You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
‘क्या पाकिस्तान की चीनी शुगर फ्री है?’
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बागपत (उत्तर प्रदेश) से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश में गन्ना यूं तो पूरे राज्य में होता है लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना और चीनी मिलों का मुद्दा न सिर्फ़ किसानों की आजीविका से जुड़ा है बल्कि ये राजनीतिक हवा का रुख़ भी तय करता है.
उसी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाक़े बाग़पत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब गन्ना किसानों से गन्ना छोड़ अन्य फ़सलों का रुख़ करने का आह्वान किया तो गन्ना किसान हैरान रह गए.
योगी ने ऐसा करने की वजह कुछ यूं बताई, "किसान ज़्यादा गन्ना बो रहे हैं इसकी वजह से लोगों को शुगर हो रहा है. दिल्ली नज़दीक है, तमाम तरह की सब्ज़ियां बोई जा सकती हैं और उससे अच्छा मुनाफ़ा भी कमाया जा सकता है."
गन्ना बोना किसानों की मजबूरी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को शायद ये बात पची नहीं. किसानों का कहना है कि गन्ना वो अपनी मर्ज़ी से ही नहीं बोते हैं बल्कि दूसरी फ़सलों के लिए इस इलाक़े की ज़मीन उतनी उपयुक्त नहीं है.
जानकारों का भी कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जो भौगोलिक बनावट है उसमें गन्ने की फ़सल आसानी से होती है, इसलिए यहां गन्ना बोना किसानों की मजबूरी भी है. दूसरे चीनी मिलों की अधिकता के कारण उन्हें अपने गन्ने का बाज़ार भी आसानी से मिल जाता है.
किसान नेता और गन्ना किसानों के लिए आंदोलन को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले सरदार वीएम सिंह कहते हैं, "गन्ना उन इलाक़ों में होता है जहां बाढ़ हो, जहां पानी ज़्यादा आए, जहां धान नहीं लग सकता. जहां धान नहीं लग सकता वहां सब्ज़ी तो लग ही नहीं सकती. गन्ना एक मजबूरी है, एक हार्ड क्रॉप है और इस क्षेत्र में इसका कोई विकल्प नहीं है. इसका सबसे सही विकल्प केला हो सकता है, लेकिन केला बहुत महंगी फसल है. तो खेती के बारे में बिना कुछ जाने, इस तरह के बयान देना बड़ा अजीब लगता है."
वीएम सिंह कहते हैं, "अगर गन्ने की फसल ठीक नहीं, गन्ना ज़हर है तो योगी गोरखपुर मंडल में बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू करने की बात क्यों कह रहे हैं. हमारे गन्ने की चीनी शुगर पैदा करती है तो आप पाकिस्तान से जो चीनी मँगाते हो वो क्या शुगर फ्री होती है?"
गन्ना किसानों के भुगतान पर विवाद
दरअसल, उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों और चीनी मिलों के बीच पैसे के भुगतान को लेकर अक्सर विवाद होता है. चीनी मिलों पर किसानों का करोड़ों रूपये बकाया रहता है और किसानों के लिए उसका भुगतान ही सबसे बड़ी समस्या होती है. मुख्यमंत्री ने बाग़पत की जनसभा में कहा कि किसानों को ज़्यादातर भुगतान हो चुका है और बाक़ी भुगतान भी जल्द हो जाएगा, जबकि सच्चाई ये है कि कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद अभी तमाम किसान अपने बकाये के भुगतान की राह देख रहे हैं.
यह संयोग ही है कि मुख्यमंत्री जिस बाग़पत में गन्ना किसानों को ये सुझाव दे रहे थे, उसी बाग़पत ज़िले के बड़ौत क़स्बे में क़रीब तीन महीने पहले अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे किसानों में से एक किसान की धरनास्थल पर ही मौत हो गई थी.
यह घटना ठीक उसी दिन हुई थी जिस दिन वहां से क़रीब चालीस किमी. दूर देश की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तमाम मंत्रियों के साथ ईस्टर्न पेरिफ़ेरल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर रहे थे और अगले ही दिन कैराना में लोकसभा का उपचुनाव होने वाला था.
'सरकार पूरे नहीं कर पाई वादे'
प्रधानमंत्री ने जनसभा में घोषणा की थी कि अब किसानों का गन्ने का बकाया देने में सरकार सहयोग करेगी और ये धनराशि सीधे उनके खाते में चली जाएगी. दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक चुनावी सभा में घोषणा कर आए थे कि गन्ना किसानों के ज़्यादातर बकाए का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन उस समय भी तमाम किसानों का यही कहना था कि उनकी जानकारी में अब तक किसी को भी बकाया पैसा नहीं मिला है.
किसान नेता वीएम सिंह कहते हैं कि बीजेपी सरकार ने चौदह दिन के भीतर बकाया भुगतान करने और न कर पाने पर ब्याज समेत भुगतान करने का वादा किया था लेकिन कोर्ट की दखलअंदाजी के बावजूद ऐसा नहीं हो सका.
सहारनपुर में वरिष्ठ पत्रकार रियाज हाशमी बताते हैं, "मौजूदा सीजन में चीनी मिलों पर किसानों का 12,000 करोड़ रूपया बकाया है. मिल मालिक देश में गन्ने की क़ीमतें गिरने की वजह से हुए नुक़सान की भारपाई के लिए सरकार से राहत पैकेज मांग रहे हैं. बीते साल जुलाई में जो गन्ना 3721 रूपए प्रति क्विंटल था, उसके दाम इस साल 2700 रूपए प्रति क्विंटल तक गिर गए थे."
किसानों पर दोहरी मार
बाग़पत के एक गन्ना किसान राजबल चौधरी कहते हैं, "गन्ना पट्टी के किसानों ने ये सोचकर बीजेपी के पक्ष में वोट दिया था कि केंद्र और राज्य दोनों जगह सरकार आ जाएगी तो गन्ना किसानों की समस्या दूर हो जाएगी लेकिन इस सरकार ने हमें बहुत निराश किया है."
राजबली चौधरी कहते हैं, "इस बार गन्ने की पैदावार काफ़ी अच्छी हुई है इसलिए किसानों पर अब इसकी दोहरी मार भी पड़ रही है. गन्ना खेतों में खड़ा है लेकिन चीनी मिलें ख़रीद नहीं कर रही हैं, पिछले बकाए का भुगतान नहीं हुआ है, सो अलग."
ये अलग बात है कि इसी इलाक़े से आने वाले गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खेतों में खड़ा गन्ना बिकेगा भी और उसका पैसा भी जल्द मिलेगा. बाग़पत के एक किसान दिनेश त्यागी कहते हैं, "किसान मंत्री जी की बात पर भरोसा करेगा ही, और वो कर भी क्या सकता है?"
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)