रफ़ाएल पर ओलांद के बयान पर राहुल ने पूछा जवाब कब देंगे मोदी, रविशंकर प्रसाद का पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

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लड़ाकू विमान रफ़ाएल सौदे को लेकर फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद के बयान से उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि वह फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के बयान पर चुप क्यों हैं. जवाब में केंद्रीय क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर इस मामले पर झूठ बोलने और ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया है.

इसके तुरंत बाद कांग्रेस की ओर से फिर से प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया गया रवि शंकर प्रसाद तथ्यों का हेर-फेर करके मामले को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.

शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने तीखा हमला करते हुए कहा, "फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा है कि रफ़ाएल सौदे में अंबानी की कंपनी को चुनने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी. वह कह रहे हैं कि अनिल अंबानी को हज़ारों करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट नरेंद्र मोदी के कहने पर दिया गया. यानी फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति भारत के प्रधानमंत्री को चोर कह रहे हैं."

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस मामले में कोई स्पष्टीकरण न आने वाले सवाल उठाते हुए कहा, "ओलांद कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी जी ने 30 हज़ार करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट फ़्री गिफ़्ट के रूप में अनिल अंबानी को दिया है. प्रधानमंत्री को सफ़ाई देनी चाहिए कि जो ओलांद ने कहा है वह सच है या नहीं. मुझे समझ नहीं आ रहा कि प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द भी क्यों नहीं निकल रहा. ये जवानों के भविष्य की बात है, देश की सुरक्षा की बात है और भ्रष्टाचार की बात है."

नरेंद्र मोदी और फ्रांस्वा ओलांद

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क्या कहा राहुल ने

दरअसल फ़्रांस की मीडिया में आई रिपोर्टों में पूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने कहा था कि रफ़ाएल विमान बनाने के लिए हुए 58 हज़ार करोड़ रुपये के समझौते के लिए रिलायंस डिफ़ेंस का नाम भारत सरकार ने ही सुझाया था और इसमें फ़्रांस का कोई दख़ल नहीं था. अब तक इस मामले पर भारत सरकार यह कहती रही है कि फ़्रांसीसी कंपनी दसो एविएशन ने ख़ुद ही अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफ़ेंस को चुना था.

फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद उठे विवाद के बाद फ़्रांस के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा था कि फ़्रांस की सरकार 'भारतीय पार्टनरों के चयन में किसी तरह शामिल नहीं' है.

इस बारे में सवाल पूछे जाने पर राहुल ने कहा, "फ्रांस सरकार ने प्रक्रिया के बारे में बताया है. मगर सभी जानते हैं कि फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री के बीच वन टू वन मीटिंग हुई थी और उसमें समझौते पर दस्तख़त हुए थे. अब ओलांद कह रहे हैं कि उस मीटिंग में उन्हें साफ़ बताया गया था कि कॉन्ट्रैक्ट अनिल अंबानी को जाना चाहिए. ऐसे में प्रधानमंत्री को अपना पक्ष रखना चाहिए."

रफ़ाएल

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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय की मदद करना चाहते हैं ताकि प्रधानमंत्री कहें कि ओलांद ग़लत बोल रहे हैं. मगर उनके मुंह से आवाज़ नहीं आ रही.

रक्षा मंत्रियों पर भी प्रहार

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि रफ़ाएल सौदे को लेकर हर कोई झूठ बोल रहा है. इसके लिए उन्होंने पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और वर्तमान रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी सवाल उठाए.

राहुल ने कहा, "पहले पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा कि जब कॉन्ट्रैक्ट बदला गया उन्हें पता नहीं चला, वो गोवा की मछली मार्केट से मछलियां ख़रीद रहे थे. फिर रक्षा मंत्री सीतारमण जी कहती हैं कि मैं पूरे देश को लड़ाकू विमान के दाम बता दूंगी मगर कुछ दिन बाद कहती हैं कि सीक्रेट अग्रीमेंट होने के कारण वह रफ़ाएल के दाम नहीं बता सकतीं."

फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ तत्कालीन भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर

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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री के सामने कहा था कि मेरी मैक्रों के साथ मीटिंग हुई थी जिसमें आनंद शर्मा और पूर्व प्रधानमंत्री भी थे. उस मीटिंग के रिकॉर्ड भी होंगे. उसमें मैक्रों ने सीधे कहा था कि भारत सरकार विमानों के दाम किसी को भी बता सकती है. बाद में निर्मला जी ने संसद में बहुत कुछ कहा मगर कुलमिलाकर सबकुछ झूठ कहा."

राहुल गांधी ने कहा कि यूपीए ने जिस लड़ाकू विमान को 526 करोड़ में ख़रीदा था, उसे अनिल अंबानी की मदद करने के लिए 1600 करोड़ रुपये में ख़रीदा गया.

नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी

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उन्होंने कहा, "अनिल अंबानी जी ने कॉन्ट्रैक्ट के 12 दिन पहले नई कंपनी बनाई, उन्होंने कभी कोई हवाई जहाज़ नहीं बनाया, यह कॉन्ट्रैक्ट एचएएल से छीना गया, निर्मला सीतारमण कहती हैं कि एचएएल विमान तैयार नहीं कर सकता जबकि एचएएल के अधिकारी कहते हैं कि यह विमाम बनाया जा सकता था. हक़ीक़त यह है कि एक के बाद एक झूठ बोला जा रहा है. किसके लिए झूठ बोला जा रहा है?"

आगे राहुल गांधी ने कहा, "झूठ किसके लिए बोल रहे हैं, किसको बचाने के लिए बोल रहे हैं, वह भी स्पष्ट है. निर्मला सीतारमण, पर्रिकर और अरुण जेटली जी ने रफ़ाएल समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. तो पूरा का पूरा मामला प्रधानमंत्री को बचाने का है."

रफ़ाएल विमान

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"प्रधानमंत्री ने तोड़ा भरोसा"

कांग्रेस अध्यक्ष ने सीधे प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा, "नरेंद्र मोदी जी ने 30 हज़ार करोड़ रुपये का प्रॉजेक्ट स्वयं अनिल अंबानी जी को दिया. अनिल अंबानी जी पर 45000 करोड़ रुपये का कर्ज़ है, उन्होंने कभी कोई विमान नहीं बनाया, उन्होंने कुछ ही दिन पहले कंपनी खोली और नरेंद्र मोदी जी ने हिंदुस्तान की जेब से पैसा निकाला और अनिल अंबानी की जेब में डाल दिया. मैं आपको बस यह बता रहा हूं कि जिस व्यक्ति पर आपने भरोसा किया था, उसने आपका भरोसा तोड़ा है."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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इसके बाद राहुल ने कहा कहा, "आज जब फ्रांस के राष्ट्रपति कहते हैं कि नरेंद्र मोदी जी ने अनिल अंबानी जी को चुना था तो प्रधानमंत्री जी के मुंह से एक शब्द नहीं निकला. आपने संसद में भी देखा होगा. जब मैं उनके सामने खड़ा था और उनके सामने ये बातें रखी थीं तो नरेंद्र मोदी जी ने आंख में आंख नहीं मिलाई थी. वह कभी इधर देख रहे थे तो कभी उधर. देश का चौकीदार चोरी कर गया."

सरकार का जवाब

केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर पलटवार किया और उन्हें 'नाक़ाबिल नेता' बताते हुए आरोप लगाया कि वह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "आज तक किसी ने ऐसी टिप्पणी प्रधानमंत्री पर नहीं की थी. राहुल गांधी से हम कुछ और उम्मीद कर भी नहीं सकते. न उनमें कोई गुण हैं न क़ाबिलियत है, वह परिवार के कारण वहां बैठे हैं."

रवि शंकर प्रसाद

हेराल्ड केस का ज़िक्र करते हुए राहुल पर क़ानून मंत्री ने कुछ यूं हमला किया, "एक ऐसा व्यक्ति जो भ्रष्टाचार, ज़मीन की लूट और शेयर की लूट में नेशनल हेरल्ड केस में अपनी मां के साथ चार्जशीटेड है, उससे और उम्मीद भी कर भी नहीं सकते. जो अपने बहनोई द्वारा सरकारी मदद से ज़मीन लूटने पर ख़ामोश रहता है, जिसके पूरे परिवार ने बोफ़ोर्स में घूस लेकर भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा की थी, उससे और क्या उम्मीद की जा सकती है. राहुल से मैं पूछना चाहता हूं कि क्वात्रोकी को यहां से किसने भगाया था? जब वह यहां से भागा था तो अपील नहीं करने दी गई थी उसे आपका मामा कहा जाता था."

राहुल पर गुमराह करने का आरोप

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान देकर देश को गुमराह कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "मोदी सरकार के दौरान करप्शन बंद हो गया है और दलालों के लिए दरवाजे बंद हो गए हैं, इससे उन्हें दर्द होता है."

रवि शंकर प्रसाद ने कहा, "विमानों की ख़रीद के लिए यूपीए वन ने 28 अगस्त 2007 को प्रपोज़ल जारी किया था जिसके लिए दसो और एक अन्य कंपनी ने आवेदन किया था. इसके पांच साल बाद जनवरी 2012 में यूपीए ने दसो को सबसे कम बिड देने वाली कंपनी चुना मगर इसके छह महीने बाद कहा कि डील पर पुनर्विचार करें. ऐसा करने की क्या नौबत आ गई थी?

रफ़ाएल

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'रिलायंस' को लेकर सफ़ाई

राहुल गांधी द्वारा लगाए गए अनिल अंबानी की कंपनी को मदद पहुंचाने के आरोप पर रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और फ्रांसीसी कंपनी दसो एविएशन के बीच 2012 में ही बातचीत और एमओयू हो चुका था. क़ानून मंत्री ने कहा, "हम 26 मई 2014 को सत्ता में आए मगर अख़बारों में 2012 में ही दसो और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के बीच समझौते की ख़बरें छप गई थीं. बात में दोनों भाइयों के बीच क्या हुआ, क्या नहीं, यह हमारा विषय नहीं है. मगर दोनों के बीच एमओयू पहले से ही हुआ था."

क़ानून मंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति की क्या मजबूरियां हैं जो वह ऐसे बयान दे रहे हैं. उन्होंने फ्रांस सरकार के उस बयान का भी दोहराया जिसमें कहा गया है कि फ्रांस की सरकार की ऑफ़सेट पार्टनर चुनने में कोई भूमिका नहीं थी और इसका फ़ैसला कंपनी को ही करना था. इसके बाद उन्होंने दसो के बयान का भी ज़िक्र किया और कहा कि दसो ने रिलायंस डिफ़ेंस ही नहीं बल्कि मंहिद्रा समेत अन्य छह कंपनियों के साथ भी समझौता किया है जबकि 100 अन्य कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है.

फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद

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क़ानून मंत्री ने कहा, "ऑफ़सेट का मतलब है कि कुछ लड़ाकू विमान बनकर आएंगे और कुछ हिंदुस्तान में बनेंगे ताकि यहां का उद्योग बढ़ेगा, यहां के लोगों को नौकरी मिलेगी. क्या राहुल गांधी चाहते हैं कि लोगों को नौकरियां न मिलें?"

राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी हर जगह विमान की क़ीमत अलग बता रहे हैं और यह भी कह रहे हैं जब उनकी सरकार ने विमान ख़रीदा था तो उसकी क़ीमत कम थी, जबकि यूपीए ने कोई विमान नहीं ख़रीदा था. रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया, "आपने कंपनी के साथ समझौता आपने किया था और फिर तोड़ दिया था क्योंकि घूस नहीं मिली."

रफ़ाएल

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"देश की सुरक्षा से खेल रहे राहुल"

रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा, "पहले आपने सर्जिकल स्ट्राइक की गवाही देने के लिए कहा. आज जब देश के सामने रोज़गार के अवसर पैदा हो रहे हैं तब आप अड़ंगा डाल रहे हैं. विमान जो भारत आ रहे हैं, उनमें वेपन सिस्टम भी लगे हैं. क्या आप चाहते हैं कि हमारे दुश्मनों को पता चल जाए कि हमारे पास क्या है? इसका दाम पूछकर राहुल गांधी पाकिस्तान की मदद करना चाहते हैं. वह दुश्मनों के हाथों में खेल रहे हैं."

कांग्रेस का पलटवार

बाद में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने फिर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की और क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के दावों पर सवाल खड़े किए.

उन्होंने कहा, "एक बात साफ़ है कि प्रधान सेवक जनता की नहीं अनिल अंबानी जी की सेवा कर रहे थे. फ्रांस के उस समय के राष्ट्रपति, जिन्होंने रफ़ाएल समझौता किया, ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट तौर पर कहा कि 36 जहाज़ खरीदने के सौदे की शर्त यह थी कि 30 हज़ार करोड़ का ठेका एचएएल से छीनकर रिलायंस समूह यानी अनिल अंबानी जी को दिया जाएगा. आज फिर उनके कार्यालय ने कहा कि वह अपने बयान पर क़ायम हैं."

सुरजेवाला ने कहा कि 'यह डील तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई थी, ऐसे में जब दोनों में से एक व्यक्ति सामने आकर कुछ कह रहा है तो दूसरा व्यक्ति चुप क्यों है?'

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, "सरकार यह नहीं कह रही कि ओलांद ग़लत कह रहे हैं. क़ानून मंत्री भी उनकी बात को काट नहीं पाए. साफ़ है कि चौकीदार राष्ट्र के हितों के बजाय निजी कंपनी के हितों को संवार रहे थे. इसलिए उन्हें जवाब देना पड़ेगा."

हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स लिमिटेड
इमेज कैप्शन, कांग्रेस का दावा- हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स लिमिटेड से हुआ था दसो का समझौता

"एचएएल के साथ था समझौता"

सुरजेवाला ने कहा कि क़ानून मंत्री ने पूरे मामले को भटकाने के लिए यह दावा किया है कि रिलायंस के साथ पहले ही दसो का समझौता हुआ था. उन्होंने कहा, "ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था. अगर हुआ था तो सरकार आपकी है, काग़ज़ात आपसे पास हैं, उन्हें सार्वजनिक कीजिए."

कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि असल समझौता दसो और सरकारी कंपनी एचएएल के बीच हुआ था. उन्होंने कहा, "मोदी जी द्वारा रफ़ाएल समझौते पर हस्ताक्षर करने से 17 दिन पहले पहले 25 मार्च 2015 को दसो एविएशन के सीईओ एचएएल के चेयरमैन के साथ एचएएल की फैक्ट्री में गए थे और वहां दिए गए उनके बयान से यह बात साफ़ हो जाती है."

सुरजेवाला ने क़ानून मंत्री के उस बयान को भी हास्यास्पद बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस बिना वेपन सिस्टम के इन विमानों को खरीद रही थी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मंत्रियों का समूह झूठ बोलने वालों का समूह बन गया है.

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