You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
किन दलीलों के सहारे आरोपों के 'स्विमिंग पूल में तैरेंगे' एमजे अकबर?
- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
'मुझे तैरना तक नहीं आता और मुझ पर स्विमिंग पूल में पार्टी करने के आरोप लग रहे हैं.'
#MeToo अभियान के तहत अपने साथ हुए उत्पीड़न की कहानियां जब महिलाओं ने साझा की तो इसकी आंच केंद्रीय मंत्री मोबाशर जावेद यानी एमजे अकबर तक भी पहुंची.
नाइजीरिया से भारत लौटे अकबर ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए बयान जारी किया. इसके कुछ ही घंटों में अकबर ने आरोप लगाने वाली महिला प्रिया रमानी पर मानहानि का मुक़दमा भी कर दिया.
#MeToo अभियान में अब तक सोशल मीडिया के निशाने पर रहे एमजे अकबर ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर और कोर्ट में किए मुक़दमे में अपना पक्ष रखा है.
इनमें अकबर की सफ़ाई भी शामिल है और वो तर्क भी, जिनके आधार पर अकबर महिलाओं के आरोपों के झूठे होने का दावा कर रहे हैं.
1.छवि धूमिल
मुक़दमा: एमजे अकबर के वकीलों ने प्रिया रमानी की तरफ़ से अकबर को लेकर किए ट्वीट्स का ज़िक्र किया है. इन ट्वीट्स के आधार पर जिन मीडिया संस्थानों ने ख़बरें की थीं, उन ख़बरों को अकबर के वकीलों की तरफ से मानहानि के सबूत के तौर पर पेश किया गया. कहा गया- ट्विटस और लेखों की वजह से अकबर की साख को नुकसान हुआ है.
अकबर का बयान: विदेश दौरे में होने के चलते मैं देर से जवाब दे पा रहा हूं. कुछ तबकों में बिना सबूत आरोप लगाना आम बात हो गई है. मुझ पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं.
प्रिया रमानी: मैं अपने ख़िलाफ़ दायर किए मानहानि केस को लड़ने के लिए तैयार हूँ. सच और सिर्फ़ सच ही मेरा बचाव है.
- यह भी पढ़ें:- प्रिया रमानी ने कहा, 'सच और सिर्फ सच ही मेरा बचाव है'
2. अकबर के कौन-कौन गवाह?
मुक़दमा: एमजे अकबर की तरफ़ से छह गवाहों के नाम कोर्ट में दिए गए हैं. ये छह लोग अकबर की तरफ़ से गवाही देंगे. इनमें संपादक जॉयिता बसु और वीनू संदाल का नाम शामिल है.
अकबर का बयान: आरोप लगाने वाली शुतापा पॉल ने कहा, ''मैंने कभी उन्हें हाथ नहीं लगाया. शुमा राहा कहती हैं, ''मैं ये स्पष्ट कर दूं कि उन्होंने असल में कभी कुछ नहीं किया.'' एक दूसरी महिला अंजू भारती दावा करती हैं, ''अकबर स्विमिंग पूल में पार्टी कर रहे थे.'' मैं तो तैरना भी नहीं जानता. मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हुए एक आरोप गज़ाला वहाब ने लगाया है. गज़ाला दावा करती हैं कि 21 साल पहले उनका उत्पीड़न हुआ. ये मेरे सार्वजनिक जीवन में आने से 16 साल पहले की बात है, तब मैं मीडिया में था. मैंने गज़ाला के साथ सिर्फ़ एशियन एज में काम किया. तब मैं प्लाईवुड और ग्लास के छोटे चैंबर में बैठता था. बाक़ी लोगों से मेरे चैंबर की दूरी सिर्फ़ दो फुट थी. इस बात पर यक़ीन नहीं किया जाता कि बाक़ी लोगों को इस बारे में पता न चले. ये आरोप निराधार हैं.
प्रिया रमानी: औरतों के इरादों पर शक करने की बजाय हमें ये कोशिश करनी होगी कि कैसे वर्क प्लेस को अपनी आने वाली पीढ़ी के पुरुष और औरतों के लिए बेहतर जगह बनाएं.
जिन अंजू भारती ने एमजे अकबर पर पूल में पार्टी करते हुए 'फन' करने की बात कही थी, इस ख़बर को लिखे जाने तक वो ट्विटर से डिएक्टिवेटड हैं. शुतापा पॉल की ओर से अकबर के बयान और मुक़दमा करने के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि उनके 10 अक्टूबर को किए गए ट्वीटस अब भी मौजूद हैं.
- यह भी पढ़ें:- विकास बहल के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो: ऋतिक रोशन
3. देर से शिकायत और 'एजेंडा'
मुक़दमा: अकबर की ओर से कहा गया- एक ख़ास एजेंडे के तहत झूठ बोलकर मुझे फँसाने की कोशिश हुई.
अकबर का बयान: गज़ाला ने कहा कि उन्होंने पेपर के लिए फीचर लिखने वाली वीनू संदाल से शिकायत की थी. इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में संदाल ने गज़ाला के पक्ष को ख़ारिज किया. संदाल ने कहा कि उन्होंने 20 साल में मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं सुना. यहां इस बात का ज़िक्र करना ज़रूरी है कि इन कथित घटनाओं के बाद भी प्रिया और संदाल ने मेरे साथ काम करना जारी रखा. इससे ये साफ़ है कि वो किसी भी तरह से कथित घटना के बाद असहज नहीं थीं. वो सालों तक क्यों चुप रहीं, ये प्रिया की इस बात से साफ़ है कि 'मैं कुछ नहीं किया.' आम चुनावों से पहले ये तूफ़ान अचानक कैसे आया? क्या कोई एजेंडा है? आप खुद समझदार हैं.
प्रिया रमानी: औरतें अब क्यों बोल रही हैं, मुझे इस बात में चालाकी नज़र आ रही है. तब जबकि हम जानते हैं कि यौन उत्पीड़न की पीड़िता को क्या क्या झेलना पड़ता है. मुझे इस बात से बेहद निराशा हुई है कि एमजे अकबर ने कई महिलाओं के आरोपों को राजनीतिक साजिश बताकर ख़ारिज कर दिया.
- यह भी पढ़ें:- औरतें यौन शोषण पर इतना बोलने क्यों लगी हैं
4. महिलाओं के आरोपों पर अकबर का जवाब
मुक़दमा: वकीलों का कहना है कि आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी ने खुद माना है कि 20 साल पुराने इस मामले में अकबर ने उनके साथ कुछ नहीं किया था. प्रिया ने अकबर पर आरोप लगाने वाले लेख से पहले कभी कहीं किसी अथॉरिटी के पास शिकायत नहीं की. अकबर के ख़िलाफ़ जिस कथित घटना को लेकर आरोप लगाए गए हैं, वो सिर्फ़ इस लेख पर आधारित हैं. ये लेख प्रिया की कल्पनाओं पर आधारित है.
अकबर का बयान: प्रिया रमानी ने एक साल पहले एक मैगजीन के लेख से इस अभियान की शुरुआत की थी. वो जानती थीं कि ये झूठी कहानी है, इसलिए उन्होंने 2017 में मेरा नाम उस लेख में नहीं लिखा था. हाल ही में जब उनसे पूछा गया कि मेरा नाम क्यों नहीं लिया था? एक ट्वीट के जवाब में वो कहती हैं, ''मैंने उनका नाम नहीं लिया क्योंकि उन्होंने कुछ नहीं 'किया' था.'' अगर मैंने कुछ नहीं किया था तो कहानी क्या है? ये कोई कहानी है ही नहीं.
प्रिया रमानी: जब ये घटनाएँ हुईं थीं, तब आरोप लगाने वाली तमाम महिलाएं अकबर के साथ एक ही दफ़्तर में काम करती थीं.
- यह भी पढ़ें:- एमजे अकबर के '97 वकीलों की फ़ौज' और एक अकेली महिला
5. परिवार, दोस्त और समाज
मुक़दमा: एमजे अकबर की ओर से ये कहा गया कि झूठे आरोप लगाकर राजनीतिक बिरादरी, मीडिया, दोस्तों, परिवार और समाज में उनकी छवि को नुकसान हुआ है. इन आरोपों के बाद अकबर को दोस्तों, परिवार, राजनीति और मीडिया से काफ़ी फ़ोन किए गए. इन फ़ोन कॉल्स में झूठे आरोपों को लेकर सवाल किए गए. इन आरोपों से अकबर की छवि को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नहीं हो सकती.
अकबर का बयान: मैं अब भारत लौट आया हूं. मेरे वकील इन बेबुनियाद आरोपों की जांच करेंगे और लीगल एक्शन लेंगे.
प्रिया रमानी: जिन औरतों ने अकबर के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है, उन्होंने अपनी निजी और प्रोफेशनल ज़िंदगी में बड़ा जोख़िम उठाया है.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, एमजे अकबर की ओर से दायर मानहानि केस की सुनवाई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में 18 अक्टूबर को हो सकती है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)