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जनरल बाजवा से किस वजह से गले मिले सिद्धू
- Author, गुरप्रीत सिंह चावला
- पदनाम, गुरदासपुर से, बीबीसी पंजाबी के लिए
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जरनल क़मर जावेद बाजवा से नवजोत सिंह सिद्धू के गले लगने पर छिड़ी बहस गुरुद्वारा करतारपुर साहिब पर आकर ठहरती दिख रही है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मेहमान बनकर पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू जनरल बाजवा से गले क्या मिले, पंजाब से लेकर दिल्ली तक इस क़दर हंगामा हुआ कि सिद्धू को सफ़ाई देनी पड़ी.
सिद्धू के मुताबिक़ जनरल बाजवा ने उनसे कहा कि भारतीय सिखों के लिए करतारपुर साहिब के गुरुद्वारे में जाने के लिए विशेष रास्ता मुहैया कराए जाने के लिए कोशिश की जा रही है.
सिद्धू ने इसे इमोशनल लम्हा कहा और बकौल उनके भावुक होकर वे जनरल बाजवा से गले लग पड़े.
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब
पाकिस्तान में रह गए ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने की अरदास (प्रार्थना) सिख हर रोज़ करते हैं.
इन गुरुद्वारों में से एक भारत-पाकिस्तान की सीमा से चार किलोमीटर दूर करतारपुर साहिब है, जो नवजोत सिंह सिद्धू की हालिया पाकिस्तान यात्रा के बाद चर्चा में है.
इस गुरुद्वारे के लिए विशेष रास्ते की मांग लगातार होती रही है.
मौजूदा हालात में सिख संगत इस गुरुद्वारे के दर्शन सरहद पर खड़े होकर दूर से करती है.
यहां पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने दर्शन स्थल बना रखा है.
भारत-पाकिस्तान सीमा पर
करतारपुर साहिब में गुरु नानक देव ने अपनी ज़िंदगी का अंतिम समय बताया.
यहीं पर उन्होंने खेती की और 'कीर्त करो, नाम जपो, वंड शको' (काम करो, भगवान का नाम लो और बांट कर खाओ) का उपदेश दिया था.
इसी जगह पर 18 साल रहने के बाद गुरु नानक देव जी के बाद गुरु अंगद देव को गुरु गद्दी मिली.
दर्शन स्थल पर हर महीने सिख संगत अमावस के दिन जुटती है और वहां से विशेष रास्ते के लिए अरदास की जाती है.
साल 2001 से ही लगातार हर महीने प्रार्थना की जा रही है.
इस जगह को 6 मई, 2008 को बीएसएफ़ ने विशेष करतारपुर दर्शन स्थल के तौर पर मान्यता दे दी क्योंकि ये जगह सीमा से लगी हुई थी और इसकी देखरेख का जिम्मा उस पर था.
सिखों की आस और अरदास
इस मुहिम के साथ जुड़े हुए गुरिंदर सिंह बाजवा कहते हैं, "करतारपुर साहिब सिखों के लिए मक्का है और दोनों देशों की सरकारों को यहां पर एक विशेष रास्ता बनाना चाहिए ताकि सिख समुदाय के लोग वहां दर्शनों के लिए आ-जा सकें."
इस मांग को लेकर स्थानीय राजनेताओं ने प्रतिनिधिमंडल बनाकर भारत और पाकिस्तान की अलग-अलग अथॉरिटीज़ के सामने ये मांग कई बार रखी है.
लुधियाना से दर्शन स्थल पर आए 80 साल के बुजुर्ग जोगिंदर सिंह अपनी पत्नी पवित्रजीत कौर के साथ कई सालों से इस इंतज़ार में हैं कि उन्हें गुरुद्वारे के दर्शन दूरबीन से नहीं करने पड़ेंगे बल्कि वो खुद जाकर करतारपुर साहिब गुरुद्वारा देख सकेंगे.
मुक्तसर से अरविंदर सिंह पहले भी कई बार दर्शन स्थल पर आ चुके हैं और पाकिस्तान में सिख जत्थे के साथ जाकर भी करतारपुर साहिब गुरुद्वारा के दर्शन कर चुके हैं.
उनका कहना है कि ये जगह उन्हें बार-बार खींच लाती है और वो उम्मीद करते हैं कि जल्दी ही यहां पर विशेष रास्ता खुलेगा और उन्हें अपने गुरु के स्थान पर जाने के लिए वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं रहेगी.
ज़िला गुरदासपुर के दोरांगला से राजपूत करनैल सिंह और उनकी पत्नी सुरक्षा ने दूरबीन से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शन करने के बाद कहा, "हमारी आस्था गुरुनानक देव जी में है. इसी कारण हम विशेष रास्ता खोले जाने के लिए प्रार्थना करने पहली बार यहां आए हैं."
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