केंद्र सरकार को ब्याज दर बढ़ाने में दो साल का वक़्त क्यों लगा?

    • Author, कीर्ति दुबे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

केंद्र की मोदी सरकार ने छोटी बचत स्कीमों पर मिलने वाली ब्याज दरें बढ़ा दी है. वर्तमान वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही (1 अक्टूबर से 31 दिसंबर) में इन पर 40 बेसिस प्वाइंट यानी 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है.

ब्याज दरों में ये बढ़त इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले दो साल से केंद्र सरकार ने छोटी अवधि वाली बचत स्कीमों की ब्याज दरें घटाई ही हैं.

गुरुवार को वित्त मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी किया. इसमें जानकारी दी गई कि छोटी अवधि वाली बचत स्कीमों पर ब्याज दरें 30 बेसिस प्वाइंट (0.3%) से लेकर 40 बेसिस प्वाइंट (0.4%) तक बढ़ा दिया गया है.

एक साल, दो साल और तीन साल तक की अवधि वाली बचत स्कीम पर 0.3 फीसदी ब्याज दर बढ़ाई गई है. वहीं पांच साल की अवधि वाली स्कीम की ब्याज दरें तीसरी तिमाही के लिए 0.4% बढ़ाई गई है. इस ऐलान के बाद अब एक अक्टूबर से वरिष्ठ नागरिक बचत स्कीम पर 8.7 फ़ीसदी ब्याज मिलेगा जो पहले 8.3 फ़ीसदी था. इसके अलावा सुकन्या समृद्धि योजना, किसान विकासपत्र, पीपीएफ सहित कई स्कीम पर भी बढ़ी ब्याज दरों का फ़ायदा मिलेगा. लेकिन इस फैसले के लिए आखिर लोगों को दो साल का इंतज़ार क्यों करना पड़ा?

वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक मामलों के जानकार शिशिर सिन्हा सरकार के इस फैसले पर कहते हैं, ''छोटी बचत योजनाओं को एनएससी और पीपीएफ जैसी स्कीम के तौर पर जाना जाता है. उनपर ब्याज का निर्धारण बाज़ार के हिसाब से होता है. ये देखा जाता है कि उस समान अवधि के जो सरकारी बॉन्ड हैं उनपर ब्याज दर की स्थिति क्या है. पिछले कुछ दिन के दरम्यान सरकारी बॉन्ड जिन्हें जी-सैक के नाम से भी जानते हैं उन पर ब्याज की दर बढ़ रही थी. इस बढ़त के कारण छोटी बचत स्कीमों की ब्याज दर बढ़ने का रास्ता साफ हो गया. ये सीधा-सीधा बाज़ार का गणित है जिसकी वजह से इन स्कीमों के ब्याज दर 40 बेसिस प्वाइंट बढ़ा दिए गए हैं. इसमें देरी या जल्दी की बात नहीं है क्योंकि जो नियम हैं उसके हिसाब से ही ये बढ़ सकता है. पहले सरकारी बॉन्डों की ब्याज दर में गिरावट हुई तो यहां भी गिरावट हुई थी. उसके बाद हमने जब इन बॉन्डों पर दरें स्थिर देखी तो इन छोटी स्कीमों की दरें भी स्थिर रहीं. अब जब सरकारी बॉन्डों में बढ़त हुई है तो छोटी बचत स्कीमों के ब्याज दर बढ़ने तय थे. ''

शिशिर बताते हैं, ''हमें ये भी देखना चाहिए की पिछली दो मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में नीतिगत ब्याज दरें 25-25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाई गई थी. ये सभी तथ्य छोटी बचत योजनाओं पर बढ़ने वाले ब्याज दर का रास्ता साफ करने वाले रहे.''

कैसे लिया गया फैसला?

श्यामला गोपीनाथ कमेटी ने सरकार को सुझाव दिए कि छोटी बचत स्कीम पर ब्याज दर बढ़े. शिशिर बताते हैं, ''इस कमेटी ने अपने सुझाव में कहा था कि छोटी अवधि की बचत योजनाओं पर ब्याज दरों का निर्धारण उसी तरीके के सरकारी बॉन्ड या एकसमान मियाद वाली सरकारी बॉन्ड्स के हिसाब से तय किए जाएं. इसका मकसद था कि इन स्कीमों को बाज़ार के लिहाज से देखा जाए ना कि सरकार की ऐसी कोई नीति हो जिसके तहत वो ये दरें बढ़ाए या घटाए.''

ये सुझाव व्यवहारिक भी है क्योंकि बैंक और अन्य संस्थाएं भी बाजार के हिसाब से ही ब्याज दरें तय करती हैं. ऐसे में छोटी बचत योजनाओं को उससे अलग कैसे रखा जा सकता था.

शिशिर सिन्हा कहते हैं, ''श्यामला गोपीनाथ कमेटी के ये भी सुझाव थे कि हर साल इन दरों की समीक्षा हो. लेकिन फरवरी 2016 में ये तय हुआ कि हर तीन महीने पर ब्याज दरों की समीक्षा की जाएगी. इस तरह साल में चार बार ब्याज दरों की समीक्षा होगी."

आम जनता को कितना फ़ायदा?

शिशिर कहते हैं, ''आज की तारीख में पांच लाख तक की आमदनी वाले शख़्स को कोई टैक्स नहीं देना होता है. छोटी बचत योजनाओं को आकर्षक बनेंगी तो लोग जो बेहतर रिटर्न के लालच में पॉन्जी स्कीम में फंस जाते हैं, उससे बच पाएंगे. ये योजनाएं ज़्यादातर डाकघरों के माध्यम से चलाई जाती हैं. देशभर में लगभग डेढ़ लाख डाकघर हैं तो इन स्कीम का फ़ायदा बड़ी आबादी को मिलता है. ये सुरक्षित निेवेश का विकल्प बनेगा और बैंकों से बेहतर रिटर्न मिलेगा. आज की तारीख़ में बैंकों में एक साल से पांच साल की योजनाओं में 6 से 7 या 7.5 फीसदी ब्याज ही दिया जा रहा है. लेकिन यहां आपको 8 से 8.7% तक ब्याज मिल रहा है.''

चुनाव को देखते हुए किया गया ऐलान?

इस ऐलान के वक्त और चुनावी माहौल पर शिशिर कहते हैं, ''इस साल राज्यों में चुनाव होने हैं और फिर 2019 में आम चुनाव होना हैं. तो ऐसे फ़ैसले हमेशा ही राजनीतिक मुनाफा और नुक़सान को देख कर ही लिए जाते हैं. सरकार इसे अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करेगी. लेकिन ऐलान में देरी की गई ऐसा कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि ये फैसला तब ही लिया जा सकता था जब बाज़ार स्थिर हो. बाजार की स्थिति फ़ैसले के लिए अभी अनुकूल है इसलिए ये फ़ैसला अभी लिया गया.''

आर्थिक मामलों के जानकार शंकर अय्यर कहते हैं, ''ज़ाहिर सी बात है करंट अकाउंट घाटा बढ़ गया है, फ़िस्कल घाटा बढ़ गया है. रुपये के मूल्य में गिरावट आई है तो ऐसे में ब्याज दर का बढ़ना लाज़मी सी बात है. दरअसल पैसा जमा करने वाले और कर्ज़ लेने वाले दोनों लोगों पर ब्याज लगता है और ये एक अनुपात में हो तो बेहतर है. सरकार का ये कदम अच्छा है. एक वाक्य में सरकार के लिए कहूं तो 'देर आए दुरुस्त आए'. कई सारे रिटायर्ड लोग, सरकारी-छोटी नौकरियों वाले लोग, सेना के लोग अपना पैसा इस तरह की छोटी सेविंग में रखते हैं. मार्केट ने महीने पहले ही दर्शाया था कि ब्याज दर बढ़ाना होगा. ये कदम ' रिफ्लेक्श ऑफ रिएलिटी' है. सरकार ने इसके लिए छह महीने की देरी कर दी.

सरकार के लिए कैसे फायेदेमंद?

शंकर अय्यर कहते हैं, ''सरकार 6 लाख करोड़ का कर्ज़ ले रही है आखिर ये भरपाई कैसे होगी. इसके लिए छोटी बचत की ओर जाना ही होगा. सरकार के लॉन्ग टर्म प्रोजेक्ट जैसे रेलवे, रोड और गांवों में बिजली के काम के लिए इन छोटी बचत स्कीम से जुटे पैसों का ही इस्तेमाल सरकार करती है.''

शंकर आगे कहते हैं, '' ये सरकार जब आई थी तो लोगों के इससे काफी अपेक्षाएं थीं. बहुत कुछ ऐसा कहा जो लोग सुनना चाहते थे लेकिन अब चार साल बाद लोग ख़ुद देख रहे हैं कि जो कहा था वो कितना किया. लोगों को लग रहा था कि इनकम टैक्स रेट में कटौती होगी, जीसीएसटी के आने से फ़ायदा होगा. लेकिन हुआ क्या? लोगों में अब नाराज़गी है. ''

क्या हैं नई ब्याज दरें?

डाकघर के सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसे 4 फीसदी ही रखा गया है. एक साल, दो साल और तीन साल तक के छोटी अवधि के बचत स्कीम पर 0.3% ब्याज दर बढ़ाई गई हैं.

पांच साल की सेविंग स्कीम पर मिलने वाला ब्याज दर एक अक्टूबर से 7.8% होगा जो अबतक 7.4% है.

• वरिष्ठ नागरिकों के पांच साल की बचत स्कीम पर एक अक्टूबर से 8.7% ब्याज मिलेगा जो अभी 8.3% है.

• नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट यानी एनएससी पर की नई दर 8.0% होगी जो अबतक 7.6 फीसदी है.

•किसान विकासपत्र पर मिलने वाली नई ब्याज दर 7.7% होगा जो अबतक 7.3% है.

• सुकन्या समृद्धि स्कीम पर अब नई ब्याज दर 8.5% होगी जो अब 8.1% है.

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