अकाल तख़्त के जत्थेदार ने क्यों दिया इस्तीफ़ा

    • Author, रविंदर सिंह रॉबिन
    • पदनाम, अमृतसर से बीबीसी के लिए

अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने गुरुवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को पत्र भेजकर पद छोड़ने के अपने फ़ैसले की जानकारी दी.

अकाल तख़्त सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था है. ज्ञानी गुरबचन सिंह क़रीब एक दशक से जत्थेदार थे. कुछ वर्ष पहले डेरा सच्चा सौदा को माफ़ी देने के बाद से उनका विरोध हो रहा था और उन पर पद छोड़ने का दबाव बना हुआ था.

उन पर शिरोमणि अकाली दल के दबाव में काम करने के आरोप भी लगते रहे थे. हालांकि वो इनसे इनकार करते थे.

उन्होंने इस्तीफ़े की वजह बढ़ती उम्र को बताया है. उनकी उम्र अभी 70 साल है.

ज्ञानी गुरबचन सिंह ने पत्र में लिखा है, "बढ़ती उम्र के साथ हो रही दिक्कतों की वजह से मुझे लगता है कि मैं अपने कर्तव्यों को निभाने में ठीक तरह से सक्षम नहीं हूं."

उन्होंने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, 'मैं ख़राब सेहत की वजह से पद छोड़ रहा हूं.'

उन्होंने आगे लिखा है, "खालसा पंथ और एसजीपीसी को इस पद के लिए किसी सक्षम व्यक्ति को नियुक्त करना चाहिए."

डेरा सच्चा सौदा को माफ़ी देने के बाद से हो रहा था विरोध

जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के इस्तीफ़े को लेकर उनके निजी सहायक सतिंदर पाल ने एक प्रेस नोट भी जारी किया है.

ज्ञानी गुरबचन सिंह ने अपने इस्तीफ़े में डेरा सच्चा सौदा को अकाल तख़्त की ओर से दी गई माफ़ी का भी ज़िक्र किया है.

उन्होंने कहा है, "इस फ़ैसले पर काफी बहस हुई. खालसा पंथ की भावनाओं का आदर करते हुए सिंह साहेबानों की सलाह के साथ फ़ैसला वापस ले लिया गया."

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के सिखों के दसवें गुरू गोबिंद सिंह का रूप बनाने पर सिखों ने नाराज़गी ज़ाहिर की थी. बाद में डेरा प्रमुख के नाम से एक पत्र अकाल तख़्त को भेजा गया और माफ़ी मांगी गई. इसके बाद अकाल तख़्त ने उन्हें माफ़ी दे दी.

इस फ़ैसले को लेकर कई सिख संगठनों ने सवाल उठाए थे. इसके बाद डेरा प्रमुख को माफ़ करने का फ़ैसला वापस ले लिया गया.

ज्ञानी गुरबचन सिंह ने अपने कार्यकाल में हुई गलतियों के लिए माफी भी मांगी है.

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