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आंध्र प्रदेश: चंद्रबाबू नायडू के सूबे में नहीं घुस पाएगी सीबीआई
आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने केन्द्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई के लिए अपने दरवाज़े बंद कर दिये हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, आंध प्रदेश सरकार ने सीबीआई को राज्य में क़ानून के तहत शक्तियों के इस्तेमाल के लिए दी गई 'सामान्य रज़ामंदी' वापस ले ली है.
ऐसे में सीबीआई अब आंध्र प्रदेश की सीमाओं के भीतर किसी भी मामले में सीधे दखल नहीं दे सकेगी.
सीबीआई को अब किसी भी तरह की जाँच या ऑपरेशन की शुरुआत करने से पहले आंध्र प्रदेश सरकार से अनुमति लेनी होगी.
समाचार एजेंसी पीटीआई और एएनआई ने इस तब्दीली की पुष्टि की है.
हालांकि इस संबंध में कोई सरकारी आदेश सार्वजनिक तौर पर आंध्र प्रदेश सरकार ने किसी विभाग की साइट पर जारी नहीं किया है.
स्थानीय मीडिया में छपी ख़बरों के अनुसार, ये एक गोपनीय सरकारी आदेश था जिसे गुरुवार रात को लीक किया गया.
आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव (गृह) ए आर अनुराधा के नाम से एक सरकारी आदेश सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.
बीबीसी तेलुगू सेवा ने जब प्रधान सचिव अनुराधा से बात की तो उन्होंने कहा कि आदेश की कॉपी सही है, लेकिन इसे साइट पर नहीं लगाया गया है क्योंकि ये एक गोपनीय दस्तावेज़ है.
सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक लक्ष्मी नारायण ने बीबीसी तेलुगू सेवा से बात करते हुए कहा है कि सरकार के पास तकनीकी तौर पर ये अधिकार है कि वो सीबीआई को दख़ल करने दे या न दे. हालांकि इस तरह के फ़ैसले संविधान की मूल भावना के विपरीत हैं. सीबीआई पर इस तरह की रोक लगाने से राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों में वृद्धि हो सकती है.
उन्होंने बताया कि साल 2001 में एक बार कर्नाटक की सरकार ने भी ऐसा ही फ़ैसला लिया था.
केंद्र से रिश्ते तल्ख
आंध्र प्रदेश के इस आदेश में कहा गया है. ''दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 की धारा-6 के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, सरकार दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को आंध प्रदेश राज्य में इस क़ानून के तहत शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल के लिए दी गई सामान्य रज़ामंदी वापस लेती है."
केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत ही काम करता है.
इसी साल 3 अगस्त को आंध्र प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार रोकथाम क़ानून के तहत अपराधों की जाँच के लिए केन्द्र सरकार, केन्द्र सरकार के उपक्रम के अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के ख़िलाफ़ जाँच के लिए आंध्र प्रदेश में शक्तियों और क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल के लिए दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को 'सामान्य रज़ामंदी' देने वाला सरकारी आदेश जारी किया था.
इसी साल मार्च में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार से चंद्रबाबू नायडू ने संबंध तोड़ लिये थे.
साथ ही चंद्रबाबू ने आरोप लगाया था कि केन्द्र सरकार सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने में कर रही है.
फ़ैसले पर प्रतिक्रियाएं
नायडू के इस क़दम का आम आदमी पार्टी और ममता बनर्जी ने खुलकर स्वागत किया है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को एक जनसभा में कहा कि सीबीआई पर रोक लगाकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सही फ़ैसला लिया है.
वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, "बिल्कुल सही किया चंद्रबाबू जी ने. मोदी जी सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग का दुरुपयोग कर रहे हैं. आज तक नोटबंदी, विजय माल्या, रफ़ाल, सहारा, बिडला डायरी आदि घोटाले करने वालों को सीबीआई ने क्यों नहीं पकड़ा? नायडू जी, इनकम टैक्स वालों को भी अपने राज्य में मत घुसने देना."
भारतीय जनता पार्टी ने चंद्रबाबू नायडू की सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना की है.
भाजपा नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने एक टीवी डिबेट में कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने अपनी शक्ति का ग़लत इस्तेमाल किया है.
वहीं सीबीआई के प्रवक्ता ने आंध्र प्रदेश सरकार के इस फ़ैसले पर कहा है कि उन्हें अभी तक अधिसूचना नहीं मिली है. जब उन्हें अधिसूचना मिलेगी, उसी के अनुसार वो अगला क़दम उठाएंगे.
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