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नरेंद्र मोदी की शादी हुई है, लोग झूठ न फैलाएं: जसोदाबेन
- Author, जयदीप वसंत
- पदनाम, बीबीसी गुजराती
"एक औरत होने के बावजूद आनंदीबेन पटेल ने ऐसा बयान दिया, इसलिए मुझे ये सफ़ाई देनी पड़ रही है. मेरे लिए ये दुख की बात है कि मोदी के शादीशुदा होने के बावजूद लोग ऐसे बयान दे रहे हैं."
ये कहना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदाबेन का. उन्होंने ये बातें बीबीसी गुजराती से एक इंटरव्यू में कहीं.
जसोदाबेन, आनंदीबेन पटेल के उस बयान से दुखी हैं जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के अविवाहित होने की बात कही थी.
गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश की मौजूदा राज्यपाल आनंदीबेन ने एक कार्यक्रम में कहा था, "नरेंद्रभाई ने शादी नहीं की है लेकिन वो औरतों और बच्चों का दर्द समझते हैं.''
आनंदीबेन के इस बयान से जसोदाबेन और उनके परिवार के लोग बेहद ख़फ़ा हैं.
जसोदाबेन ने कहा, "सबको पता है कि नरेंद्र मोदी की शादी हुई थी फिर भी ये लोग झूठ फैला रहे हैं."
जसोदाबेन और उनके परिवार का कहना है कि आनंदीबेन का बयान पूरी तरह झूठ है. एक ऐसा झूठ जो राजनीतिक वजहों से फैलाया जा रहा है.
जसोदाबेन के भाई अशोक मोदी ने बीबीसी गुजराती से कहा, "लोगों को राजनीति के लिए नरेंद्र मोदी और जसोदाबेन के बारे में झूठ नहीं फैलाना चाहिए.''
क्या है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शादी का मामला?
नरेंद्र मोदी ने 2002, 2007 और 2012 के गुजरात विधानसभा चुनावों में चुनाव के नामांकन फ़ॉर्म में अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी.
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी ने पहली बार औपचारिक रूप से चुनावी हलफ़नामे में क़बूल किया था कि उनकी शादी हुई थी.
उन्होंने नामांकन पर्चे में जोसदाबेन को अपनी पत्नी बताया. हालांकि, पैन कार्ड और जायदाद से जुड़े बाकी काग़जातों में उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी.
इसके बाद पीएम मोदी के बड़े भाई सोमाभाई दामोदरदास मोदी ने एक बयान जारी किया और कहा कि शादी के कुछ दिनों बाद ही वो और जसोदाबेन अलग हो गए थे.
सोमाभाई ने कहा, "हम सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते हैं. हमारे समाज में बाल विवाह की प्रथा प्रचलित थी और 17 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी की शादी जसोदाबेन से हुई थी. शादी के कुछ दिनों बाद ही दोनों अलग हो गए थे. हालांकि, दोनों ने कभी अपनी शादी ख़त्म नहीं की."
सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2013 में एक फ़ैसला दिया था और कहा था कि चुनावी प्रत्याशी को नामांकन पत्र में मांगी गई हर जानकारी देनी होगी.
अगर कोई कॉलम खाली छूटता है तो उसका नामांकन पर्चा रद्द किया जा सकता है. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मतदाताओं को अपने चुनावी प्रत्याशी के बारे में सब कुछ जानने का अधिकार है.
इसके बाद चुनाव आयोग ने नामांकन पत्र के बारे में एक दिशा-निर्देश जारी किया था. इसमें कहा गया था कि कोई कॉलम खाली छोड़ने के बजाय प्रत्याशी को उसमें 'नो' या 'नॉट ऐप्लीकेबल' लिखना होगा.
कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी से शादी के वक़्त जसोदाबेन की उम्र सिर्फ 15 साल थी.
आलोचकों का कहना है कि मोदी ने आरएसएस में शामिल होने के बाद जसोदाबेन को छोड़ दिया था क्योंकि संघ के स्वयंसेवकों को शादी करने की अनुमति नहीं है.
आलोचकों का ये भी कहना है कि मोदी का इतने लंबे वक़्त तक जसोदाबेन को अपनी पत्नी स्वीकार न करना, उनका महिलाओं के प्रति उदासीन रवैया दिखाता है.
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