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सुब्रमण्यम स्वामी की नरेंद्र मोदी और अमित शाह को नसीहत
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि किसी को भी ख़ुद को जनता का ठेकेदार नहीं समझना चाहिए और पार्टी को जागने की ज़रूरत है.
बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में जब पार्टी के प्रदर्शन और पार्टी अध्यक्ष की रणनीति के बारे में पूछा गया, तो सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, "हम तो कहते थे जीतते जाएंगे, जीतते जाएंगे लेकिन जनता के बारे में कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता है. इंदिरा गांधी भी यही समझती थीं लेकिन क्या हुआ? वो ख़ुद हार गईं."
दावा
अपनी बेबाकी के लिए जाने जानेवाले स्वामी ने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन लोगों को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का वो बयान याद होगा, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि 2019 वो जीतेंगे और उसके बाद अगले 50 सालों तक पार्टी देश में शासन करेगी.
सितंबर में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ये बात मीडिया को बताई थी.
मंगलवार को आए चुनाव नतीजे में बीजेपी को हिंदी पट्टी के तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार का सामना करना पड़ा है और कांग्रेस तीनों सूबों में सरकार बनाने की प्रक्रिया में है.
लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि इन वोटों को कांग्रेस के पक्ष में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि छत्तीसगढ़ के अलावा कांग्रेस को दोनों में से किसी राज्य में बहुमत नहीं मिला है.
स्वामी ने कहा, "उत्तर-पूर्वी राज्य मिज़ोरम जहां कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, वहां वो हार गई है और दक्षिणी राज्य तेलंगाना में भी उसे कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई."
भाजपा के राज्य सभा सांसद का कहना था कि चुनाव नतीजों से स्पष्ट हो गया है कि पब्लिक बीजेपी को जगाना चाहती थी.
उनका कहना था कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से किसान और व्यापारियों में नाराज़गी है. ये लोग परंपरागत रूप से बीजेपी के समर्थक रहे हैं.
वो विदेशों से काला धन वापस लाने के बीजेपी का वादे पूरा न हो पाने को भी जनता की नाराज़गी की वजह मानते हैं और दावा करते हैं कि 15 लाख रुपए हर भारतीय के खाते में दिए जाने का जो वादा प्रधानमंत्री ने किया था वो पूरा होगा.
स्वामी ये भी कहते हैं कि राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर बीजेपी को ज़ोर-शोर से काम करना होगा. हालांकि इस मामले को वो अदालत के ज़रिए सुलझाना चाहते हैं जहां उनकी एक याचिका लंबित है.
आरएसएस और वीएचपी राम मंदिर निर्माण के लिए क़ानून लाने की मांग कर रहे हैं लेकिन स्वामी का कहना है कि क़ानून या विधेयक लाए जाने के मामले पर वो कुछ नहीं बोलना चाहेंगे क्योंकि उससे जो क़ानूनी प्रक्रिया उन्होंने अदालत में चला रखी है उसको नुक़सान हो सकता है.
नाराज़गी
शक्तिकांत दास को आरबीआई का गवर्नर नियुक्त किए जाने पर सुब्रमण्यम स्वामी नाराज़ हैं और उनका कहना है कि वो नहीं समझ सकते हैं कि जिस आदमी को उन्होंने वित्त मंत्रालय से बाहर करवाया था, उसे देश के केंद्रीय बैंक का मुखिया कैसे बना दिया गया.
उनका कहना था कि उन्होंने इस मामले पर प्रधानमंत्री को लिखा है.
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