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मोदी का रायबरेली दौरा, कांग्रेस का 'गढ़' ढहाने की तैयारी में बीजेपी
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, उत्तर प्रदेश से, बीबीसी हिंदी के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तर प्रदेश के रायबरेली शहर जा रहे हैं जहाँ वो रेल कोच फ़ैक्ट्री के उद्घाटन के अलावा कुछ परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे.
लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी की इस यात्रा के पीछे एक बड़े राजनीतिक मक़सद को भी देखा जा रहा है.
रायबरेली में रेल कोच फ़ैक्ट्री के उद्घाटन के अलावा मोदी एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे और इसके तुरंत बाद वो प्रयागराज में रैली को संबोधित करने के लिए निकल जाएंगे.
जहां तक रायबरेली का सवाल है तो ये न सिर्फ़ कांग्रेस की सबसे ताक़तवर नेता और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र है, बल्कि रायबरेली को गांधी परिवार का पारंपरिक गढ़ भी माना जाता है.
फ़िरोज़ गांधी से लेकर इंदिरा गांधी और अब ये सोनिया गांधी की लोकसभा सीट है.
2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यूपी में सिर्फ़ दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी, उनमें से एक रायबरेली भी थी. अमेठी दूसरी सीट थी जहाँ से राहुल गांधी जीते थे.
इसी साल अप्रैल महीने में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रायबरेली का दौरा किया था और उस दौरान कांग्रेस पार्टी के एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह अपने पूरे परिवार के साथ बीजेपी में शामिल हो गए थे.
दिनेश सिंह के एक भाई कांग्रेस पार्टी से ही एमएलए और एक अन्य भाई ज़िला पंचायत के अध्यक्ष हैं. दिनेश सिंह बीजेपी में शामिल नहीं हुए थे लेकिन जानकारों के मुताबिक देर-सवेर वो भी शायद बीजेपी का दामन थाम लेंगे.
बीजेपी नेताओं के लगातार दौरे
अमित शाह के बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और फिर वित्त मंत्री अरुण जेटली भी रायबरेली का दौरा कर चुके हैं. स्मृति ईरानी अमेठी संसदीय सीट का लगातार दौरा करती रहती हैं. जानकारों का कहना है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की निगाह कांग्रेस का गढ़ समझी जाने वाली इन दोनों सीटों पर लगी हुई है.
तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत से उत्साहित कांग्रेस पार्टी नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को बहुत तवज्जो नहीं दे रही है.
रायबरेली में कांग्रेस पार्टी के ज़िलाध्यक्ष वीके शुक्ल कहते हैं कि मोदी जी चार साल के बाद भी एक बार फिर उसी परियोजना का उद्घाटन करने आ रहे हैं जिसे यूपीए सरकार ने शुरू किया था.
रायबरेली की रेल कोच फ़ैक्ट्री का निर्माण यूपीए सरकार के दौरान हुआ था और यहां रेल कोच का निर्माण शुरू भी हो गया था.
प्रधानमंत्री इसी फ़ैक्ट्री में बनी कोचों को रवाना करने के लिए रायबरेली आ रहे हैं. कांग्रेस नेता वीके शुक्ल इसे 'चुनावी हथकंडा' बताते हैं, "रायबरेली की जनता जानती है कि चार साल में उन्हें चुनाव से ठीक पहले ही फ़ुर्सत मिली है, वो भी कांग्रेस की शुरू की हुई परियोजना का उद्घाटन करने के लिए. ये सब तीन राज्यों की हार से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए है, और कुछ नहीं."
प्रधानमंत्री की इस यात्रा को तीन राज्यों में बीजेपी की हार और कांग्रेस की जीत के लिहाज़ से भी काफी अहम माना जा रहा है.
हालांकि पीएम मोदी का ये कार्यक्रम पहले से ही तय था लेकिन लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार सुनीता ऐरन कहती हैं कि इसके ज़रिए नरेंद्र मोदी पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश करेंगे.
बीजेपी की नई परंपरा
वरिष्ठ पत्रकार सुनीता ऐरन के मुताबिक़, "सीधे कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता के क्षेत्र में हमला बोलकर पीएम मोदी एक तरह से 2019 के चुनाव की आक्रामक शैली का आग़ाज़ करना चाह रहे हैं. रफ़ाल मुद्दे पर जिस तरह से राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी उन्हें घेर रही है, सुप्रीम कोर्ट से जिस तरह से उन्हें राहत मिली है, उसके ज़रिए कांग्रेस पार्टी को घेरने की रायबरेली से बेहतर जगह क्या होगी. पिछले चुनाव में बीजेपी ने अमेठी पर तो फ़ोकस किया था लेकिन रायबरेली पर नहीं. लेकिन इस बार शायद ये दोनों सीट उसके निशाने पर हों."
सुनीता ऐरन का ये कहना है कि बड़े नेताओं की सीट को किसी भी क़ीमत पर जीत लेने की बीजेपी ने नई परंपरा शुरू की है. वो कहती हैं, "बीजेपी के किसी बड़े नेता ने अमेठी-रायबरेली में रैली नहीं की और न ही कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कभी अटल जी के क्षेत्र लखनऊ में रैली की. हां, मोहनलालगंज जैसे लखनऊ के नज़दीकी इलाक़े में भले ही सोनिया ने सभा की लेकिन लखनऊ में नहीं. पर, राजनीति में अब ये शिष्टाचार वाला दौर ख़त्म हो चुका है."
गढ़ को ढहाना इतना आसान नहीं
लेकिन लगभग अपराजेय समझी जाने वाली इस सीट पर बीजेपी क्या सोनिया गांधी को घेर पाएगी? इस सवाल के जवाब में एशियन एज की वरिष्ठ पत्रकार अमिता वर्मा कहती हैं, "इतना आसान तो ख़ैर नहीं है, ये बीजेपी भी जानती है. लेकिन बीजेपी को लगता है कि ऐसा करके वो अपने कार्यकर्ताओं में उत्साह ज़रूर बढ़ा सकती है. जहां तक रायबरेली और अमेठी का सवाल है तो यहां बड़ी संख्या में लोग गांधी परिवार से भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस करते हैं. उन्हें इस बात पर गर्व की अनुभूति होती है कि उनका प्रतिनिधित्व गांधी परिवार के अहम लोग करते हैं."
अमिता वर्मा के मुताबिक़, "सोनिया गांधी को घेरने की बीजेपी कितनी भी रणनीति बनाए, कोशिश करे, लेकिन जीत का अंतर कम कर सकती है, पराजित करना काफ़ी मुश्किल है. अमेठी में ही राहुल गांधी को मोदी लहर में भी बीजेपी सिर्फ़ टक्कर ही दे पाई थी, इससे ज़्यादा कुछ नहीं."
प्रधानमंत्री के दौरे का विरोध
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रायबरेली दौरे से ठीक पहले शनिवार सुबह से ही शहर में उनके विरोध में बड़ी संख्या में पोस्टर लगे मिले.
मकानों की दीवारों पर पोस्टर और होर्डिंग्स के जरिए उनका विरोध जताया जा रहा है.
पोस्टर्स में हिन्दी में 'मोदी वापस जाओ' और अंग्रेज़ी में 'मोदी गो बैक' लिखा हुआ था. ये पोस्टर समाजवादी पार्टी और स्वराज इंडिया की ओर से लगाए गए थे. हालांकि बाद में प्रशासन ने ज़्यादातर पोस्टर और होर्डिंग हटवा दिए.
वहीं वरिष्ठ पत्रकार अमिता वर्मा कहती हैं कि प्रधानमंत्री को रायबरेली में सोनिया गांधी के लिए विधान सभा चुनाव के दौरान कथित तौर पर 'विधवा' संबंधित टिप्पणी के लिए भी शायद लोगों की नाराज़गी झेलनी पड़े.