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देश के आधे डॉक्टर-वकील कोई टैक्स नहीं चुकाते
देश का वेतनभोगी वर्ग सबसे अधिक आयकर भुगतान करता है जबकि 50% से अधिक डॉक्टर, वकील कोई कर नहीं चुकाते.
पिछले चार वित्त वर्षों में कर का रिटर्न दायर करने वालों की संख्या 3.79 करोड़ से बढ़कर 6.85 करोड़ हो गई है- यानी लगभग 80% वृद्धि हुई है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी पेशेवर ईमानदारी से अपने कर का भुगतान कर रहे हैं.
सीबीडीटी के नवीनतम प्रत्यक्ष कर आंकड़ों के मुताबिक, 10 में से 5 डॉक्टरों ने वर्ष 2017-18 में अपने कर का भुगतान नहीं किया. नंबर की बात करें तो 4,21,920 मेडिकल पेशेवर करदाताओं की सूची में सूचीबद्ध हैं, जबकि, देश में डॉक्टरों की संख्या 9 लाख से भी अधिक है. यानी 50 फ़ीसदी से भी अधिक डॉक्टर करदाताओं की सूची में ही नहीं हैं.
मेडिकल पेशेवरों की बात करें तो किसी इलाके में स्थित नर्सिंग होम का पता लगाना मुश्किल नहीं है. कुछ सौ मीटर चलने पर ही आपको कम से कम एक नर्सिंग होम देखने को मिल जाता है.
दिलचस्प तो यह है कि भारत में नर्सिंग होम से करदाताओं की कुल संख्या केवल 13,005 है. यह संख्या 2017-18 में अपना कर भुगतान करने वाले फ़ैशन डिज़ाइनर्स की तुलना में क़रीब 1,000 कम है.
इस सूची में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स/ऑडिटर्स की संख्या केवल 1,03,049 दर्ज है. द इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक देश भर में 1, 26,892 फुल टाइम और पार्ट टाइम सीए हैं यानी 81 फ़ीसद सीए टैक्स भरते हैं.
वकीलों के मामले में यह संख्या और भी चौंकाने वाली है. कुल 13 लाख वकीलों में से केवल 2.6 लाख ही अपने कर का भुगतान करते हैं. यानी 75 फ़ीसदी वकील अपने कर का भुगतान नहीं करते हैं.
रिपोर्ट में वेतनभोगी और गैर-वेतनभोगी करदाताओं पर दिलचस्प जानकारी दी गई है. तीन साल की अविधि के दौरान, वेतनभोगी करदाताओं की संख्या 1.70 करोड़ से बढ़कर 2.33 करोड़ हो गई है. यह लगभग 37 फ़ीसदी की वृद्धि है.
कर भुगतान में उनका योगदान भी 19% बढ़ गया है. इस बीच, गैर-वेतनभोगी करदाता भी 1.95 करोड़ से बढ़कर 2.33 करोड़ हो गए हैं.
लेकिन यदि आप दोनों के बीच मामूली वृद्धि को देखें तो वेतनभोगी पेशेवरों पर कर भुगतान का अधिक बोझ होता है.
वेतनभोगियों पर बोझ
इन तीन वर्षों में, देश में करोड़पतियों की संख्या में भी खासी वृद्धि हुई है. 2013-14 में, 48,416 लोगों ने अपनी आय 1 करोड़ से अधिक घोषित की थी, जो अब बढ़कर 81,344 हो गई है, यानी इसमें 68 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है.
यदि आप यह जानना चाहते हैं कि देश के किस राज्य से सर्वाधिक कर का भुगतान किया जाता है, तो 2017-18 में महाराष्ट्र इस सूची में 384277.53 करोड़ से भी अधिक का कर भुगतान कर के शीर्ष पर है. जबकि दिल्ली 136934.88 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर है.
सरल भाषा में, यदि देश में कुल कर प्राप्ति 100 रुपये है तो महाराष्ट्र 39 रुपये, दिल्ली 13 रुपये और भारत में सबसे घनी आबादी वाले राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश केवल 2.52 रुपये का योगदान करता है.
कुल कर संग्रह में, पिछले वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश से कर संग्रह में 24 फ़ीसदी की तेज़ गिरावट देखी गई है. 2016-17 में राज्य से 29,309 करोड़ रुपये कर की प्राप्ति हुई थी, लेकिन 2017-18 में यह गिर कर 23,515 करोड़ रुपये रह गया है.
कर संग्रह की सूची में मिज़ोरम सबसे नीचे है. 2016-17 से पूर्वोत्तर राज्यों के कर संग्रह में भी लगभग 46 फ़ीसदी की गिरावट आई है.
( नोट- इस स्टोरी में पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के भी टैक्स नहीं चुकाने की बात शामिल थी, लेकिन द इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया ने देश के फुल टाइम और पार्ट टाइम सीए की संख्या जारी की है, जिसके मुताबिक कुल 81 फ़ीसदी सीए कर चुकाते हैं, आंकड़े सामने आने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट्स वाला हिस्सा संशोधित किया गया है.)
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