, "ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर (OLD) एक तरह की 'साइकोलॉजिकल कंडीशन' है जिसमें लोग किसी एक शख़्स पर असामान्य रूप से मुग्ध हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि वो उससे प्यार करते हैं. उन्हें ऐसा लगने लगता है कि उस शख़्स पर सिर्फ़ उनका हक़ है और उसे भी बदले में उनसे प्यार करना चाहिए. अगर दूसरा शख़्स उनसे प्यार नहीं करता तो वो इसे स्वीकार नहीं कर पाते. वो दूसरे शख़्स और उसकी भावनाओं पर पूरी तरह काबू पाना चाहते हैं."
ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर के लक्षण
-किसी के प्रति ज़बरदस्त और असाधारण आकर्षण
-उस शख़्स के बारे में लगातार आने वाले विचार, जिन पर ख़ुद का कोई नियंत्रण न हो
-दूसरे शख़्स और उसकी भावनाओं को काबू में करने की इच्छा
-उसके रिज़ेक्शन को स्वीकार न कर पाना
-दूसरों से भी उसकी ही बातें करना, उसका ज़िक्र करने का कोई बहाना ढूंढना
-उसकी वजह से बाकी रिश्तों को भूल जाना
-उसे बार-बार मेसेज या कॉल करना, उसका पीछा करना, सोशल मीडिया पर उसे स्टॉक करना
- उसे ब्लैकमेल करना, किसी भी तरह अपना प्रस्ताव मनवाने की कोशिश करना
ये भी पढ़ें: 'मैं अब भी रात में अकेले बाहर जाती हूं'
विमहंस (VIMHANS) में क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट डॉ.नीतू राणा कहती हैं कि आम तौर पर ऊपर बताई गई भावनाएं लोगों में उस वक़्त भी देखने को मिलती हैं जब वो प्यार में होते हैं लेकिन जब ये भावनाएं असामान्य रूप से बढ़ जाएं तो मुमकिन है कि शख़्स 'ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर' से गुज़र रहा हो.
क्यों होता है ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर?
पेशे से साइकोथेरेपिस्ट डॉ. शिखा के अनुसार इसकी कई वजहें हो सकती हैं.
वो बताती हैं कि ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर की कोई एक ही वजह हो, ऐसा ज़रूरी नहीं है. कई बार इसका सम्बन्ध ये दूसरी मानसिक तकलीफ़ों से भी होता है."
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ ऐसी समस्याएं जो ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर की वजह बन सकती हैं:
- अटैचमेंट डिसऑर्डर- इसकी वजह से लोगों में अपनी भावनाओं और किसी से जुड़ाव को काबू करने में परेशानी होती है. कई बार वो दूसरों से ज़रूरत से ज़्यादा दूर हो जाते हैं और कई बार दूसरों पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भर. ऐसा बचपन या किशोरवास्था के बुरे पारिवारिक रिश्तों या कड़वे अनुभवों की वजह से भी हो सकता है.
- बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर- इसे 'इमोशनली अनस्टेबल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर' भी कहा जाता है. इसकी वजह से लोग अपनी भावनाओं को समझने में कठिनाई का अनुभव करते हैं. उनमें रिश्तों को लेकर डर और असुरक्षा की भावना भी होता है. बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से जूझ रहे शख़्स को ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर होने की आशंका बढ़ जाती है.
- इरोटोमेनिया- इरोटोमेनिया से ग्रसित शख़्स को ऐसा भ्रम (डिल्यूज़न) होता है कि दूसरा शख़्स उससे प्यार करता है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता. इरोटोमेनिया की वजह से भी ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर होने का ख़तरा बढ़ जाता है.
ये भी पढ़ें: उस लड़की पर क्या गुजरती है, जब कोई पीछा करता है
डॉ. शिखा बताती हैं, "आत्मविश्वास की कमी और असुरक्षा की भावना भी ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर की बड़ी वजहें हैं. ऐसा भी देखने में आया है कि जिन लोगों को बचपन और किशोरावस्था में परिवार या करीबियों का प्यार नहीं मिलता बाद में वो कभी न कभी ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर से गुज़रते हैं."
डॉ. नीतू राणा कहती हैं कि हम कई बार ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर को बेइंतहां प्यार और दीवानगी समझने की ग़लती कर बैठते हैं, जबकि ऐसा नहीं होता.
उनके मुताबिक ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति न सिर्फ़ हम ख़ुद को नुक़सान पहुंचाता है बल्कि दूसरे इंसान को भी मुश्किल में डाल रहा होता है.
डॉ. शिखा बताती हैं कि महिला और पुरुष दोनों ही ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर के शिकार हो सकते हैं.
वो कहती हैं, "हमारा सामाजिक ढांचा ऐसा है कि यहां पुरुष अपनी भावनाएं ज़्यादा आसानी से ज़ाहिर कर लेते हैं जबकि महिलाओं के लिए ये आसान नहीं होता. शायद यही वजह है कि पुरुषों का ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर अक्सर गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है. वो लड़कियों का पीछा करने, उन्हें धमकाने और ब्लैकमेल तक करने लग जाते हैं. दूसरी तरफ़ लड़कियां सोशल मीडिया पर स्टॉक करने और ख़ुद को नुक़सान पहुंचाने जैसे कदम उठाती हैं."
ये भी पढ़ें: वो तरीका जो शादीशुदा जोड़ों का रिश्ता बचा रहा है
कैसे जानें कि मदद की ज़रूरत है?
डॉ. शिखा के मुताबिक जब भी आपको लगे कि कोई शख़्स आपको हद से ज़्यादा प्रभावित कर रहा है और इसकी वजह से आपको दिक्कत हो रही है तो किसी की मदद लेने में मत हिचकिए.
डॉ. नीतू के अनुसार अगर आपके खाने-पीने, नींद और काम में किसी एक व्यक्ति की वजह से खलल पड़ रहा है, तो आपको मदद की ज़रूरत है.
डॉ. नीतू और डॉ. शिखा दोनों ही शुरुआत में किसी दोस्त या करीबी से बात करने की सलाह देती हैं.
डॉ. नीतू कहती हैं, "ऐसे वक़्त में ज़रूरी है अपनी ऊर्जा और भावनाएं किसी दूसरे शख़्स के लिए खर्च की जाएं. लेकिन अगर अपना ध्यान दूसरे लोगों या कामों में लगाने की तमाम कोशिशों के बाद भी आप उस शख़्स के ख़यालों से ख़ुद को नहीं निकाल पा रहे हैं तो शायद आपको साइकॉलजिस्ट के मदद की ज़रूरत है."
काउंसलिंग और थेरेपी के जरिए ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है. आम तौर पर काउंसलिंग या थेरेपी पांच-छह सेशन में इसका असर कम होने लगता है और धीरे-धीरे इंसान सामान्य हो जाता है.
डॉ. नीतू कहती हैं, "प्यार के जुनून में कोई बुराई नहीं है लेकिन हमें ये ध्यान ज़रूर रखना चाहिए कि कहीं प्यार की वजह से हमारी और दूसरे शख़्स को कोई गंभीर नुक़सान न हो रहा हो."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)