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एक बार में तीन तलाक़ बिल में संशोधन, मजिस्ट्रेट से मिल पाएगी ज़मानत
तीन तलाक़ गैर-ज़मानती अपराध बना रहेगा, लेकिन अब इसमें मजिस्ट्रेट से ज़मानत मिल सकेगी.
बिल में इससे जुड़े संशोधन को कैबिनेट ने गुरुवार को मंजूरी दे दी.
दिसंबर में लोक सभा से विधेयक पास कर एक बार में तीन तलाक़ को आपराध घोषित कर दिया गया था.
विधेयक पर विपक्षी सदस्य 19 संशोधन प्रस्ताव लेकर आए थे, लेकिन सदन ने सभी को ख़ारिज कर दिया.
तीन संशोधनों पर वोटिंग की मांग की गई और वोटिंग होने के बाद स्पीकर सुमित्रा महाजन ने परिणामों की घोषणा करते हुए कहा कि ये ख़ारिज हो गए हैं.
लोक सभा से पास बिल में तीन साल जेल का प्रावधान किया गया था. साथ ही अगर कोई तलाक़ देता है तो उसे थाने से नहीं कोर्ट से ज़मानत मिलने की बात कह गई थी.
बिल लोक सभा से तो पास हो गया लेकिन विपक्ष ने इसे राज्य सभा में अटका दिया था.
लेकिन अब इसमें संशोधन कर केंद्र सरकार की इसे दोबारा पास कराने की कोशिश रहेगी.
सत्तारूढ़ दल भाजपा का कहना है कि इस बिल के ज़रिए मुस्लिम महिलाओं का सशक्तिकरण होगा. सरकार ने मुताबिक़, तीन तलाक़ का मुद्दा लिंग न्याय, लिंग समानता और महिला की प्रतिष्ठा, मानवीय धारणा से उठाया हुआ मुद्दा है.
वहीं दूसरी तरफ़ मुस्लिम लॉ बोर्ड सहित कुछ संगठनों ने तीन तलाक़ को अपराध घोषित करने संबंधी इस बिल का विरोध किया था.
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