राजमाता विजया राजे सिंधिया के नाम से चुनावी राज्यों को साधेगी भाजपा?

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- Author, सचिन चौधरी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मध्य प्रदेश में विजयाराजे सिंधिया के नाम के इर्द-गिर्द चल रही राजनीति को लेकर दो ख़बरें एक साथ आईं.
राजमाता के जन्म शताब्दी वर्ष को भव्य अंदाज़ में मनाए जाने की घोषणा खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भोपाल में की.
दूसरी तरफ़ इस आयोजन के लिए राज्य सरकार ने जो कमिटी बनाई, उसमें विजयाराजे सिंधिया की सबसे छोटी बेटी यशोधरा राजे का नाम नदारद था.
दूसरी ख़बर इस लिहाज से भी अहम है कि यशोधरा शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री हैं और वे पार्टी में राजमाता को यथोचित सम्मान न मिलने का मुद्दा अक्सर उठाती रही हैं.
आयोजन समिति में यशोधरा की गैर-मौजूदगी को उनके इस मुद्दे पर मुखर होने से जोड़ कर देखा जा रहा है.
विजया राजे की विरासत
ग्वालियर के सिंधिया राजवंश की राजमाता विजया राजे सिंधिया का जन्म शताब्दी वर्ष 12 अक्टूबर से शुरू हो रहा है.
यूं तो ये मौका उनके परिजनों के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले की यह तारीख अब भारतीय जनता पार्टी भुनाने जा रही है.
इन तीनों राज्यों से ही राजमाता का सीधा रिश्ता रहा है. विजयाराजे सिंधिया ग्वालियर राजघराने की राजमाता होने के साथ-साथ भाजपा की संस्थापक सदस्यों में से एक रही हैं.
भोपाल में अमित शाह की घोषणा के बाद इस आयोजन के लिए केंद्र सरकार ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी कर दिया है.
जिसमे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ ही पांच प्रदेशों के राज्यपाल बतौर सदस्य होंगे.

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चुनावी साल में क्यों अहम हैं 'राजमाता'
विजया राजे जहां भाजपा की संस्थापक रही हैं तो उनके बेटे माधव राव सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता और अब माधव राव के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया बड़े कांग्रेसी नेता हैं.
राजमाता की बेटी यशोधरा मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री हैं. वहीं, छत्तीसगढ़ भी पहले मध्य प्रदेश का ही हिस्सा रहा है, इसलिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों के भाजपा कार्यकर्ताओं में राजमाता का सम्मान है.
इसके साथ ही राजस्थान में राजमाता की दूसरी बेटी वसुंधरा राजे सिंधिया वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं.
ज़ाहिर है कि तीनों राज्यों की राजनीति में सिंधिया राजघराने का नाम है.
एक तरफ जहां भाजपा 'राजमाता' के नाम पर अपने कार्यकर्ताओं को संदेश देगी, वहीं, मध्य प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के इफेक्ट को कम करने की कोशिश करेगी.

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बीजेपी की कोशिश
विशेष तौर पर पिछले कुछ सालों से भाजपा का गढ़ रहे मध्य प्रदेश के मालवा, निमाड़ और चंबल इलाके से इस बार पार्टी को अपना ग्राफ़ कमज़ोर होने के संकेत मिल रहे हैं.
यही इलाका सिंधिया राजघराने का प्रभावी माना जाता है. ऐसे में पार्टी को अब राजमाता के नाम का सहारा लेना बेहद अहम हो गया है.
हालांकि कुछ राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भाजपा के इस दांव से फायदा कम और नुकसान ज़्यादा होने की आशंका है.
वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली कहते हैं, "ग्वालियर चंबल इलाके में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की धार को कम करने के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, प्रदेश सरकार में मंत्री जयभान सिंह पवैया को लगा रखा है."
"ये नेता हर समय सिंधिया को सामंती बताकर उनके ख़िलाफ़ बयानबाजी करते रहते हैं. गाहे बगाहे खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी खुद को किसान और सिंधिया को राजा महाराजा बताकर जनता के बीच प्रचार करते हैं."
"ऐसे में राजमाता सिंधिया के नाम को इस तरह आगे बढ़ाकर भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया पर सामंती, राजा महाराजा वाले प्रहार कैसे करेगी?"

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आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति
मध्य प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता शोभा ओझा कहती हैं, "राजमाता ने भाजपा को तन मन धन से खड़ा किया. लेकिन पार्टी ने उनको भुला दिया था. यहां तक कि पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी फोटो तक नहीं लगाई जाती थी."
"अब चुनाव में लाभ लेने के लिए पार्टी उनका जन्म शताब्दी वर्ष मना रही है. लेकिन उनकी ही बेटी को समारोह की समिति से बाहर करके दिखा दिया कि उनकी राजमाता में कितनी श्रद्धा है!"
मध्य प्रदेश भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल उल्टा सवाल दागते हैं, "राजमाता का जन्मशताब्दी वर्ष चुनाव को देखते हुए तो नहीं आया. हम अपने सभी पूर्वजों को याद करते हैं."
"मेरा सवाल उल्टा ज्योतिरादित्य सिंधिया से है? क्या वे अपनी दादी राजमाता का जन्म शताब्दी वर्ष मनाएंगे? जो अत्याचार राजमाता ने इमरजेंसी में कांग्रेस की सरकार के दौरान सहे, क्या ज्योतिरादित्य या कांग्रेस उसका ज़िक्र करेंगे?"
"रही बात यशोधरा जी की तो केंद्र सरकार, राज्य सरकार और भाजपा तीन स्तर पर ये आयोजन होने हैं. इनमे सबकी अलग-अलग ज़िम्मेदारी है और यशोधरा जी की भी इन आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका होगी."
राजमाता का सियासी कद
विजया राजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को मध्य प्रदेश के सागर में हुआ. उनका वास्तविक नाम लेखा देवीश्वरी देवी था.
ग्वालियर के महाराजा जीवाजीराव सिंधिया से विवाह के बाद उनका नाम विजया राजे रखा गया.
आज़ादी के बाद भी सिंधिया राजघराने का वर्चस्व जनता के बीच था और सिंधिया राजघराने का सॉफ्ट कार्नर हिन्दू महासभा के लिए था.
इसी को भांपते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने ग्वालियर के महाराज को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की पेशकश की.
उनके मना करने पर राजमाता सिंधिया को चुनाव लड़ने के लिए मनाया गया और पहली बार 1957 में वो न केवल सांसद बनीं बल्कि पूरे मध्य भारत में कांग्रेस को जबर्दस्त जीत मिली.

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मध्य प्रदेश में पहली ग़ैर कांग्रेसी सरकार
ग्वालियर में छात्र आंदोलन को लेकर राजमाता की तत्कालीन कांग्रेसी सरकार के मुख्यमंत्री डीपी मिश्रा से अनबन हो गई.
इसके साथ ही सरगुजा स्टेट (वर्तमान में छत्तीसगढ़) में पुलिस कार्रवाई को लेकर उनका विवाद हुआ. इस विवाद के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी.
साल 1967 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव हुए. राजमाता गुना संसदीय सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार बनी और जीतीं भी.
इसके बाद कांग्रेस में फूट का फ़ायदा उठाते हुए करीब 35 विधायक के समर्थन वाले सतना के गोविंदनारायण सिंह को सीएम बनवाकर प्रदेश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनवा दी.
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के समय उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया था.
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