You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
केरल: बाढ़ की आपदा से शिविरों में एक लाख लोग
- Author, प्रमिला कृष्णन
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी तमिल सेवा
केरल को 'ईश्वर का अपना देश' भी कहा जाता है. लेकिन इस राज्य को 94 साल की 'सबसे बड़ी बाढ़' का सामना करना पड़ रहा है.
केरल के कई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर हो गई है.
पिछले दो हफ़्तों में केरल के 14 ज़िले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.
सरकारी अधिकारियों ने बुधवार शाम को बताया कि 15 अगस्त के दिन बाढ़ की वजह से 25 लोगों की मौत हुई.
बाढ़ से प्रभावित सभी ज़िलों में राहत शिविर लगाए गए हैं. बताया गया है कि एक लाख से अधिक लोग घरबार छोड़कर इन राहत शिविरों में रह रहे हैं.
बिजली, पानी, रेल, रोड, सब ठप
राज्य के विभिन्न हिस्सों में विद्युत आपूर्ति, संचार प्रणाली और पेयजल आपूर्ति बाधित है.
यहाँ ट्रेन सेवाएं बाधित हैं और सड़क परिवहन सेवाएं भी अस्त-व्यस्त हैं. जगह-जगह सड़कें पानी में डूब गई हैं.
अधिकारियों के अनुसार, कासरगोड़ को छोड़कर बाकी सभी ज़िलों में शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी की घोषणा कर दी गई है. कॉलेजों और महाविद्यालयों ने परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं.
पलक्कड, वायनाड और कोच्चि कुछ ऐसे ज़िले हैं जिन्होंने कभी ऐसी आपदा का सामना नहीं किया.
कोच्चि में बचाव दल के एक कर्मचारी ने बीबीसी को बताया कि शहर में काफ़ी पानी घुस गया है. लोग कमर तक पानी में डूबे हैं, लेकिन वो अपने घर, अपनी जगह छोड़कर शिविर में जाने को तैयार नहीं हैं.
जोन्स नाम के एक बचावकर्मी ने बताया, "कोच्चि के जिस मोहल्ले में हम गए थे, वहाँ बच्चों समेत क़रीब 200 लोग फंसे हुए हैं. वो परेशानी में हैं. दुखी हैं. लेकिन अपनी संपत्ति छोड़ने से इनकार कर रहे हैं."
कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परिसर में पानी घुस जाने के कारण उसे शनिवार तक बंद करने की घोषणा की गई है.
सरकार की कोशिशें
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया है और राज्य में बाढ़ के हालात पर उनसे विस्तार से चर्चा हुई है.
विजयन ने मंगलवार को इस साल के ओणम उत्सव को रद्द करने की घोषणा कर दी थी. ये उत्सव राज्यभर में मनाए जानेवाले सबसे बड़े त्योहारों में से एक है.
लेकिन केरल सरकार ने राज्यभर में सांस्कृतिक समारोह आयोजित करने के लिए दी जानेवाली 30 करोड़ रुपये की राशि को मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में दिए जाने का फ़ैसला किया है.
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लोगों से बाढ़ राहत कोष में मदद करने का आग्रह भी किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्विटर पर एक बयान जारी कर लोगों से मदद मांगी है.
सारे बाँध खोले गए
केरल सरकार ने राज्य के सभी छोटे-बड़े 27 बाँध खोल दिए हैं. इस वजह से रबर, चाय और ताड़ के खेतों में पानी भर गया है.
इडुक्की ज़िले में 65 वर्षीय किसान विक्रमण का कहना है कि पानी इतना ज़्यादा है कि उन्हें अपने खेतों की पहचान करने में भी मुश्किल हो रही है.
उन्होंने बताया, "हम नहीं जानते कि हमारी ज़मीन कहाँ है. पूरे इलाक़े में इतना पानी है कि खेतों की पहचान नहीं हो पा रही. इस साल की हमारी पूरी उपज बर्बाद हो जाएगी."
सड़कें डूबने की वजह से राज्य में खाने-पीने के सामान की सप्लाई भी बाधित हो गई है. सुंदरम नाम के एक व्यापारी ने बताया कि उनका काम ठप हो गया है. उन्होंने बताया कि इडुक्की ज़िले में बांध के क़रीब स्थित पूरा बाज़ार पानी में डूब गया है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)