तेलंगाना: यहाँ इस पार्टी को वोट देने की कसमें खा रहे हैं मतदाता

    • Author, दीप्ति बथिनी
    • पदनाम, संवाददाता, बीबीसी तेलुगू सेवा

"अल्लाह को साक्षी मानकर हम ये कसम खाते हैं कि आगामी तेलंगाना विधानसभा चुनावों में हम और हमारा परिवार सिर्फ़ 'कार' को ही वोट देगा और हम डॉक्टर महेंद्र रेड्डी को भारी मतों से विजयी बनायेंगे."

तेलंगाना के तांडुर विधानसभा क्षेत्र की एक मस्जिद में मुसलमान परिवहन मंत्री पी महेंद्र रेड्डी के सामने ये शपथ ले रहे हैं.

पी महेंद्र रेड्डी को तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) ने आगामी चुनावों के लिए तांडुर विधानसभा से उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी है.

किसी धार्मिक स्थल में मतदाताओं द्वारा चुनावी प्रतिज्ञा लेने का ये अकेला उदाहरण नहीं है. ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ लोग सर्वसम्मति से चुनावी प्रतिज्ञा ले रहे हैं.

मिसाल के तौर पर सिद्धीपेट निर्वाचन क्षेत्र में पड़ने वाले इब्राहिमपुर गाँव की ही घटना को देखिए, जहाँ लोगों ने सूबे के मौजूदा सिंचाई मंत्री टी हरीश राव को ही वोट देने की प्रतिज्ञा ली है.

इब्राहिमपुर गाँव की इल्ला रेड्डी ने कहा, "पूरे गाँव ने ये फ़ैसला किया है. हमने तय किया है कि गाँव का एक भी वोट किसी दूसरी पार्टी को न जाये. सभी लोग हरीश राव को ही वोट देंगे."

साल 2014 के विधानसभा चुनाव में हरीश राव सिद्धीपेट निर्वाचन क्षेत्र से ही विधायक चुने गए थे. आगामी चुनावों के लिए उन्हें सिद्धीपेट विधानसभा क्षेत्र से ही टीआरएस का उम्मीदवार घोषित किया गया है.

इसी तरह हुज़ूराबाद निर्वाचन क्षेत्र के कमालपुर गाँव और रामुलापल्ली गाँव के विभिन्न जाति समूहों ने भी सूबे के वित्त मंत्री इताला राजेंद्र को वोट देने की प्रतिज्ञा ली है.

इ राजेंद्र को करीमनगर में हुज़ूराबाद निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया है.

प्रतिज्ञाओं की वायरल वीडियो

ऐसे आयोजनों की वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. लोग इन्हें शेयर करते हुए मंत्रियों को उन तस्वीरों में टैग भी कर रहे हैं.

सिद्धीपेट के इब्राहिमपुर गाँव में भाषण देते हुए मंत्री हरीश राव ने कहा, "मैं लोगों का आभारी हूँ. लोगों ने सर्वसम्मति से अपना वोट देने का निर्णय लिया, इससे मैं ख़ुश हूँ."

तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने चुनाव कराने के लिए 6 सितंबर को ही विधान सभा भंग कर दी थी.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव ने सभी विधानसभा सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. चंद्रशेखर राव ने अपने सभी नेताओं से आह्वान किया है कि वो अपने निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव अभियान की शुरुआत जल्द से जल्द करें.

भारतीय चुनाव आयोग ने 27 सितंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चुनावी आचार संहिता लागू करने के निर्देश दिये थे. हालांकि चुनाव आयोग ने तेलंगाना राज्य में चुनाव की तारीख़ों की घोषणा अभी तक नहीं की है.

कोई शिक़ायत क्यों नहीं होती?

तेलंगाना के मुख्य चुनाव आयुक्त रजत कुमार ने बीबीसी को बताया, "धार्मिक स्थलों में जो चुनावी प्रतिज्ञाएं ली जा रही हैं, हमें भी उनकी सूचना मिली है. ये गतिविधियाँ चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है, भले ही राज्य में आंशिक रूप से इसे लागू किया गया हो. हमें इनके ख़िलाफ़ कोई शिक़ायत मिलेगी, तो हम इसपर भारतीय चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगेंगे और कार्रवाई करेंगे."

सूबे में प्रशासनिक इकाइयों के साथ मिलकर काम करने वाली गैर लाभकारी संस्था 'फ़ोरम फ़ॉर गुड गवर्नेंस' का कहना है कि ऐसी चुनावी प्रतिज्ञाओं के ख़िलाफ़ कभी कोई शिक़ायत दर्ज नहीं हुई है.

संस्था के सचिव एम पद्मनाभ रेड्डी ने बताया, "ऐसी प्रतिज्ञाएं हर चुनाव से पहले ली जाती हैं. नैतिक रूप से ऐसा करना सही नहीं कहा जा सकता. लेकिन तकनीकी रूप से और क़ानूनन इसे ग़लत ठहराना बड़ा मुश्किल है. क्योंकि ऐसा कई बार हुआ है जब किसी धर्म गुरू ने अपने भक्तों को किसी ख़ास पार्टी या उम्मीदवार को वोट करने के निर्देश दिये हैं."

पद्मनाभ रेड्डी का मानना है कि राजनीतिक दल समाज को जाति और धर्म के हिसाब से विभाजित कर रहे हैं. राजनीतिक दल वही कर रहे हैं जो उनके हित में है.

पद्मनाभ रेड्डी ने बताया, "किसी धार्मिक स्थल के भीतर चुनावी प्रतिज्ञा लेना चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है, लेकिन कोई भी इसके ख़िलाफ़ शिक़ायत नहीं दर्ज करवाता है. क्योंकि ये उन मतदाताओं पर असर डाल सकता है जिन्होंने अभी तक ये तय नहीं किया है कि वे किसे वोट देने वाले हैं."

'हम पर दबाव'

बीबीसी ने उन निर्वाचन क्षेत्रों के कुछ मतदाताओं से बात की जहाँ से 'प्रतिज्ञाओं के वीडियो' सामने आए हैं.

कमालपुर गाँव में हमारी मुलाक़ात एक ऐसे मतदाता से हुई जो इस बार पहली दफ़ा वोट करेंगे.

अपना नाम नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर उन्होंने बताया, "सोशल मीडिया पर राजनीतिक दल काफ़ी प्रचार कर रहे हैं. लोगों को इससे पता चलता है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में क्या-क्या चल रहा है. लेकिन गाँवों में ली जा रहीं ये सामूहिक प्रतिज्ञाएं नए लोगों पर दबाव बना रही हैं. इसलिए जिस दिन तक मैं मतदान करने नहीं जाता, मैं अपना दिमाग खुला रखना चाहता हूँ. मैं उसी दिन तय करूंगा कि मुझे किसे वोट करना है."

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