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अलवर में गौरक्षा के नाम पर रकबर की पीट-पीटकर हत्या
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, जयपुर से
राजस्थान के अलवर में एक बार फिर कथित गौरक्षकों ने एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी है.
यहां हरियाणा के नूँह के रहने वाले रकबर ख़ान को पीट-पीट कर मार डाला गया है. पुलिस ने हत्या के आरोप में दो लोगों को गिरफ़्तार किया है.
राजस्थान के अलवर में कथित गौरक्षकों के हाथों यह ऐसी तीसरी घटना है जब भीड़ ने किसी व्यक्ति को गौ-तस्करी के नाम पर मौत के घाट उतारा हो.
पिछले साल ऐसे ही पहलू ख़ान और उसके बाद उमर नामक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी. मुस्लिम मेव समुदाय ने इस घटना पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की है.
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया देकर मोदी सरकार पर हमला किया है. उन्होंने कहा, "गाय को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने का बुनियादी अधिकार है और एक मुस्लिम को मारा जा सकता है क्योंकि उनके 'जीने' का नैतिक अधिकार नहीं है. मोदी शासन के चार साल- लिंच राज.'
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने घटना की निंदा की है और दोषी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का निर्देश दिया है.
रकबर का शव शनिवार को जब उसके घर कोलगांव पहुंचा तो मातम छा गया. कोलगांव के इस्हाक़ अहमद कहते हैं उसके बच्चे यतीम और बूढ़े माँ बाप बेसहारा हो गए हैं.
कब, कैसे, कहां की गई हत्या?
पुलिस के अनुसार रकबर पर शुक्रवार आधी रात उस वक़्त हमला किया गया जब वो दो गायों के साथ पैदल हरियाणा जा रहा था. उसके साथ असलम भी था.
असलम ने भाग कर जान बचाई. मगर भीड़ ने अकबर को गौ तस्कर समझ कर इतना पीटा कि अस्पताल ले जाने के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया.
जयपुर पुलिस रेंज के अतिरिक्त महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर घटना का ब्यौरा दिया है. इसके मुताबिक, रामगढ़ पुलिस थाने को आधी रात सूचना मिली थी कि दो लोग गायों की तस्करी कर ले जा रहे हैं.
इसके मुताबिक़ जब पुलिस मौके पर पहुंची तो उसे रकबर वहां घायल अवस्था में पड़ा मिला. उसने पुलिस को घटना की जानकारी दी और बताया कि उसे गौ तस्कर कहकर पीटा गया है.
पुलिस ने बताया कि रकबर को अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही मेव समुदाय के लोग अस्पताल पर इकट्ठा हो गए और अपना विरोध दर्ज कराया.
सूचना मिलने पर रकबर के घर वाले भी अस्पताल पहुंच गए. पुलिस के समझाने के बाद रकबर के परिजन पोस्टमॉर्टम के लिए तैयार हो गए.
मोदी और कोर्ट की भी नहीं सुनती भीड़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ही ऐसी घटनाओं पर अफ़सोस जताया और राज्यों से ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कहा था. इसके पहले सुप्रीम कोर्ट भी राज्यों से भीड़ के हाथों हो रही हिंसक घटनाओं पर रोक के निर्देश दे चुका है.
'प्रशासन की लापरवाही से मरा अकबर'
अलवर में अस्पताल के बाहर मौजूद लोगों के बीच मौलाना हनीफ़ कहते हैं, "पहलू ख़ान के मामले में सख्त कार्रवाई की गई होती तो उमर नहीं मारा जाता. ऐसे ही उमर की हत्या पर हुकूमत कड़ा रुख अपनाती तो रकबर की जान नहीं जाती. इन घटनाओं ने भय पैदा कर दिया है."
मौलाना कहते हैं, 'इस ग़मो दुख की घड़ी में बहुसंख्यक समाज के लोग हमारे साथ खड़े हैं. यही हमारे लिए बड़ा संबल है."
कोलगांव के इस्हाक़ कहते हैं, 'रकबर की पत्नी और बच्चों की हालत देखी नहीं जाती. रकबर के सात बच्चे हैं. यह मिश्रित आबादी का गांव है."
इस्हाक़ कहते हैं, "परिजनों को सांत्वना देने सभी वर्गो के लोग पहुंचे हैं. रकबर के घर में सरकारी स्किम से बना एक पक्का कमरा है बाकी कच्चे ठिकाने हैं."
इस्हाक़ के अनुसार पहले रकबर के पिता दूध बेचते थे और डेरी चलाते थे. पिछले कुछ समय से रकबर ने अपने पिता काम संभाल लिया था. इसी काम के लिए वो गाय ख़रीद कर ला रहा था.
मेव समुदाय के सद्दाम कहते हैं मेव बिरादरी के लोग पशुपालन और खेती कर गुजर बसर करते हैं. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अलवर ज़िले में दो लाख से ज़्यादा गौ धन है. यह क्षेत्र मेवात का हिस्सा है जिसका विस्तार हरियाणा तक है.
एक हफ़्ते के भीतर पिटाई का दूसरा मामला
गौरक्षकों के हाथों पहलू ख़ान की हत्या के बाद मानवाधिकार संगठनों ने सरकार की तीखी आलोचना की थी. पुलिस ने पहलू ख़ान के मामले में 9 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था. मगर बाद में पुलिस ने जाँच में इनमें से छह लोगों को यह कह कर क्लीन चिट दे दी कि उनके ख़िलाफ़ सुबूत नहीं मिले.
राजस्थान में पिछले पांच दिन में कथित गौरक्षकों के हाथों मौके पर ही न्याय करने की यह दूसरी घटना है. इसके पहले कोटा में ऐसे ही कथित गौरक्षकों ने मध्यप्रदेश में दूध की डेरी चलाने वाले प्रवीण पंडित और उसके ड्राइवर अहमद को घेर का पीटा. प्रवीण अपनी डेरी के लिए जयपुर से गाय ख़रीद कर देवास ले जा रहे थे.
प्रवीण ने खुद के ब्राह्मण होने की दुहाई भी दी. मगर कथित गौरक्षकों ने रहम नहीं किया. पुलिस कोटा की घटना में पांच लोगों को गिरफ़्तार कर चुकी है.
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