राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ जाँच में अजीत डोभाल ने दखल दिया: सीबीआई के डीआईजी

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल

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केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई के डीआईजी एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया है कि अजीत डोभाल ने जाँच में दखलअंदाज़ी की.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ चल रही जाँच में डोभाल ने हस्तक्षेप किया.

सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा.

सिन्हा ने अपनी याचिका में कहा है कि अस्थाना के घर पर सर्च करने से डोभाल ने उन्हें रोका था.

सिन्हा, सीबीआई के उन अधिकारियों में शामिल थे जो सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर अस्थाना के ख़िलाफ़ जांच कर रहे थे और बाद में अक्टूबर में उनका अन्य अफ़सरों के साथ तबादला कर दिया गया था.

सिन्हा ने आरोप लगाया कि रिश्वतखोरी के इस मामले में जो दो मध्यस्थ शामिल थे, वो डोभाल के करीबी थे.

सिन्हा ने यह आरोप लगाया है कि अस्थाना रिश्वत मामले में शिकायतकर्ता, सना सतीश बाबू ने उन्हें बताया था कि कोयला और खान राज्य मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी को संबंधित मामलों में कथित मदद के लिए कई करोड़ रुपये की रिश्वत का भुगतान किया गया था.

याचिका में यह भी कहा गया है कि रॉ के अधिकारी सामंत गोयल से जुड़े वार्तालाप पर निगरानी से छेड़छाड़ की गई थी. जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना गया था कि पीएमओ ने सीबीआई मामले का प्रबंधन किया था और उसी रात अस्थाना मामले की जांच करने वाली पूरी सीबीआई टीम हटा दी गई थी.

सिन्हा ने यह भी दावा किया है कि सना सतीश बाबू, मोइन क़ुरैशी मामले में केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त केवी चौधरी से मिले थे और केंद्रीय कानून सचिव सुरेश चन्द्र ने 11 नवंबर को उनसे (सना) से संपर्क किया था.

फ़ाइल फोटो

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सिन्हा ने याचिका में कहा है, "मनोज प्रसाद (अस्थाना के ख़िलाफ़ मामले में गिरफ़्तार मध्यस्थ) के मुताबिक, मनोज के पिता दिनेश्वर प्रसाद और रॉ के संयुक्त सचिव रहे सोमेश के मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से नजदीकी संबंध हैं."

सिन्हा ने दावा किया कि 15 अक्टूबर को अस्थाना के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज होने के बाद, सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा ने इसकी जानकारी 17 अक्टूबर को डोभाल को दी थी.

याचिका में कहा गया है, "उन्हें पता चला है कि इसी रात एनएसए ने अस्थाना को उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज होने की जानकारी दी. ये भी पता चला है कि राकेश अस्थाना ने कथित तौर पर एनएसए से आग्रह किया कि उनकी गिरफ़्तारी नहीं होनी चाहिए."

सिन्हा ने ये भी आरोप लगाया कि इस मामले में जब जाँच अधिकारी एके बस्सी ने अस्थाना के मोबाइल फ़ोन को जब्त करने और सर्च करने की अनुमति मांगी थी, "सीबीआई डायरेक्टर ने तत्काल अनुमति नहीं दी और कहा कि एनएसए ने अभी मंज़ूरी नहीं दी है."

याचिका में कहा गया है कि 22 अक्टूबर को सीबीआई डायरेक्टर से लिखित अनुमति मांगी गई, लेकिन इसे फिर ठुकरा दिया गया.

सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना

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अस्थाना के ख़िलाफ़ क्या है मामला

राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ सीबीआई ने हैदराबाद के बिज़नेसमैन सतीश बाबू की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज की है.

सतीश बाबू का आरोप है कि उन्होंने अपने ख़िलाफ़ जांच रोकने के लिए तीन करोड़ रुपयों की रिश्वत दी. एफ़आईआर में अस्थाना के ख़िलाफ़ साज़िश और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है.

एफ़आईआर में कहा गया है कि सतीश बाबू ने दुबई में रहने वाले एक व्यक्ति मनोज प्रसाद की मदद से रिश्वत देने की बात कही है.

एफ़आईआर के मुताबिक, मनोज प्रसाद का दावा था कि वो सीबीआई में लोगों को जानता है और जांच को रुकवा सकता है. सतीश बाबू के ख़िलाफ़ जो जांच चल रही थी कि उसकी अगुआई राकेश अस्थाना कर रहे थे.

कौन हैं राकेश अस्थाना

आलोक वर्मा और अस्थाना

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1984 बैच के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना झारखंड के रांची शहर से आते हैं.

जेएनयू से पढ़ाई करने वाले अस्थाना को नरेंद्र मोदी और अमित शाह के क़रीबी अधिकारियों में से एक माना जाता है. जब केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनी तो गुजरात काडर के राकेश अस्थाना को 20 अन्य आला अफ़सरों के साथ गुजरात से दिल्ली बुलाया गया. इन अधिकारियों की सूची में सबसे ऊपर हैं हंसमुख अधिया. वो वित्त मंत्रालय में सचिव हैं.

वहीं रीता टोटिया भी गुजरात में अधिकारी रही हैं और अब वो वाणिज्य सचिव हैं. वहीं तपन राय कॉरपोरेट मामलों के सचिव हैं.

राकेश अस्थाना ने अपने अब तक के करियर में उन अहम मामलों की जांच की है जो कि वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से ख़ास माने जाते हैं.

इन मामलों में गोधरा कांड की जांच, चारा घोटाला, अहमदाबाद बम धमाका और आसाराम बापू के ख़िलाफ़ जांच शामिल है.

लेकिन राकेश अस्थाना को लालू प्रसाद यादव से लगातार छह घंटे तक पूछताछ करने के बाद ही ख्याति मिली थी.

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