राम रहीम के जेल जाने के बाद डेरा कर्मचारी क्या कर रहे हैं

राम रहीम, डेरा सच्चा सौदा

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    • Author, प्रभु दयाल
    • पदनाम, सिरसा से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के जेल जाने के बाद डेरे से जुड़ी कई संस्थाएं भी इस घटना से प्रभावित हुईं.

ऐसी ही एक सामाजिक संस्था ग्रीन एस वेल्फेयर फोरम में काम करने वाले कई लोगों को हटा गिया गया. वहीं कईयों ने खुद ही डेरे की फैक्ट्रियों और उससे जुड़ी संस्थाओं को छोड़ दिया.

ग्रीन एस वेल्फेयर फोरम के कई मैंबर लापता हो गए और कई फोरम को छोड़ कर अपना कुछ और काम करने लगे.

डेरे की ग्रीन एस वेल्फेयर के 10-12 साल से मैंबर रहे एक डेरा अनुयायी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया है कि वो पेंटिंग का काम करते थे, लेकिन अब सर्विस स्टेशन पर काम करके अपने परिवार का गुज़ारा करते हैं.

12वीं तक पढ़े ग्रीन एस वेल्फेयर के इस पूर्व सदस्य ने बताया कि फोरम के कई विंग बने हुए थे और सभी विंग्स की अलग-अलग ज़िम्मेदारियां थीं.

संस्था कैसे काम करती थी?

ग्रीन एस वेल्फेयर फोरम में पानी की कमिटी, कैंटीन कमिटी, वेल्डिंग, महिला और बुज़ुर्ग कमिटी समेत कई और विंग थे. इसे कुल मिलाकर सात कमिटियां चलाती थीं.

हर कमिटी का एक प्रमुख होता था जो सबमें काम बांटता था. वो बैठक में सामाजिक कामों की सूचना सबको देता था.

कुछ सूचनाएं गुप्त रखी जाती थीं, जो सिर्फ सात सदस्यों की कमिटी को ही पता होती थी.

फोरम के अलग-अलग विंग के लोगों को एक साथ इक्कठा करके, उन्हें बस में बिठाकर काम पर ले जाया जाता था.

ग्रीन एस वेल्फेयर फोरम के सदस्यों को डेरे की विशेष वर्दी ही पहननी होती थी जिसकी कीमत 2200 रुपए थी.

इस वर्दी के ऊपर बकायदा फोरम का नंबर लिखा होता था. फोरम के अलग-अलग विंग के अलग-अलग नंबर होते थे.

राम रहीम

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पहली कतार वाले फोरम के नंबर अलग होते थे और दूसरी और तीसरी कतार वाले फोरम के नंबर अलग होते थे.

फोरम की 15 से 20 बसें थी. आग बुझाने और बाढ़ पीड़ियों की मदद के लिए अलग-अलग फोरम होते थे.

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संस्था के कई लोग अंडरग्राउंड

डेरा प्रमुख राम रहीम के जेल जाने के बाद भड़की हिंसा के बाद पुलिस ने कई लोगों को नामज़द किया. कई अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज किया था.

कुछ को अभी भी ये डर है कि कहीं उनका नाम किसी मामले में ना आ जाए, इसलिए वो अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं कर रहे हैं और कई लोग अभी भी अंडरग्राउंड हैं.

बीबीसी से बातचीत में डेरा अनुयायी ने दावा किया कि फैक्ट्रियों में काम करने वाले कई मज़दूरों को कई महीनों से मेहनताना नहीं मिला और कईयों को पी.एफ. का पैसा भी नहीं मिला.

फैक्ट्री में काम करने वाले मज़दूरों को तजुर्बे के हिसाब से ही मेहनताना दिया जाता था, लेकिन फैक्ट्रियों के दोबारा चालू होने के कारण कई मज़दूरों को दोबारा नौकरी पर भी रखा गया है.

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ज़िला असिस्टेंट लेबर इंस्पेक्टर ललित कुमार ने बताया है कि डेरे की किसी भी फैक्ट्री के किसी भी मज़दूर ने अब तक मेहनताना ना मिलने की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है.

इनका कहना है कि अगर कोई शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जाएगी.

इस मामले में डेरे का पक्ष जानने के लिए डेरे के प्रवक्ता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.

ऊधर कमिटी के सदस्य डेरा प्रमुख को जेल से रिहा कराने के लिए समर्थकों से प्रार्थना (सिमरन) करने के लिए कह रहे हैं.

डेरे के कुछ लोग अब भी अनुयायियों को डेरे से जोड़े रखने की कोशिश कर रहे हैं. वो उनके घर जाकर प्रसाद देते हैं और सिमरन करने के लिए कहते हैं.

उन्हें बकायदा ये भी बताया जाता है कि किस वक्त और कितने वक्त तक सिमरन करना है.

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