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असम में बंगाली मूल के लोगों पर गोलीबारी, पांच की मौत
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
असम के तिनसुकिया ज़िले में अज्ञात हमलावरों ने धोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंगाली मूल के पांच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी.
यह घटना गुरुवार शाम क़रीब साढ़े सात बजे की है. इस घटना में एक व्यक्ति के घायल होने की जानकारी मिली है.
असम पुलिस में कानून-व्यवस्था की जिम्मेवारी संभाल रहे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश अग्रवाल ने गोलीबारी की घटना की पुष्टि की है.
एडीजीपी मुकेश अग्रवाल ने बीबीसी से कहा, "तिनसुकिया ज़िले में एक गोलीबारी की घटना हुई है जिसमें अब तक चार लोगों के हताहत होने की जानकारी मेरे पास आई है."
उन्होंने कहा कि फिलहाल घटना की पूरी जानकारी उनके पास नहीं आई है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने कहा, "एसपी अभी इस घटना की जांच कर रहे हैं. मैं उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूं."
कैसे हुई हत्या
इस घटना को लेकर अब तक मिली जानकारी के अनुसार धोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत खेरबाड़ी गांव में शाम के समय कुछ लोग एक दुकान के बाहर बैठे हुए थे. तभी वहां मोटर साइकल पर आए हथियारबंद लोगों ने अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू कर दिया.
स्थानीय पत्रकार अविक चक्रवर्ती ने बताया, "फ़ायरिंग की यह घटना शाम की है. स्थानीय पुलिस ने पांच लोगों के मरने की पुष्टि की है. इस हमले में मारे गए सभी लोग बंगाली समुदाय के थे."
मरने वालों की पहचान श्यामल विश्वास, अनंत विश्वास, अविनाश विश्वास, सुबल दास और धनंजय नामसुद्र के तौर पर हुई है.
इस बीच मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने इस घटना की निंदा की है. मुख्यमंत्री ने डीजीपी कुलधर साइकिया, एडीजीपी मुकेश अग्रवाल, अपने मंत्री केशव महंत और तपन गोगोई को मौके पर जाने का निर्देश दिया है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट करके इस घटना की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी दो नवंबर को इस घटना के विरोध में रैलियां करेगी.
इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट करके इस घटना को बेवकूफ़ाना हिंसा करार दिया है. उन्होंने लिखा है, "मैंने मुख्यमंत्री श्री सर्वानंद सोनोवाल से इस घटना के संबंध में बात की है और इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने को कहा है."
किसी ने नहीं ली ज़िम्मेदारी
तिनसुकिया ज़िले के जिस क्षेत्र में यह घटना हुई है, वहां प्रतिबंधित संगठन उल्फ़ा आई काफ़ी सक्रिय है. हालांकि अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
इससे पहले उल्फ़ा आई के एक धड़े ने 13 अक्तूबर को गुवाहाटी में हुए बम धमाके की ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा था कि ये 'धमाका राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध कर रहे लोगों और बांग्लादेशी हिंदुओं को बसाने की कोशिश के ख़िलाफ़' है.
दरअसल पिछले कुछ दिनों से नागरिकता संशोधन बिल को लेकर असम में हिंदू बंगाली संगठन समेत कई असमिया जातीय संगठन एक-दूसरे के ख़िलाफ़ प्रतिक्रियाएं दे रहें थे, जिसके कारण टकराव जैसे हालात उभरते नज़र आ रहे थे.
असम के कई जातीय संगठन इस बिल का लगातार विरोध कर रहे हैं. नागरिकता संशोधन बिल अगर क़ानून बन जाता है तो बांग्लादेश से आए हिंदुओं को भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता साफ़ हो जाएगा.
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