You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सिद्धू के साथ नज़र आए 'ख़ालिस्तान समर्थक' गोपाल चावला कौन हैं
- Author, दलजीत अमी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर करतारपुर कॉरिडोर की नींव रख दी गई है. इस कॉरिडोर के बहाने दोनों देशों के संबंधों और चरमपंथ जैसे मुद्दों पर एक बार फिर चर्चा छिड़ी.
गोपाल सिंह चावला इन चर्चाओं के केंद्र में रहे. पाकिस्तान के सेना अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ उनकी तस्वीरें वायरल हो गईं. दावा किया गया कि चावला खलिस्तान समर्थक नेता हैं और उनके संबंध पाकिस्तान के सेना अध्यक्ष के साथ हैं.
हाफिज़ सईद के साथ चावला के संबंधों की बात सामने आने के बाद चर्चा और गरम हो गई.
इसके कुछ वक्त बाद ही पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के साथ उनकी तस्वीरें सामने आईं. ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गईं.
इससे पहले सिद्धू जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में गए थे तब भी उन्होंने पाकिस्तान के सेना अध्यक्ष को गले लगाकर हंगामा खड़ा कर दिया था.
ना सिर्फ़ बीजेपी बल्कि उनके खुद के मुख्यमंत्री ने भी इसपर आपत्ति की थी. इस बार गोपाल चावला के साथ नज़र आने को लेकर उनकी आलोचना हो रही है.
इस मौके पर ये सवाल अहम हो जाते हैं कि ये गोपाल सिंह चावला कौन है और शिलान्यास समारोह में उनकी शिरकत के क्या मायने हैं?
उनकी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल के मुताबिक वो पाकिस्तान के ज़िले ननकाना साहिब के निवासी हैं और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के जनरल सेकेट्री हैं.
गोपाल चावला के बारे में
इसके अलावा वो पंजाबी सिख संगत नाम के एनजीओ के चेयरमैन भी हैं. ये एनजीओ 1947 के बंटवारे के वक्त बिछड़े परिवारों को मिलाने का काम करता है.
जब चावला की तस्वीरें सरहद के दोनों तरफ वायरल हुईं और भारतीय मीडिया में उनकी खलिस्तान समर्थित राजनीति पर चर्चा होने लगी तो उन्होंने पाकिस्तानी टीवी चैनल सामना में एक चर्चा के दौरान कहा, "मैं अपने देश के सेना अध्यक्ष से मिला हूं, ना कि इसराइल या भारत के सेना अध्यक्ष से. कमर जावेद बाजवा हमारे दिलों में रहते हैं, क्योंकि सिख बिरादरी का पाकिस्तान से उसी तरह का रिश्ता है, जैसा मुस्लिमों का सऊदी अरब से है. अगर पाकिस्तान तरक्की करता है तो सिख कौम तरक्की करती है."
उन्होंने सिख और मुस्लिम समुदाय के बीच के ऐतिहासिक रिश्तों के बारे में बात की. उन्होंने कहा, "गुरु नानक की पैदाइश माई दौलता के हाथों से हुई. राय बुलार भाटी ने गुरु नानक की रुहानियत को सबसे पहले पहचाना था और मर्दाना उनके सबसे करीबी साथी थे. हज़रत मीया मीर ने अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की नींव रखी थी. गुरु ग्रंथ साहिब में 103 जगहों पर बाबा फरीद का ज़िक्र आता है."
पंजाबी सिख संगत के फेसबुक पेज के 54000 फॉलोअर हैं. इस पेज से जुड़ी खबरों को गोपाल सिंह फ़ेसबुक पर शेयर करते हैं. जिस आख़िरी ख़बर को उन्होंने शेयर किया वो दो बहनों और एक भाई की ख़बर है. ये तीनों भाई-बहन बंटवारे के वक्त अलग हो गए थे और अब सत्तर साल बाद ननकाना साहिब में मिले हैं. उनको मिलाने का काम पंजाबी सिख संगत ने ही किया था.
चावला की टाइम लाइन पर एक और वीडियो दिखती है, जिसमें वो पाकिस्तानी टीवी चैनल पीटीवी की 54 वर्षगांठ के मौके पर पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों पर हुई एक चर्चा में शामिल हुए हैं. इसमें वो सिख समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए थे.
एक दूसरे वीडियो में वो गुरुद्वारा ननकाना साहिब में बोल रहे हैं कि इस जगह पर हर किसी को अपनी बात कहने का हक है. उन्होंने कहा कि यहां दमदमी टकसाल और रेफरेंडम-2020 वाले अपने बैनर लगा सकते हैं.
उन्होंने कहा, "सिखों की जितनी आज़ादी पाकिस्तान में मिलती है, वो दुनिया के किसी और कोने में नहीं मिलती है. अगर भारत को हमसे आगे निकलना है तो वहां के सिखों को भी इस तरह की आज़ादी दे दे."
इसके बाद वो भारत में सिखों के साथ हो रहे अत्याचार की बात करते हुए एक आज़ाद मुल्क, खलिस्तान की मांग करते हैं.
इस वीडियो के अंत में वो जगतार सिंह हवारा को अमृतसर के अकाल तख्त का जत्थेदार बनाने का एक संकल्प पारित करते हैं और खालिस्तान के नारे लगवाते हैं.
जगतार सिंह हवारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्या के दोष में सज़ा काट रहे हैं. उन्हें नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया है.
25 नवंबर को शेयर किए गए वीडियो में चावला पाकिस्तान के मज़हबी मामलों के केंद्रीय मंत्री पीर नूर क़ादरी के पीछे खड़े हैं.
इस वीडियो में पीर नूर क़ादरी गुरु नानक की 550वीं जयंती पाकिस्तान में धूम-धाम से मनाने का ऐलान कर रहे हैं.
इन वीडियो को देखकर गोपाल चावली की पाकिस्तान सरकार से नज़दीकी को समझा जा सकता है. साथ ही चावला की धार्मिक और राजनीतिक सोच के बारे में भी जाना जा सकता है.
बीबीसी पंजाबी ने गोपाल सिंह चावला से बातचीत की और नवजोत सिंह सिद्धू के साथ उनकी तस्वीर के बारे में पूछा. इसपर उन्होंने कहा, "पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति का जनरल सेकेट्री और पंजाबी सिख संगत का चेयरमैन होने के नाते मैं उनका स्वागत करने के लिए वहां मौजूद था. वो हमारे देश के मेहमान थे. कई दूसरे मेहमानों के साथ भी मेरी तस्वीरें हैं."
गोपाल सिंह ने बताया कि 1947 के बंटवारे के वक्त उनके पिता संत सिंह ने पाकिस्तान में ही रुकने का फ़ैसला किया जबकि उनके ज़्यादातर रिश्तेदार भारत चले गए थे.
'ख़ालिस्तान ज़रूर बनेगा'
उस वक्त वो पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में रहते थे. 1971 में उनकी मां का परिवार ननकाना साहिब आ बसा.
गोपाल चावला का जन्म 1980 में ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में हुआ था, लेकिन बाद में उनका परिवार ननकाना साहिब आकर बस गया.
उन्होंने फ़ैसलाबाद से चार साल की होमोपैथिक डॉक्टरी की पढ़ाई की. अब वो ननकाना साहिब में डॉक्टरी करते हैं और उनके तीन बच्चे हैं.
एक उर्दू वीकली के 10-16 नवंबर, 2016 अंक में उनका एक इंटरव्यू छपा था. जिसे उन्होंने अपनी टाइमलाइन पर 25 नवंबर को रिशेयर किया.
इर्शाद अहमद के इस लेख की हेड लाइन कहती है, "पाकिस्तीन गुरु नानक की धरती है, इसकी हिफ़ाज़त और इससे मोहब्बत हमारे मज़हब का हिस्सा है. हमें यक़ीन है कि ख़ालिस्तान ज़रूर बनेगा और कश्मीर आज़ाद होकर रहेगा. मोदी सरकार के ज़ुल्म ने हमारे इरादों को और मज़बूत किया है और नए आंदोलनों को जन्म दिया है."
ख़ालिस्तान और पाकिस्तान में नहीं होगी सरहद
ख़ालिस्तान के प्रस्तावित नक्शे के बारे में पूछे जाने पर गोपाल चावला ने कहा, "हमें पहले पूरा पंजाब लेना चाहिए था, लेकिन 1974 में हमने पाकिस्तान को पंजाब का बहुत सा हिस्सा दे दिया. हमें पाकिस्तान से कोई परेशानी नहीं है, इसलिए ख़ालिस्तान तो भारत के पंजाब वाले हिस्से से ही बनेगा."
वो कहते हैं कि सिखों के कई धार्मिक स्थल पाकिस्तान में है, इसलिए वहां के पंजाब पर तो हमारी दावेदारी है ही. उनकी योजना है कि पाकिस्तान और ख़ालिस्तान के बीच कोई सीमा नहीं होगी.
वो पाकिस्तान और ख़ालिस्तान को एक ही देश के रूप में देखते हैं. वो कहते हैं कि सिखों और मुस्लिमों में ऐतिहासिक तौर पर भाईचारा है.
जब उनसे हिंदू और सिखों के बीच के ऐसे ही रिश्तों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हिंदू भी हमारे भाई हैं लेकिन हम हिंदू नहीं है. जैसे मुस्लिम हमारे भाई हैं, लेकिन हम मुस्लिम नहीं है."
ख़ालिस्तान की अपनी मांग को जायज़ ठहराते हुए चावला कहते हैं, "जैसे मुस्लिमों, हिंदूओं, ईसाइयों के अपने देश हैं, वैसे ही सिखों का भी अपना एक देश होना चाहिए."
'हाफिज़ यहां के हिंदूओं का देवता'
हाफिज़ सईद के साथ उनकी नज़दीकी पर पूछे गए सवाल का उन्होंने इस तरह जवाब दिया, "पाकिस्तान में उन्हें हाफिज़ सईद साहब कहते हैं. वो पाकिस्तान के नागरिक हैं और उनकी संस्था फला-ई-इंसानियत पूरे पाकिस्तान में एंबुलेंस की सेवा देती है. पाकिस्तान के सिंध सूबे में थार का इलाक़ा है जहां हिंदू आबादी है और वहां हाफिज़ सईद ने हर गांव में कुआं खुदवाया है. वहां के हिंदू उन्हें अपना देवता मानते हैं."
उन्होंने बताया कि मानवाधिकार के कार्यक्रमों में मुस्लिमों और दूसरे समुदायों का प्रतिनिधित्व इनके ही प्रतिनिधि करते हैं. इस तरह के कार्यक्रमों में गोपाल सिंह चावला सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं.
उन्होंने कहा, "ये मेरा देश है और हाफिज़ सईद भी इसी देश का नागरिक है. तो मैं कैसे उनके साथ मंच साझा करने से इनकार कर दूं? भारत के लिए भले ही वो एक चरमपंथी हों, लेकिन वो पाकिस्तान के नागरिक तो रहेंगे ही. उनसे हाथ मिलाने भर से मैं चरमपंथी कैसे बन सकता हूं?"
आईएसआई के साथ संबंध से इनकार
जब पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई से उनके संबंध होने की बात के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने किसी भी तरह के संबंध होने से साफ़ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "भारत में जो भी हो वो आईएसए को ज़िम्मेदार बता देते हैं. ठीक वैसे ही जब पाकिस्तान में कोई चरमपंथी हमला होता है तो रॉ पर शक किया जाता है. भारत आईएसआई या गोपाल चावला को भारत में किसी की सिरदर्द की वजह भी बता सकते हैं."
चार दशक से भी ज़्यादा वक्त तक भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर नज़र रखने वाले भारतीय पत्रकार गोबिंद ठकुराल कहते हैं कि मौजूदा दौर में पाकिस्तान अंदर और बाहर से जबरदस्त दबाव में है.
"सत्ता में आने के बाद इमरान खान ने राजनयिक कोशिशें की है, जिससे उनकी सकारात्मक छवि बनी है. पाकिस्तान समझ चुका है कि युद्ध से कोई फ़ायदा नहीं होगा. अमरीका के साथ मिलकर अफ़ग़ानिस्तान में उनकी दख़लअंदाज़ी नाकामयाब साबित हुई है और अब अमरीका ने पाकिस्तान के साथ हर तरह के मोर्चे पर हाथ पीछे खींच लिए हैं. अब वो मदद करे लिए चीन और सऊदी अरब की तरफ देख रहे हैं. भारत के साथ भी वो रिश्ते सुधारना चाहते हैं. शपथ ग्रहण समारोह में इमरान ख़ान ने नवजोत सिंह सिद्धू को आमंत्रित किया, जहां जनरल बाजवा ने करतारपुर कॉरिडोर बनाने का वादा किया."
गोबिंद ठकुराल कहते हैं कि भारत को भी इस बारे में तुरंत फ़ैसला लेना पड़ा और पाकिस्तान के करतारपुर में शिलान्यास समारोह में दो केंद्रीय मंत्रियों को भेजना पड़ा.
ठकुराल कहते हैं कि आज गोपाल सिंह चावला सरहद की पेचीदगी का नुमाइंदा बना है. आने वाले दिनों में कोई और भी हो सकता है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)