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महाराष्ट्रः मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मराठा समुदाय के लिए किया आरक्षण का ऐलान
महाराष्ट्र सरकार ने आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मराठा समुदाय को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के तहत आरक्षण देने की घोषणा की है.
महाराष्ट्र विधानसभा का शीत सत्र शुरू होने की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने ये घोषणा की है. हालांकि कितने प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा ये अभी स्पष्ट नहीं किया गया है.
मुंबई में एक प्रेसवार्ता में फड़नवीस ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में तीन मुख्य सिफ़ारिशें की गई हैं-
'पहली-मराठा समाज को सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़ा माना जाए क्योंकि उनका शासकीय और अर्ध-शासकीय स्तर पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है.'
'दूसरा- ऐसी घोषणा करने के बाद मराठा समाज आरक्षण का फ़ायदा उठाने का पात्र हो जाएगा.'
'तीसरा- मराठा समाज को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा घोषित करने से असाधारण परिस्थिति बनी है. राज्य सरकार इस मामले में संविधान के तहत ज़रूरी क़दम उठा सकती है.'
देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, "ये आरक्षण मौजूद अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण से अलग दिया जाएगा और इसे लागू करने के लिए केंद्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुमति की जरूरत नहीं होगी."
मुख्यमंत्री ने धनगर जाति के आरक्षण के मुद्दे पर भी बात की. उन्होंने कहा, "धनगर और मराठा समाज के आरक्षण में मूल फ़र्क़ ये है कि मराठा आरक्षण राज्य सरकार राज्य स्तर पर दे सकती है लेकिन धनगर समाज को 3.5 प्रतिशत आरक्षण क़ानून के तहत दिया गया है. धनगर समुदाय विमुक्त जाती या खानाबदोश जाति (VJ-NT) में आता है."
"अगर धनगर समाज अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण चाहता है तो ऐसे में आरक्षण देने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. राज्य सरकारों को इसके लिए केंद्र के पास सिफ़ारिश भेजनी पड़ती है. इस मामले में भी हम जल्द से जल्द कार्रवाई करने वाले हैं और ज़रूरी सिफ़ारिश केंद्र सरकार के पास भेजेंगे."
पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने एबीपी माझा को प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "सरकार ने ये फ़ैसला विशेषज्ञों की राय के बाद लिया है. इस सरकार ने अलग क्या किया है ये देखना होगा. "
महाराष्ट्र विधानसभा में शीत सत्र के दौरान कुल 13 विधेयक पेश किए जाएंगे.
वहीं सूखे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा, "महाराष्ट्र सरकार ने पचास लाख किसानों को क़र्ज़ में छूट दी है. हमने किसानों के लिए अच्छी शुरुआत की है ताकि विपक्ष कोई भ्रम पैदा न कर सके."
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