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प्रेस रिव्यू: उत्तर प्रदेश में चली आ रही है नाम बदलने की सियासत
दैनिक भास्कर की ख़बर है कि देश में पिछले एक साल में ही लगभग 25 स्थानों के नाम बदले जा चुके हैं और 48 प्रस्ताव लंबित हैं.
हाल ही में फ़ैजाबाद का नाम अयोध्या और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने पर काफ़ी चर्चा है.
नाम बदलने की राजनीति का सबसे उम्दा नमूना उत्तर प्रदेश का हाथरस ज़िला है. 1997 से लेकर वर्ष 2012 के बीच 15 सालों में छह बार हाथरस ज़िले का नाम बदला जा चुका है.
सबसे पहले मायावती ने 1997 में हाथरस का नाम महामायानगर किया, लेकिन कल्याण सिंह ने 97-98 में फिर से हाथरस कर दिया. 2002 में फिर से मायावती ने कोशिश की. 2006 में मुलायम सिंह ने एक बार फिर नाम हाथरस कर दिया. 2007 में फिर से मायावती ने इसका नाम महामायानगर करना चाहा, लेकिन 2012 में अखिलेश यादव ने इसका नाम फिर हाथरस कर दिया.
नाम बदलने के लिए राज्य सरकार का राजस्व विभाग नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य मंत्रिमंडल को भेजता है. इसके बाद राज्य सरकार प्रस्ताव को पास कर केंद्र सरकार को भेजती है. इसके बाद इस प्रक्रिया में गृह मंत्रालय और अन्य विभाग भी शामिल होते हैं.
रेल मंत्रालय, डाक विभाग और भारत सर्वेक्षण विभाग से कोई आपत्ति नहीं होने के बाद गृह मंत्रालय किसी भी स्थान का नाम बदलने के लिए सहमति देता है.
रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण मंज़ूरी लेने की शर्त हुई ख़त्म
एक तरफ दिल्ली-एनसीआर में निर्माण की वजह से होने वाले भयानक प्रदूषण की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी व नियंत्रण की बात हो रही है तो दूसरी ओर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने अब देश में 50 हजार वर्ग मीटर तक की बड़ी निर्माण परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंज़ूरी की शर्त को ख़त्म कर दिया है.
इतना ही नहीं, अब परियोजना प्रस्तावक को निर्माण परियोजना के लिए राज्य स्तरीय प्राधिकरण के बजाए ज़िला पंचायत और नगर निगम जैसे स्थानीय निकाय से ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल जाएगा.
अमर उजाला में छपी इस ख़बर के मुताबिक़ पर्यावरणविद इन नए प्रावधानों को पर्यावरण के लिए बड़ी क्षति बता रहे हैं.
मंत्रालय की ओर से 14 और 15 नवंबर को संशोधित अधिसूचनाएं जारी की गई हैं.
अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए सीबीआई को रोकना चाहते हैं: जेटली
नवभारत टाइम्स के मुताबिक़ केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सीबीआई के अपने राज्य में घुसने पर रोक लगाने के लिए पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है.
जेटली का कहना है कि अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए यह कदम उठाया गया है.
जेटली ने भोपाल में पत्रकारों से कहा कि हमारे देश में संघीय व्यवस्था है और सीबीआई का गठन ही गंभीर मामलों की जांच के लिए हुआ था.
उन्होंने सवाल किया कि क्या सीबीआई को रोकने से बंगाल का शारदा घोटाला ख़त्म हो जाएगा?
10 दिन में प्रदूषण की मिली तीन हज़ार शिकायतें
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अपने सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल और मोबाइल ऐप से तीन हज़ार से ज़्यादा पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली है.
गौर करने वाली बात है कि सिर्फ़ 10 दिनों में ही इतनी शिकायतें बोर्ड के पास आई हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स के पांचवें पेज पर छपी इस ख़बर के मुताबिक़ ज़्यादातर शिकायतें निर्माण साइटों और कूड़ा फेंकने और कूड़ा जलाने को लेकर हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बोर्ड ने एक नवंबर को लोगों की शिकायतों के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट खोले थे ताकि आम लोग बता सकें कि कहां नियमों का उल्लंघन हो रहा है.
बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि इनमें से 1,776 शिकायतों को निपटा दिया गया है.
10 दिन में कर्ज़ माफ़ी करने का राहुल गांधी का वादा
इकनॉमिक टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी ने अपनी रैली में वादा किया है कि कांग्रेस के जीतने पर 10 दिन में किसानों का कर्ज़ माफ़ होगा.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पंजाब और कर्नाटक में सरकार बनाते ही किसानों का कर्ज़ माफ़ किया था.
उन्होंने ये भी कहा कि कर्ज़ माफ़ी के लिए पैसा विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसे घोटालेबाज़ों से रिकवरी करने पर आएगा.
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