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तमिलनाडु में सवर्णों के दबाव में एक दलित महिला के ट्रांसफ़र पर विवाद
- Author, टीम बीबीसी तमिल
- पदनाम, चेन्नई (तमिलनाडु) से
पश्चिमी तमिलनाडु से जातिगत भेदभाव का एक विचित्र मामला सामने आया है.
यहाँ के एक गाँव के स्कूल में काम करने वाली दलित महिला का ये कहते हुए ट्रांसफ़र कर दिया गया कि हिंदू समुदाय के कुछ अभिभावकों को उनके हाथ के बने खाने से आपत्ति है.
ये महिला स्कूल में मिड डे मील (बच्चों के लिए दोपहर का खाना) तैयार करने का काम करती हैं.
हालांकि सोशल मीडिया पर सरकार के इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना हुई. साथ ही स्थानीय लोगों ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ जमकर प्रदर्शन किया जिसके बाद ट्रांसफ़र का ये फ़ैसला सरकार ने रोक दिया.
दलित महिला का नाम पप्पल है और वो तिरुपुर ज़िले में पड़ने वाले ओछामपल्यम गाँव के एक प्राइमरी स्कूल में बीते 12 सालों से काम कर रही थीं.
तमिलनाडु सरकार ने उनका ट्रांसफ़र पास के ही थिरुमलाईकवंदन पल्यम गाँव में किया था. ये पप्पल का अपना गाँव है.
लेकिन अपने गाँव में ही ट्रांसफ़र होकर आना उनके लिए एक बुरा अनुभव रहा और इसका कारण है उनका दलित समाज से होना.
हुआ क्या था?
दरअसल, थिरुमलाईकवंदन पल्यम गाँव के सवर्णों ने आपत्ति जताई थी कि उनके बच्चे एक दलित महिला के हाथ से बना खाना नहीं खायेंगे.
पप्पल बताती हैं कि उन्हें पहले ही दिन खाना बनाने से मना कर दिया गया.
बीबीसी को पप्पल ने बताया, "मेरा ट्रांसफ़र जब अपने गाँव में हुआ तो मैं बहुत ख़ुश हुई थी. मैंने मंगलवार को थिरुमलाईकवंदन पल्यम गाँव के स्कूल में ज्वाइन कर लिया था. दोपहर का खाना बनाने के लिए जब मैं स्कूल की रसोई में गई तो गाँव के कुछ लोग आये और उन्होंने जातिसूचक शब्द कहे और मुझे कोसना शुरू कर दिया. उन्होंने मेरी जाति पर सवाल उठाते हुए कहा कि तुम सरकारी नौकरी पाने के लायक नहीं हो."
पप्पल ने ये आरोप लगाया कि गाँव के सवर्णों ने उनका अपमान किया और तुरंत स्कूल की रसोई से बाहर निकल जाने की धमकी दी.
उन्होंने कहा, "इसके बाद वो लोग स्कूल के अध्यापकों के पास गये और उन्हें धमकी दी कि अगर मैं स्कूल में खाना बनाऊंगी तो वो अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देंगे. इसके बाद सरकारी अधिकारियों ने मेरा ट्रांसफ़र उसी स्कूल में कर दिया जहाँ मैं 12 साल से काम कर रही थी."
पप्पल कहती हैं कि अगर उन्हें अपने गाँव के स्कूल में नौकरी करनी पड़ी तो उन्हें सुरक्षा की ज़रूरत होगी.
इस घटना के बारे में थिरुमलाईकवंदन पल्यम गाँव के स्कूल की हेड मास्टर शशिकला ने बीबीसी को बताया कि स्कूल में 75 छात्र पढ़ते हैं. 16 जुलाई को इस स्कूल में पप्पल ने ज्वाइन किया था और उसी दिन विवाद हो गया.
शशिकला ने बताया, "क़रीब 30 छात्रों के परिजन स्कूल में आये और कहने लगे कि वो स्कूल से अपने बच्चों का नाम कटवा देंगे. सभी हिंदू परिवारों के लोग थे. उन्होंने कहा कि स्कूल में जो नई कुक आई है, वो नहीं चाहते कि उनके बच्चे उसके हाथ का खाना खाएं."
गाँववालों के डर से ट्रांसफ़र
स्कूल की हेड मास्टर से इन लोगों ने कहा कि जब तक पप्पल स्कूल से नहीं चली जातीं वो अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे.
परेशानी को देखते हुए अगले दिन स्कूल में खाना किसी दूसरे शख़्स ने बनाया. इस बीच पप्पल का स्कूल से ट्रांसफ़र कर दिया गया.
पप्पल ने इसकी शिक़ायत चीफ़ एजुकेशनल अफ़सर से की. उन्होंने पप्पल को भरोसा दिलाया कि वो इस बारे में ज़िला कलेक्टर से बात करेंगे.
बीबीसी को ब्लॉक स्तर की अधिकारी मीनाक्षी ने बताया, "पप्पल का जिस स्कूल में ट्रांसफ़र किया गया था, उस गाँव के कुछ लोगों ने स्कूल में हंगामा किया. स्कूल बंद करवाने के लिए प्रदर्शन किये. हम नहीं चाहते थे कि क़ानून व्यवस्था बिगड़े, इसलिए पप्पल का ट्रांसफ़र वापस उसी स्कूल में कर दिया गया जहाँ उन्होंने लंबे वक़्त तक काम किया था."
पेशे से वक़ील और मानवाधिकार कार्यकर्ता पनीरसेल्वम ने बीबीसी से कहा, "बच्चों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि खाना कौन बना रहा है. वो तो ये लोग हैं जो उनके दिमाग़ और सोच को बर्बाद कर रहे हैं. उनके ज़ेहन में जातिवाद का बीज बो रहे हैं. इस इलाक़े में 64 तरह के रीति रिवाज़ हैं जिनकी जड़ में छुआछूत है. लोगों का आज भी उनमें विश्वास है. ये लोग दलितों को शादी के लिए मंडप या हॉल नहीं देते. उनके लिए खाने-पीने के बर्तन अलग रखते हैं. नाई की दुकान में अलग बैठाते हैं. ऐसी कई और चीज़ें भी हैं. ज़िले में सामाजिक न्याय के लिए जो फोरम बनाया गया है वो इस पर कोई कार्रवाई नहीं करता और ऐसे मामलों की अनदेखी करता है."
ट्रांसफ़र के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
ज़िले के कलेक्टर के एस पलानीसामी ने बीबीसी को बताया, "इस मामले की जाँच करवाई जा रही है. सब-कलेक्टर स्तर का एक अधिकारी इसकी जाँच करेगा. कमेटी जो रिपोर्ट देगी, उसके अनुसार, कार्रवाई की जायेगी."
इस बीच तमिलनाडु में छुआछूत के ख़िलाफ़ काम करने वाले दलित संगठनों ने पप्पल के ट्रांसफ़र के ख़िलाफ़ कई प्रदर्शन आयोजित किये हैं.
क़रीब दो दिन तक स्कूल के बाहर भी इन संगठनों ने प्रदर्शन किया. लेकिन कोई भी सरकारी अधिकारी इनसे बात करने वहाँ नहीं पहुँचा तो उन्होंने पास के ही सेवुर में सड़क जाम की और प्रदर्शन किया.
प्रदर्शनकारियों की माँग है कि स्कूल की हेड मास्टर के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाये और बीडीओ को भी पप्पल का ट्रांसफ़र करने का दोषी माना जाये.
सब-कलेक्टर श्रवण कुमार ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सभी माँगें मानी जायेंगी. और जिन लोगों ने भी पप्पल को उनका काम करने से रोका, उनके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई होगी.
84 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज
इस घटना पर सेवुर पुलिस स्टेशन में 84 लोगों के ख़िलाफ़ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.
साथ ही राष्ट्रीय एससी/एसटी कमीशन ने भी ज़िला कलेक्टर, ज़िले के एसपी और चीफ़ एजुकेशनल अफ़सर को नोटिस भेजकर ये कहा है कि वो इस मामले पर तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करें.
गाँव के जिन सवर्णों ने पप्पल को खाना बनाने से रोका था, उनमें से एक भी परिवार बीबीसी से बात करने के लिए तैयार नहीं हुआ.
बहरहाल, पप्पल ने शुक्रवार को एक बार फिर थिरुमलाईकवंदन पल्यम गाँव के स्कूल में जॉइन किया.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि शुक्रवार को उन्होंने स्कूल में खाना बनाया जिसे बच्चों ने खाया भी.
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