अब होगी कर्नाटक के गठबंधन की असली परीक्षा

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए

कर्नाटक की विधानसभा के आज से शुरू हुए सत्र में कांग्रेस और जनता दल सेक्यूलर के गठबंधन की आज़माइश भी होगी.

मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की गठबंधन सरकार के सामने कर्नाटक के इतिहास का सबसे मज़बूत विपक्ष है.

224 सदस्यों वाली विधानसभा में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के पास 104 सीटें हैं. कर्नाटक विधानसभा में कभी भी विपक्षी दल के पास इतनी सीटें नहीं रही हैं.

हालांकि, मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के कांग्रेस और जेडीएस की समन्वय समिति से सहारा मिल गया है. समिति ने 5 जुलाई को पेश किए जाने वाले पूर्ण बजट पर मुहर लगा दी है.

कर्नाटक के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने तकनीकी पेंच उठाते हुए कहा था कि उन्होंने पूर्ण बजट पेश किया था ऐसे में नई सरकार सिर्फ़ सहायक बजट ही पेश कर सकती है.

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बजट पर तनाव

इस बयान के बाद से ही पूर्ण बजट गठबंधन सहयोगियों कांग्रेस और जेडीएस के बीच तनाव बन गया था.

लेकिन कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी कुमारस्वामी के पूर्ण बजट पेश करने पर सहमति जता दी है जिससे उनका मनोबल बढ़ना तय है.

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सिद्धारमैया की अध्यक्षता की समन्वय समिति ने गठबंधन सरकार के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) तैयार कर लिया है.

इस न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत अगले पांच सालों में प्रदेश में सिंचाई योजनाओं पर 1.23 लाख करोड़ रुपए ख़र्च करने पर सहमति बन गई है.

इसके अलावा ग़रीबों के लिए 20 लाख घर बनवाए जाएंगे और सरकार एक करोड़ नए रोज़गार पैदा करने के लिए काम करेगी.

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जनता दल सेक्युलर के महासचिव और समन्वय समिति के सदस्य दानिश अली ने कहा कि पिछली सिद्धारमैया सरकार की सभी नीतियों और कार्यक्रमों को जारी रखा जाएगा.

पिछले हफ़्ते सिद्धारमैया के दो कथित वीडियो सामने आने के बाद उनकी सरकार की योजनाएं और पूर्ण बजट गठबंधन के बीच तकरार का मुद्दा बन गए थे.

दानिश अली ने कहा, "सभी वीडियो को निहित स्वार्थों ने तैयार किया है. जब कुछ लोग निजी वार्ता में किसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे हों तो उसका वीडियो बनाकर जारी करना अनैतिक है."

विपक्षी बीजेपी की भूमिका

दिलचस्प बात ये है कि सिद्धारमैया ने भी वीडियो को अनैतिक बताया है. ये अलग बात है कि इन वीडियो में उनके निजी विचार भी सार्वजनिक हो गए.

उन्होंने मैसूर और बंगलुरु में अलग-अलग मौक़ों पर मीडिया के साथ बातचीत में भी पूर्ण बजट को लेकर अपनी राय ज़ाहिर की थी.

वहीं बीबीसी से बातचीत में दानिश अली ने किसानों की क़र्ज़ माफ़ी को लेकर अधिक जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि इसके बारे में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ही अपने बजट भाषण में विस्तार से बताएंगे.

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लेकिन, गठबंधन सरकार का असली परीक्षण विधानसभा में मज़बूत बीजेपी के राजनीतिक हमलों से होगा.

मैसूर यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर मुज़फ्फ़र असादी कहते हैं, "बीजेपी को अपने आप को एक जीवंत विपक्ष के तौर पर दिखाना होगा. उसे अपनी निगरानी करने की भूमिका निभानी होगी क्योंकि उन्हें लगता है कि ये गठबंधन सरकार लोकसभा चुनावों के बाद नहीं चल पाएगी."

"ऐसे में बीजेपी अगर आर्थिक मुद्दों को नज़रअंदाज़ करके राजनीतिक मुद्दें पर ज़्यादा ध्यान दे तो ये चौंकने की बात नहीं होगी क्योंकि बीजेपी को लगता है कि वो अगले चुनावों में सत्ता में आ सकती है."

कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला आज द्विसदनी विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे.

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