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'राम पर टिप्पणी' करने वाला तेलुगू अभिनेता तड़ीपार
- Author, बीबीसी तेलुगू डेस्क
- पदनाम, दिल्ली
फिल्म समीक्षक काथी महेश को तेलंगाना पुलिस ने छह महीने के लिए तड़ीपार कर दिया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने हिंदुओं के देवता राम पर एक टीवी डिबेट के दौरान अपमानजनक टिप्पणी की थी.
पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर सोमवार को की थी, जिसके बाद अब वो हैदराबाद में नहीं घुस सकेंगे.
जहां काथी महेश की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें काफ़ी विरोध झेलना पड़ा है. वहीं सूबे के दलित पुलिस की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं.
दलित कार्यकर्ता सुजाता सुरेपल्ली ने आरोप लगाया है कि सरकार दलितों पर प्रतिशोध भरे रवैए से कार्रवाई कर रही है.
लेकिन इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने इन विरोधों के बाद शिकायत करने वाले संत परिपूर्णानंद को भी शहर के बाहर जाने का आदेश दिया.
पूरिपूर्णानंद को भी छह महीने के लिए तड़ीपार किया गया है. महेश के समर्थन में कई तबके पुलिस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.
संत पूरिपूर्णानंद को नोटिस जारी कर 2017 के दौरान मेंडक में दिए एक भाषण पर स्पष्टीकरण मांगा गया है, जिसमें उन्होंने दूसरे धर्मों के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि जब 24 घंटों के बाद भी उनका कोई जवाब नहीं आया तो उन्हें भी निष्कासित करने का फ़ैसला किया गया.
हालांकि पूरिपूर्णानंद के क़ानूनी सलाहकार का कहना है कि उन्हें पहले पुलिस का कोई नोटिस नहीं मिला था.
इससे पहले पूरिपूर्णानंद को नज़रबंद कर दिया था, क्योंकि उन्होंने काथी महेश के ख़िलाफ़ मार्च निकालने का ऐलान किया था.
काथी महेश पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया?
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक महेंद्र रेड्डी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी, "अगर कोई अपमानजनक टिप्पणी करके लोगों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश करता है तो इससे राज्य की शांति व्यवस्था भंग होने का ख़तरा होता है. एक हिंदू देवता के ख़िलाफ़ महेश की टिप्पणी से बहुसंख्यक लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है. इसी वजह से उन्हें राज्य से बाहर निकालने का फ़ैसला किया गया."
डीजीपी ने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी एक मौलिक अधिकार है, लेकिन हर किसी को ये ध्यान रखना चाहिए कि इससे किसी दूसरे की धार्मिक भावनाएं आहत ना हो.
पुलिस ने महेश को उनके पैतृक गांव आंध्र प्रदेश के चित्तूर भेज दिया है. पुलिस ने बताया है कि अगर महेश ने छह महीने से पहले हैदराबाद वापस लौटने की कोशिश की तो उनपर आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है, जिसके अंतर्गत उन्हें तीन साल तक की जेल हो सकती है.
डीजीपी ने बताया, "समूहों में नफ़रत पैदा करना गंभीर अपराध है. अगर वो सोशल मीडिया या किसी दूसरे माध्यम से लोगों की भावनाओं को आहत करना जारी रखते हैं तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी."
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अगर कोई मीडिया चैनल उनके ऐसे बयानों का प्रसारण करता है तो चैनल के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने बताया कि चर्चा का प्रसारण करने वाले एक स्थानीय टीवी चैनल को भी केबल टीवी रेगुलेशन एक्ट के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
चैनल के स्पष्टीकरण के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
ख़बरों में रहने की रणनीति
वकील और सामाजिक कार्यकर्ता साईं पदमा ने कहा, "लंबे समय से काथी महेश विवादास्पद टिप्पणियां कर रहे थे. रोज़ाना की ख़बरों में बने रहने के लिए ये उनकी रणनीति है."
उन्होंने कहा, "अगर चैनल टीआरपी बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का प्रसारण करता है तो इससे समाज में तनाव का माहौल पैदा हो सकता है. आर्टिकल 19(1A) और 19 (2) के मुताबिक़ अगर कोई व्यक्ति या संस्था अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करती है तो उनपर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं."
"हालांकि सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि किसी व्यक्ति को निष्कासित करना क़ानून के मुताबिक़ न्यायसंगत नहीं है. ऐसे विवादों की वजह से समाज के असल मसले कहीं दब के रह जाते हैं."
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाई कोर्ट के वकील वेनुगोपाल रेड्डी ने बताया, "किसी व्यक्ति को किसी जगह से निष्कासित कर देना उसकी स्वतंत्रता का हनन माना जा सकता है."
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला देते हुए एकतरफ़ा विचारों के आधार पर किसी व्यक्ति को तड़ीपार कर देना क़ानूनन ग़लत है.
"क़ानून के हिसाब से, पुलिस किसी को हिरासत में ले सकती है लेकिन उसे किसी व्यक्ति को निष्कासित करने का अधिकार नहीं है."
काथी महेश कौन है?
काथी महेश फिल्म समीक्षक और तेलुगू सिनेमा के अभिनेता हैं. इससे पहले वो अभिनेता पवन कल्याण के ख़िलाफ़ टिप्पणी करने को लेकर ख़बरों में थे.
जनवरी 2018 में इस टिप्पणी के बाद पवन कल्याण के प्रशंसकों ने उन्हें ट्रोल भी किया था.
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