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एक गैंगरेप, जिसने मराठा आरक्षण आंदोलन को हवा दी
- Author, टीम बीबीसी
- पदनाम, दिल्ली
महाराष्ट्र में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा सड़कों पर हैं. पिछले दिनों हुए आंदोलन में मराठा ओबीसी के तहत आरक्षण की मांग कर रहे थे.
यह पहली दफा नहीं है जब मराठा आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पिछले साल भी पूरे राज्य में शांतिपूर्ण जुलूस निकाले गए थे.
यह बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में मराठा आरक्षण के पक्षधर संगठन बड़ा आंदोलन कर सकते हैं.
राज्यभर के छोटे-छोटे संगठन भी इस मुद्दे पर एक मंच पर आ सकते हैं.
पर क्या आपको मालूम है कि इसके पीछे एक दर्द भरी कहानी छिपी है, जिसने मराठों को एकजुट करने का काम किया.
ये कहानी है एक मराठा लड़की की, जिसकी साल 2016 में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी.
महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के कोपर्डी में हुई इस घटना ने मराठों को एकजुट होने पर विवश किया. इंसाफ के लिए पहले स्थानीय स्तर पर लोग एकजुट हुए और इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.
शहरों की ओर रुख
फिर धीरे-धीरे प्रदर्शनों का दौर बढ़ता चला गया. राज्य के विभिन्न भागों में छोटे-छोटे विरोध-प्रदर्शन किए जाने लगे.
कुछ महीनों में प्रदर्शन कर रही भीड़ शहरों की ओर रुख़ करने लगी, जिसने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा.
राजनीतिक पार्टियां भी भीड़ में खुद को स्थापित करने की चाहत में आंदोलन का समर्थन करने लगी.
जुलाई 2016 में हुई रेप की घटना के बाद शुरू हुआ आंदोलन सितंबर आते-आते बड़ा हो गया.
मांगों की फेहरिस्त बढ़ी
सितंबर 2016 में औरंगाबाद में मूक आंदोलन का आयोजन किया गया, जिसमें लाखों लोगों के शामिल होने की बात कही गई.
ये कोपर्डी की घटना के अभियुक्तों को पकड़े जाने और दोषियों को सज़ा देने की मांग कर रहे थे.
आंदोलन शहर दर शहर बढ़ता चला गया और छोटे-छोटे बैनर तले हो रहे आंदोलन का दायरा बढ़ता चला गया.
लोगों के समर्थन के साथ-साथ उनकी मांगों की फेहरिस्त भी लंबी होती चली गई.
आंदोलनकारियों ने न सिर्फ़ रेप के अभियुक्तों के लिए सज़ा की मांग की बल्कि, दलित उत्पीड़न क़ानून में बदलाव और किसानों के मुद्दे भी उठाए.
गुजरात में पटेलों और हरियाणा में जाटों के आरक्षण की मांग इस दौरान तेज़ थी. मराठों ने भी आरक्षण का मुद्दा उठाया और उसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है.
तो फिर रेप के दोषियों का क्या हुआ?
रेप का मामला कोर्ट में गया. सरकारें सजग हुईं. एक साल बाद नवंबर 2017 में रेप के मामले में तीन को अहमदनगर सेशन कोर्ट दोषी माना और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई.
मामले में जितेंद्र बाबूलाल शिंदे, संतोष कोरख भावल और नितिन गोपीनाथ भाईलुमे दोषी करार दिए गए.
सोशल मीडिया ने दी ताक़त
आंदोलन की शुरुआत में यह नेतृत्व विहीन था और इसे ख़ामोश आंदोलन माना जा रहा था, लेकिन इसके विशाल स्वरूप होने में सोशल मीडिया का बड़ा हाथ रहा.
सोशल मीडिया की वर्चुअल दुनिया में मराठा एकजुट होने लगे और उसका वास्तविक स्वरूप सड़कों पर दिखने लगा.
लेकिन पिछले दिनों ये आंदोलन हिंसक हो गया था. मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे में आंदोलन हुए, जिसमें पत्थरबाज़ी तक हुई.
पुणे के पास चाकन में आंदोलनकारियों ने कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया. अभी तक आंदोलन में दो जानें जा चुकी हैं.
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