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क्या कांग्रेस के लिए पाकिस्तान से मुसीबत ले आए हैं सिद्धू
कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू अपने पाकिस्तान दौरे को लेकर पहले ही विवादों में थे लेकिन पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल जावेद बाजवा से गले मिलने के बाद बीजेपी ने उन्हें सीधे निशाने पर ले लिया है.
नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गए हैं. इमरान ख़ान ने सिद्धू को इस समारोह में शामिल होने का न्योता था.
इसके अलावा उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव और पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर को भी न्योता दिया था. पर उन्होंने समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया था.
सिद्धू इस्लामाबाद गए और इमरान ख़ान को बधाई दी लेकिन जैसे ही वो जनरल बाजवा से गले मिले, विवादों में आ गए.
बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कांफ्रेंस कर जनरल बाजवा से गले मिलने पर सवाल उठाया.
उन्होंने कहा कि जनरल बाजवा से गले मिलना कोई साधारण बात नहीं है बल्कि ये एक अपराध है. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी सवाल किया कि क्या सिद्धू उनसे इजाजत लेकर पाकिस्तान गए हैं. बीजेपी ने सिद्धू को पार्टी से निकालने तक की मांग की है.
संबित पात्रा ने सिद्धू को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के राष्ट्रपति के बराबर में बैठाने को लेकर भी आलोचना की.
पाकिस्तान को लेकर बीजेपी सरकार की नीति पर कांग्रेस भी कटघरे में खड़ी करती रही है. इसमें कांग्रेस पाकिस्तान को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले मिलने का मसला भी उठाती है.
लेकिन, सिद्धू के गले मिलने से क्या अब कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है. क्या कांग्रेस के ख़िलाफ़ बीजेपी को एक हथियार मिल गया है?
इस बारे में बीबीसी संवाददाता कमलेश मठेनी ने बात की वरिष्ठ पत्रकार अपर्णा द्विवेदी से. पढ़िए उन्हीं के शब्दों में-
कांग्रेस के लिए होगी मुश्किल?
नवजोत सिंह सिद्धू इमरान के दोस्त बनकर भले ही गए हों लेकिन उनका रुतबा एक कांग्रेस नेता का है. हो सकता है कि सिद्धू सोच रहे हों कि वो व्यक्तिगत तौर पर गए हैं, लेकिन हैं वो एक कांग्रेसी नेता ही.
तो ऐसे में कांग्रेस के एक नेता पाकिस्तान में जाकर उनके सेना प्रमुख से गले मिल रहे हैं जबकि दोनों देशों की सेना के बीच सीमा पर तनाव बना रहता है. अक्सर संघर्षविराम के उल्लंघन और घुसपैठ की ख़बरें आती रहती हैं.
इस मामले में सिद्धू हाथ भी मिलाकर साइड हो सकते थे लेकिन वो गले मिले. भले ही उन्हें ये लगा रहो हो कि वो मोहब्बत का पैगाम लेकर गए हों लेकिन उनका राजनीतिक रुतबा कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी करेगा.
बीजेपी पहले ही इसे मुद्दा बना चुकी है और कांग्रेस की तरफ़ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
एक सवाल उठता है कि क्या गले मिलकर सिद्धू कोई संदेश देना चाहते थे या ऐसे ही जोश में गले मिल गए. इसने कहीं न कहीं कांग्रेस को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया.
कितना बड़ा बनेगा मसला
भारत और पाकिस्तान के संबंध हमेशा ही हमारे देश में राजनीतिक मुद्दा बनते रहे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू का ये क़दम कांग्रेस के सामने सवाल खड़ा कर सकता है.
ये मुद्दा अभी शांत नहीं होगा. जब-जब चुनाव आएंगे, जब भी देश की सुरक्षा और पाकिस्तान के हमले का मसला उठेगा तो इस घटना को बार—बार बताया जाएगा कि कांग्रेस के एक नेता जनरल बाजवा से गले मिले.
हालांकि, अगर वो सिर्फ़ इमरान ख़ान को बधाई देकर और गले मिलकर आते तो वो एक दोस्त से गले मिलना होता लेकिन जनरल बाजवा से गले मिलना कांग्रेस के लिए सकते की बात होगी.
फिर आगे विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी आने वाले हैं तो बीजेपी इससे फ़ायदा उठा सकती है. तभी उसने प्रेस कांफ्रेंस करके इस पर तुरंत सवाल उठा दिया.
क्या पार्टी की इजाज़त ज़रूरी
आमतौर पर परंपरा रही है कि अगर कोई नेता इस तरह के समारोह में जाता है तो अपने वरिष्ठ को बताकर जाता है क्योंकि ये एक अंतरराष्ट्रीय मामला है. वो पार्टी की लाइन लेकर जाता है.
लेकिन, ये न्योता अगर नवजोत सिंह सिद्धू को आया था न कि एक कांग्रेसी नेता को, तो ऐसे में इजाज़त लेना ज़रूरी भी नहीं है.
क्या सिद्धू भविष्य की सोच रहे हैं
सिद्धू के दिमाग में क्या होगा ये तो पूरी तरह वही बता सकते हैं. लेकिन, हो भी सकता है कि उनके दिमाग में आया हो कि उनका दोस्त प्रधानमंत्री बना है तो उनकी बात का महत्व होगा.
लेकिन, व्यक्तिगत तौर पर बुलाए गए नेता क्या भविष्य में दो देशों की अंतरराष्ट्रीय स्थिति में मदद कर पाएंगे, ये भविष्य में ही पता चलेगा.
वहीं ये देखना ज़रूरी है कि क्या इमरान ख़ान उन्हें ये महत्व दे रहे हैं. वो सिद्धू को एक क्रिकेटर के तौर पर, दोस्त के तौर पर बुला रहे हैं या आने वाले समय में राजनयिक मिशन पर आए हुए एक नेता के तौर पर बुला रहे हैं.
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