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बीजेपी के दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी को राजीव गांधी से ओझल करेगी कांग्रेस सरकार?
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान में अब सरकारी लेटर पैड से भाजपा के विचार पुरुष दीनदयाल उपाध्याय का नाम ओझल हो जाएगा.
इसके साथ ही अटल सेवा केंद्र का नाम राजीव गाँधी अटल सेवा केंद्र किया जा सकता है.
राजस्थान में कांग्रेस की नई सरकार का इरादा भामाशाह स्वास्थ्य योजना में लगी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की तस्वीर हटाने का भी है. बीजेपी ने सरकार के इस कदम को दुखद बताया है.
राज्य में कांग्रेस सरकार के कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवर लाल ने बीबीसी को बताया कि सरकारी लेटरहेड और लेटर पैड पर अब सिर्फ़ अशोक चिह्न होगा, क्योंकि सरकारी कागजों पर किसी और की तस्वीर और चिह्न की कोई ज़रूरत नहीं है.
मंत्री ने कहा, ''इस बारे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात करेंगे और इसे कैबिनेट में भी रखेंगे.''
भाजपा सरकार ने बदला था नाम
कांग्रेस ने अपने पिछले कार्यकाल में राजस्थान में मुफ्त दवा योजना शुरू की थी. लेकिन पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार ने इसकी जगह भामाशाह योजना शुरू कर दी थी. अब नई सरकार का इरादा मुफ्त दवा योजना को फिर से प्रारम्भ करने का है.
राजस्थान में साल 2014 में बीजेपी ने सत्ता में आते ही राजीव गाँधी सेवा केंद्र का नाम बदल कर अटल सेवा केंद्र कर दिया था.
इस पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया था और इसे कांग्रेस के एक नेता ने हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी. हाईकोर्ट ने क़रीब एक साल पहले राज्य सरकार के इस निर्णय को रद्द कर दिया था.
कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवर लाल ने बीबीसी से कहा, "इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार बदलाव किया जाएगा. राजीव गाँधी सेवा केंद्र के साथ अटल नाम जुड़ने पर कोई क्यों ऐतराज करेगा. दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी भी प्रधानमंत्री थे."
"कांग्रेस का आरोप था कि बीजेपी सरकार ने राजनैतिक भाव से यह कदम उठाया था जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है."
महापुरुषों का नाम हटाना कितना सही?
पहले की बीजेपी सरकार ने पिछले साल 11 दिसंबर को एक आदेश जारी कर सरकारी विभागों और संस्थानों से कहा कि वे अपने लेटर पैड पर जनसंघ के अध्यक्ष रहे दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का इस्तेमाल करे.
इसका कांग्रेस ने भारी विरोध किया था. बीजेपी प्रवक्ता मुकेश पारीक कहते हैं कि सरकार का यह कदम दुर्भाग्यपूर्ण है.
प्रोफेसर राजीव गुप्ता कहते हैं, ''दीनदयाल उपाध्याय का नाम सरकारी लेटरपैड से हटाना गलत नहीं है. क्योंकि वे एक पार्टी के अध्यक्ष थे. अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे. उनकी नाम में उपस्थिति समझ में आती है लेकिन उपाध्याय का नाम सरकारी क्षेत्र में स्थापित करने का कोई औचित्य नहीं है.''
पारीक कहते हैं, "दीनदयाल उपाध्यय ने देश को राजनीतिक स्वछता का पाठ पढ़ाया और वे राष्ट्रवाद के प्रतीक थे. ऐसे महापुरुषों का नाम हटाना दुखद है."
वो कहते हैं, ''भामाशाह योजना एक प्रेरणास्पद काम था. भामाशाह को किसी जाति-धर्म नहीं, मानवीय मूल्यों और राष्ट्रवाद के लिए याद किया जाता है.''
यूपी में बदला गया था मुगलसराय स्टेशन का नाम
केंद्र सरकार ने चार महीने पहले यूपी में मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर दीनदयाल उपाध्याय कर दिया था.
इसके अलावा कई और जगहों के नाम भी बदले गए हैं.
प्रोफेसर राजीव गुप्ता कहते हैं, ''स्थानों के नाम बदलने का चलन बढ़ा है. यह हिंदुत्व की प्रक्रिया का हिस्सा है. बीजेपी अपने हिंदुत्व के एजेंडे को देश भर में लागू करने को लेकर प्रतिबद्ध है.''
पारीक कहते हैं, "लगता था कि कांग्रेस के सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री गहलोत ने बीजेपी सरकार की अगर कोई अच्छी योजना होगी तो उसे सुदृढ़ किया जाएगा. मगर अब लगता है इससे उल्टा किया जा रहा है."
पूर्व में बीजेपी सरकार ने दीनदायल उपाध्याय के नाम से बहुत सारी योजनाएं शुरू की थी.
प्रोफेसर गुप्ता कहते हैं, ''ऐसे लोग जिनका जनता की स्मृति में कोई स्थान नही है. स्वाधीनता संग्राम में उनकी भूमिका नहीं है. उनका नाम सियासी मकसद सरकारी स्तर पर बढ़ाना ठीक नहीं है. जब राजीव गाँधी सेवा केंद्र का नाम बदला गया, कांग्रेस ने कोई बड़ा विरोध भी नहीं किया. असल में यह सब जनता का बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की खातिर भी किया जाता है. ये आवाम के लिए क्या करेंगे, इस पर चर्चा की बजाय दूसरे मुद्दों पर बहस केंद्रित कर दी गई है.''
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