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केरल की बाढ़ पर खाड़ी के देशों ने खोला दिल
संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतोउम ने केरल में आई जानलेवा बाढ़ को लेकर एक साथ कई ट्वीट किए हैं.
मोहम्मद बिन ने ये ट्वीट शुक्रवार शाम को किए. उन्होंने ये ट्वीट अंग्रेज़ी और मलयालम दोनों भाषाओं में किए हैं. उन्होंने अपने ट्वीट में केरल में बाढ़ पीड़ितों के लिए तत्काल मदद देने का वादा किया है.
मोहम्मद बिन ने एक ट्वीट में कहा है, ''केरल के लोग संयुक्त अरब अमीरात की सफलता में हमेशा से साथ रहे हैं. हमारी यह विशेष ज़िम्मेदारी है कि बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुंचाएं. केरल की यह बाढ़ काफ़ी भयावह है. सैकडों लोग मारे गए हैं और हज़ारों बेघर हुए हैं. बकरीद के पहले भारत में हम अपने भाइयों को मदद करना नहीं भूलेंगे.''
खाड़ी से मदद
केरल के लोग खाड़ी के देशों में बड़ी संख्या में रहते हैं. शारजाह के शासक सुल्तान बिन मोहम्मद अल-क़ासिमी ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के चार करोड़ रुपए की मदद दी है.
खाड़ी देशों में रह रहे मलयालियों की एसोसिएशन भी अपने लोगों की मदद के लिए वहां से पैसे भेज रहे हैं. कहा जा रहा है कि इन देशों से 100 करोड़ रुपये की राशि मदद के तौर पर आसानी से मिल जाएगी.
एक अनुमान के मुताबिक़ केरल की कुल तीन करोड़ की आबादी के दस फ़ीसदी लोग राज्य में नहीं रहते हैं. केरल के हर तीसरे घर का एक आदमी खाड़ी के देशों में काम करता है.
ये देश हैं कुवैत, क़तर, ओमान, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब. राज्य के बैंकों के आंकड़ों के अनुसार इन देशों में काम करने वाले केरल को लोग हर साल एक अरब रुपए भेजते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शुक्रवार रात केरल में बाढ़ का जायज़ा लेने पहुंचे थे. पीएम ने केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद राहत और बचाव कार्य के लिए 500 करोड़ रुपए की मदद की घोषणा की है.
प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही बाढ़ से मरने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए देने की घोषणा की है. केरल ने केंद्र से 2500 करोड़ रुपए की मांग की है.
बाढ़ के कारण अब तक 350 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग बेघर हुए हैं. बाढ़ के पानी के कारण भूस्खलन भी ख़ूब हो रहे हैं.
अलग-अलग शहरों को जोड़ने वाली सड़कें टूट चुकी हैं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है. डर है कि कहीं अकाल जैसी स्थिति न पैदा हो जाए.
लाखों लोग राहत शिविरों में
अधिकारियों का कहना है कि एक अनुमान के अनुसार प्रदेश के चार लाख लोग राहत कैंपों में रह रहे हैं. इस आपदा से निकालने में सेना और एनडीआरएफ़ के जवान लगे हुए हैं.
संकट की घड़ी में देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री ने मदद की घोषणा की है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने सभी सांसदों और विधायकों की एक महीने की सैलरी देने की घोषणा की है.
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पांच करोड़, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10 करोड़, मनोहर लाल खट्टर ने 10 करोड़ और इसी तरह से तमिलनाडु से भी मदद मिली है.
शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि वो केरल की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करें. कई लोग ऊंचे अपार्टमेंट्स में फंसे हुए हैं तो स्टूडेंट्स हॉस्टल में फंसे हुए हैं.
लोग सोशल मीडिया के ज़रिए भी मदद की गु़हार लगा रहे हैं. इससे पहले केरल में 1924 में बाढ़ आई थी और तब 3,338 मिलीमीटर बारिश हुई थी. उस वक़्त भी सैकड़ों लोग मारे गए थे और दो लाख लोग बेघर हुए थे.
केरल के मुख्यमंत्री ने बाढ़ पर कहा है, ''बहुत ही गंभीर हालात हैं. दो लाख लोगों को प्रदेश भर के 1,568 कैंपों में शिफ़्ट किया गया है. हवाई, रेल और सड़क मार्ग बुरी तरह से बाधित हैं. हमें भूस्खलन का भी सामना करना पड़ रहा है. राहत बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. पिछले दो दिनों में 15 हज़ार लोगों को सुरक्षित निकाला गया है.''
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