You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ क्यों बोल रहे हैं अमित शाह?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के पास अब देश की अदालतों के लिए भी एक सलाह है. वो चाहते हैं कि अदालतें व्यावहारिक हों और वैसे ही फ़ैसले दें, जिन्हें अमल में लाया जा सकता है.
यह सलाह सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के संदर्भ में दी गई है, जिसमें स्वामी अयप्पा के सबरीमला मंदिर में 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई है.
अमित शाह ने यह बयान केरल के कन्नूर में ज़िला बीजेपी कार्यालय के उद्घाटन के मौक़े पर आयोजित सार्वजनिक सभा के दौरान दिया.
कन्नूर वही इलाक़ा है जहां कई दशकों से आरएसएस-बीजेपी और सीपीएम के कार्यकर्ताओं में झड़प और हत्याएं होती रहती हैं.
अमित शाह ने यह सलाह इस वजह से भी दी है क्योंकि सबरीमला मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जो हंगामे और विरोध प्रदर्शन हुए हैं उनमें 2500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया.
बीजेपी भक्तों के साथ
अमित शाह ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से जोश भरे अंदाज़ में कहा, ''अदालतें इस तरह के फ़ैसले ना दें जो व्यवहारिक ना हों. आख़िरकार आप पांच करोड़ भक्तों के विश्वास को कैसे तोड़ सकते हैं? हिंदू कभी महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं करते. सभी त्योहारों में, पत्नियां अपने पति के साथ बैठकर त्योहार मनाती हैं.''
उन्होंने कहा, ''हिंदुओं में अलग-अलग इलाक़ों के हिसाब से मान्यताएं और प्रथा बदलती रहती हैं. ऐसे बहुत से मंदिर हैं जहां महिलाएं भी जाती हैं.''
अमित शाह ने केरल सरकार पर अयप्पा के भक्तों का अपमान करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ''सरकार ने भक्तों को जेल में डाल दिया. वे उन भक्तों को कैसे गिरफ़्तार कर सकते हैं जो मंत्र उच्चारण कर रहे हों.''
अमित शाह ने साफ़ किया कि बीजेपी भक्तों के साथ दृढ़ रूप से खड़ी है.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से अमित शाह को आपत्ति क्यों
दूसरी तरफ़ केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अमित शाह की आलोचना की है और कहा है कि बीजेपी अध्यक्ष ने देश के सुप्रीम कोर्ट, संविधान और न्यायिक व्यवस्था पर हमला किया है.
उन्होंने कहा, ''अमित शाह का यह कहना कि अदालतों को सिर्फ़ वही फै़सले सुनाने चाहिए जो व्यवहारिक हों, यह संदेश देता है कि भारतीय संविधान में जो मूल अधिकारों की बात कही गई है उसका पालन नहीं होता. अमित शाह का यह बयान आरएसएस और संघ परिवार के असली चरित्र को दर्शाता है.''
मुख्यमंत्री ने अमित शाह के बारे में कहा, ''इन्होंने अपने बयानों से यह साबित किया है कि वे मनुस्मृति में स्थापित किए गए लैंगिक असमानता के विचार से भरे हुए हैं. हमारे समाज को इस तरह की सोच से बाहर निकलने की ज़रूरत है.''
विजयन ने इसके साथ ही यह भी कहा कि अमित शाह को याद रखना चाहिए की एलडीएफ को केरल की जनता ने चुनकर सरकार बनाने के लिए भेजा है. उन्होंने बीजेपी की दया से सरकार नहीं बनाई है.
वहीं पालक्कड़ से सीपीएम के सांसद एमबी राजेश अमित शाह के बयान को अलग तरह से देखते हैं.
उन्होंने कहा, ''अमित शाह असल में सुप्रीम कोर्ट को सलाह नहीं दे रहे हैं. वे देश की सर्वोच्च अदालत को डराने की कोशिश कर रहे हैं. यह देश की लोकतांत्रिक संस्था को नुक़सान पहुंचाने की बीजेपी की एक और कोशिश है.''
इस बीच शनिवार को तिरुवनंतपुरम में स्थित स्वामी संदीपानंद गिरी के आश्रम में हमला किया गया. आश्रम में खड़ी दो कार और एक स्कूटर पर किसी ने आग लगा दी.
स्वामी संदीपानंद गिरी उन कुछ लोगों में शामिल हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सबसे पहले स्वागत किया था.
मुख्यमंत्री विजयन ने आश्रम का दौरा किया और वहां हुए नुक़सान का जायज़ा लिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सांप्रदायिक ताक़तों को इस तरह प्रदेश का क़ानून हाथ में नहीं लेने देगी.
विजयन ने ट्वीट करके कहा है कि अमित शाह ने कन्नूर में जो बयान दिया है वह सुप्रीम कोर्ट और संविधान पर हमला है, उनका जोर देकर कहना कि, कोर्ट को अपने आपको ऐसे आदेशों तक सीमित करना चाहिए जिन्हें अमल में लाया जा सके, बताता है कि वह संविधान द्वारा दिए गए मूल अधिकारों की रक्षा करने के प्रति कितने सजग हैं.
ये भी पढ़ेंः
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)