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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018: सुषमा स्वराज ने इस गांव को गोद लिया ही क्यों था
- Author, रजनीश कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, देवास के अजनास गांव से
डॉक्टर सुरेश व्यास अपने एक कमरे के क्लिनिक में एक महिला मरीज़ का ड्रिप बदलते हुए कहते हैं कि उनके गांव की हालत अनाथालय के उस बच्चे की तरह है जिसे किसी अमीर ने मां-बाप की तरह ममता और अच्छी परवरिश देने का वादा किया था और बच्चा अब तक इंतज़ार में बैठा है. व्यास कहते हैं कि अब वो इंतज़ार भी ख़त्म हो गया है और उसने अनाथालय को ही अपनी नियति मान लिया है.
डॉक्टर व्यास का यह तीखा तंज विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के गोद लिए गांव अजनास के लिए है. 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सभी संसदीय क्षेत्र में एक-एक गांव को मॉडल की तरह विकसित करने का वादा किया था.
सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश के विदिशा से सांसद हैं और उन्होंने इसी संसदीय क्षेत्र के अजनास गांव को मॉडल बनाने के लिए चुना था.
अजनास देवास ज़िले में है, लेकिन परिसीमन के बाद यह विदिशा संसदीय क्षेत्र में चला गया है. इस गांव की आबादी क़रीब छह हज़ार है. गांव ओबीसी बहुल है. यहां गोंड आदिवासी और मुसलमान भी हैं. गांव में करीब 33,00 मतदाता हैं.
गांव के लोग सवाल करते हैं कि सुषमा ने इस गांव को गोद लेने की घोषणा की ही क्यों थी. इनका कहना है कि अजनास आदर्श ग्राम के नाम पर मज़ाक बनकर रह गया है.
गांव के एकमात्र स्कूल का हाल
दोपहर के बाद का वक़्त है और गांव के एकमात्र सरकारी स्कूल में लंच के लिए अभी-अभी इंटरवल की घंटी बजी है. यह उच्च-माध्यमिक स्कूल है और यहां पढ़ने वालों की संख्या क़रीब 800 है. स्कूल के प्रिंसिपल महेश माली तीन शिक्षकों के साथ अपने चेंबर में बैठे हैं.
चेंबर के नाम पर एक टूटा-फूटा कमरा है. कमरे की दीवार पर महान हस्तियों की तस्वीरें टंगी हैं. इन तस्वीरों में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी शामिल हैं.
महेश मालवीय का कहना है कि वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तस्वीर उन्हें मिली नहीं है इसलिए अभी बदल नहीं पाए हैं. प्रधानमंत्री मोदी की भी तस्वीर टंगी है लेकिन चुनाव आचार संहित की वजह से इसे पलट दिया गया है.
एक टेबल है जिस पर हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियां हैं. बगल में ही 800 बच्चों के लिए दो शौचालय हैं.
सवाल- महेश जी सुषमा स्वराज ने इस गांव को आदर्श ग्राम बनाने के लिए गोद लिया था और चार साल से ज़्यादा वक़्त हो गए, क्या कुछ बदला. पास में ही बैठे एक शिक्षक ने धीमी आवाज़ में तंज करते हुए कहा, ''आदर्श ग्राम वाली ख़ुशबू आ तो रही है. महसूस कीजिए.'' दरअसल, पास के शौचालय से तेज़ बदबू आ रही थी.
स्वच्छ भारत!
शौचालय की यह बदबू पूरे स्कूल में फैली है. वहीं बैठे एक और शिक्षक ने कहा, ''यहां के स्टूडेंट और टीचर सब आदर्श ग्राम की इस महक को लेकर अभ्यस्त हो गए हैं. हमें अपने बाल बच्चों के पेट पालने हैं और यहां पढ़ने वाले ग़रीब बच्चों के पास कोई और विकल्प नहीं है.''
800 बच्चों के बैठने के लिए क्लासरूम नहीं हैं. क्लासरूम में जिस बेंच पर बच्चे बैठते हैं उसके नीचे इतनी गंदगी की मानो यह किसी गंदे बस स्टॉप का फर्श हो.
बारहवीं क्लास में पढ़ने वाली दिव्या शर्मा बताती हैं पांव में इतने मच्छर काटते हैं कि मन करता है क्लास में आना बंद कर दूं. दिव्या कहती हैं, ''स्कूल में अक्सर पानी ख़त्म हो जाता है. रोज़ शौचालय से तेज़ बदबू आती रहती है. उस दीवार पर देखिए क्या लिखा है.''
दिव्या स्कूल के भीतर दीवार पर लिखे एक नारे की तरफ़ इशारा कर रही थीं. दीवार पर लिखा हुआ था, ''सभी रोगों की एक दवाई, घर में रखो साफ़-सफ़ाई.''
दिव्या कहती हैं कि आदर्श ग्राम चुने जाने के बाद नारों के अक्षर केवल साफ़ हो गए हैं. दिव्या क्लास की सबसे प्रतिभावान लड़की है. वो निराश होकर कहती हैं, ''पहले तो सर, सोचती थी कि पढ़-लिखकर सुषमा स्वराज बनना है, लेकिन अब नहीं बनना. लोग इतना मज़ाक उड़ाते हैं और गालियां भी देते हैं.''
गांव में पिछले आठ सालों से एक स्कूल बन रहा है. सुषमा स्वराज ने इस गांव को गोद लिया तब भी स्कूल बनकर तैयार नहीं हुआ.
इस गांव को गोद लिए भी पांच साल होने जा रहे हैं.
स्कूल की नई बिल्डिंग में एक महिला चौकीदार रहती हैं. वो वहीं बैठकर बीड़ी बनाती हैं.
अजनास में सुषमा स्वराज के प्रति ग़ुस्से को समझने में इतनी दिक़्क़त नहीं होती है. यह गांव भी भारत के बाक़ी के उन गांवों की तरह ही है जो अभावग्रस्तता के कारण किसी पुरानी सभ्यता के विपन्न (विपत्तिग्रस्त) अवशेष जैसे मालूम पड़ते हैं. गांव में काम के नाम पर पानी का एक नया टैंक बना है. वहीं एक सामुदायिक भवन भी बना है जहां कुछ महिलाएं अगरबत्ती बनाती हैं.
शाम के तीन बजे हैं और इस सामुदायिक भवन में सुमंत्रा हरियाले, सावित्री हरियाले और लोकेश मालवीय अगरबत्ती बना रही हैं. सुमंत्रा का कहना है कि दिन भर बैल की तरह खटती हैं तो 90 रुपये मिलते हैं. इस गांव को गोद लिए जाने के बाद क्या बेहतरी आई?
इस सवाल को सुन हरियाले का ग़ुस्सा सुषमा पर फूट पड़ता है. वो कहती हैं, ''उन्होंने तो मार्केट में ग़रीबों की झुग्गी-झोपड़ी भी तुड़वा दी. वहां ग्राउंड बनवा दिया. हम ग़रीब लोग तो ऐसे ही भटक रहे हैं. मेरा तो मकान भी नहीं है. ये मशीन रखवा दी है, लेकिन कुछ फ़ायदा है नहीं.''
गांव में एक छोटा सा अस्पताल है, वो भी जर्जर अवस्था में है. गांव के भीतर जाने पर पता चलता है कि सड़कें भी पक्की नहीं हुई हैं. उज्ज्वला योजना के तहत सिलिंडर कई लोगों को मिले हैं लेकिन जिन्हें मिले हैं वो कहते हैं कि पैसे देकर मिले हैं.
सुमंत्रा हरियाले ने कहा कि सिलिंडर पैसे से मिले हैं तो वहीं खड़े सरपंच ईश्वर सिंह कहते हैं कि कनेक्शन तो मुफ़्त में मिला. हरियाले ज़ोर से डांटते हुए कहती हैं, ''क्या कनेक्शन-कनेक्शन करता है. ले जाओ अपना सिलिंडर. मेरे पास एक हज़ार रुपये अब भराने के लिए नहीं हैं.''
गांव में खेलने के लिए कोई ग्राउंड नहीं है. यहां तक कि स्कूल का भी मैदान नहीं है. अजनास में सड़क के किनारे एक बहुत ही छोटा सा पार्क बना है. गांव के लोग इसे दीदी गार्डेन कहते हैं. इस पार्क की हालत भी बहुत बुरी है. मानों धूल का पार्क है. इसकी दीवार लोग बिस्तर सुखाते हैं.
'आदर्श गांव से कुछ नहीं हुआ'
गांव के सरपंच ईश्वर सिंह से पूछा कि इस गांव में क्या आदर्श है तो वो सुषमा स्वराज का बचाव करते दिखे. उन्होंने उंगली से इशारा करते हुए दिखाया कि वहां हॉस्पिटल बन रहा है़. वहीं खड़े कुछ लोगों ने तपाक से कहा कि चार साल में क्या हुआ कि चुनाव के वक़्त अस्पताल बना रहे हो. वहीं खड़े असलम ख़ान ने कहा कि जो किया है शिवराज भैया ने किया है आदर्श गांव से कुछ नहीं हुआ.
30 साल के लोकेश मालवीय गांव में पानी टैंक के पास बकरी चरा रहे हैं. वो इंदौर में चिप्स बनाने वाली एक कंपनी में आठ हज़ार की सैलरी पर काम करते हैं. उनकी पत्नी गर्भवती हैं इसलिए वो गांव आए हुए हैं.
लोकेश का कहना है कि वो 12 घंटे काम करते हैं और हफ़्ते में कोई छुट्टी नहीं मिलती. लोकेश ये नौकरी नहीं करना चाहते हैं.
वो कहते है, ''सुषमा जी ने इस गांव को गोद लिया था तो एक उम्मीद जगी थी, लेकिन उन्होंने तो और परेशानी बढ़ा दी. मार्केट में जहां ग़रीब ठेले-खोमचे लगाकर कमाई करते थे वहां से सबको हटवा दिया. उस जगह को घेर दिया गया. शिवराज भैया के कारण गेहूं-चावल मिल जाता है. आदर्श ग्राम से तो कुछ नहीं हुआ.''
बीजेपी की मध्य प्रदेश प्रवक्ता राजो मालवीय से कहा कि गांव आकर बहुत निराशा हुई तो उनका जवाब था, ''ऐसा तो है नहीं भैया कि कुछ काम ही नहीं हुआ है. सुषमा जी बीमार रही हैं इस वजह से कुछ काम नहीं हो पाए होंगे.''
सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में दो दिन प्रचार करने आ रही हैं. बीजेपी का कहना है कि कार्यक्रम कहां होगा ये अभी तय नहीं हो पाया है.
काश! सुषमा अपने गोद लिए गांव के स्कूल में एक बार आतीं.
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