यौन उत्पीड़न के आरोप झूठे, करूंगा क़ानूनी कार्रवाई: एम जे अकबर

कई महिलाओं द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने रविवार को कहा कि वो आरोप लगाने वाली महिलाओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करेंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, एम.जे. अकबर ने बयान जारी करके कहा कि उनके ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं, वे फ़र्ज़ी हैं और राजनीति से प्रेरित हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने ख़ुद पर लगे आरोपों पर पहले बयान इसलिए नहीं दिया था क्योंकि वह आधिकारिक दौरे पर देश से बाहर थे.

अकबर ने कहा कि कुछ तबकों में बिना सबूत के आरोप लगाना आजकल आम हो गया है.

इसके अलावा उन्होंने सवाल किए, "आम चुनावों से पहले यह आंधी क्यों उठी है? इसके पीछे क्या कोई एजेंडा है? ये झूठे, आधारहीन आरोप हैं जो मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए लगाए गए हैं."

उन्होंने कहा कि झूठ के पैर नहीं होते, लेकिन इनमें ज़हर होता है जो उन्माद पैदा कर सकता है, यह परेशान करने वाला है.

'इतने दिनों तक चुप क्यों रहीं?'

उन्होंने एक महिला पत्रकार प्रिया रमानी द्वारा लेख लिखकर यौन दुर्व्यवहार के आरोपों पर कहा कि रमानी ने कई सालों पहले एक पत्रिका में लेख लिखकर उनके ख़िलाफ़ कैंपेन शुरू किया था. उन्होंने कहा कि रमानी ने उनका नाम नहीं लिखा था क्योंकि उन्हें पता था कि यह ग़लत स्टोरी है.

वहीं, एशियन एज अख़बार में काम करने के दौरान एक अन्य महिला द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को भी अकबर ने झूठा बताया. उन्होंने कहा कि यह भी याद रखने की बात है कि इन दोनों महिलाओं ने इन कथित घटनाओं के बाद भी उनके साथ काम करना जारी रखा.

अकबर ने सवाल किया कि क्या वजह थी जो वे दिनों महिलाएं इतने दिनों तक चुप रहीं.

विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर रविवार सुबह नाइजीरिया के दौरे से भारत लौटे. एयरपोर्ट के बाहर पत्रकारों ने अकबर को घेर लिया और उनसे इन आरोपों पर अपनी बात रखने को कहा.

उस समय अकबर ने कहा कि वह अपना बयान बाद में जारी करेंगे.

10 से अधिक महिलाओं ने लगाए आरोप

अब तक 10 से अधिक महिलाएं #MeToo के ज़रिए एमजे अकबर पर यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगा चुकी हैं. ये अधिकतर महिलाएं अकबर के साथ अलग-अलग मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं.

सोशल मीडिया पर चल रहे #MeToo अभियान के दौरान फ़िल्म, मीडिया जगत की जानी-मानी हस्तियों के नाम सामने आए हैं जिनमें महिलाओं ने उन पर यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं.

विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर पर 'प्रीडेटरी बिहेवियर' के आरोप हैं जिसमें युवा महिलाओं को मीटिंग के नाम पर कथित तौर पर होटल के कमरे में बुलाना शामिल है.

देश के सबसे प्रभावशाली संपादकों में से एक रहे एमजे अकबर, द टेलीग्राफ़, द एशियन एज के संपादक और इंडिया टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर रहे हैं.

सबसे पहले उनका नाम सोमवार को वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी ने लिया था. उन्होंने एक साल पहले वोग इंडिया के लिए 'टू द हार्वे वाइंस्टींस ऑफ़ द वर्ल्ड' नाम से लिखे अपने लेख को रीट्वीट करते हुए ऑफिस में हुए उत्पीड़न के पहले अनुभव को साझा किया.

रमानी ने अपने मूल लेख में एम.जे. अकबर का कहीं नाम नहीं लिया था, लेकिन सोमवार को उन्होंने ट्वीट किया कि वो लेख एम.जे. अकबर के बारे में था.

उसके बाद से पांच अन्य महिलाओं ने भी एम.जे. अकबर से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं.

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