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गुजरात में दलित दूल्हे के घोड़ी चढ़ने पर मचा बवाल, पुलिस सुरक्षा में हुई शादी
- Author, भार्गव पारिख
- पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए
गुजरात में दलितों पर हो रहे अत्याचार में एक और किस्सा जुड़ गया है. ये किस्सा गांधीनगर के माणसा का है.
माणसा तहसील के पारसा गांव में बारात लेकर पहुंचे दलित युवक को कथित बड़ी जाति के लोगों ने घोड़ी से नीचे उतार दिया.
पारसा गांव की दरबार जाति के कुछ लोगों ने इस बारात को रोका था जिसके बाद पुलिस बुलानी पड़ गई थी. स्थिति इतनी विपरीत हो गई थी कि पूरी शादी के दौरान पुलिस बंदोबस्त रखना पड़ा था.
क्या था पूरा मामला?
महसाणा ज़िले के बोरियावी गांव के प्रशांत सोलंकी बारात लेकर पारसा जा रहे थे. जैसे ही पारसा गांव की सीमा से उन्होंने अपनी बारात निकली तभी कुछ दरबार जाति के लोगों ने आकर उन्हें रोक दिया.
प्रशांत सोलंकी ने बीबीसी गुजराती से कहा, "जब मैं घोड़ी पर बैठने जा रहा था तभी कुछ लोगों ने आकर मुझे रोका और धमकाने लगे कि घोड़ी पर क्यों चढ़ रहे हो."
प्रशांत के साले रितेश परमार ने बीबीसी गुजराती से बताया कि हम उनके स्वागत की तैयारी कर ही रहे थे. तभी पता चला कि गांव के कुछ दरबार जाति के लोगों ने मेरे जीजा प्रशांत को धमकी दी है कि घोड़ी पर बारात ना निकालें.
"दरबारों ने घोड़ी वाले को भी धमकाया जिसके बाद वो घोड़ी लेकर गांव से चला गया. इसके बाद हमने पुलिस को बताया. पुलिस और सरपंच ने आकर स्थिति को संभाला. सरपंच ने एक और घोड़ी की व्यवस्था की. तब जाकर घोड़ी पर बारात आई. फिर शादी पूरी हुई."
शादी मुहुर्त से दो-तीन घंटे बाद हुई.
प्रशांत ने कहा कि पुलिस शादी के दौरान भी वहीं थी और उनकी सुरक्षा में ही शादी हुई.
गांधीनगर के डीएसपी आरजी भावसार ने बताया कि कोई दलित घोड़ी पर बैठकर बारात निकाले उससे कुछ ख़ास जाति के लोगों को आपत्ति थी.
हालांकि पुलिस ने इस मामले में पूरी सुरक्षा दी. जिसके बाद घोड़ी पर ही बारात भी आई और शादी भी हुई.
समाधान के प्रयास
दोनों जातियों के बीच के टकराव को शांत करने के लिए काफ़ी प्रयास किए गए. पारसा गांव के सरपंच ने बीबीसी गुजराती से कहा कि अब सब शांत है. उन्होंने कहा कि इस घटना के दौरान दरबार जाति के कुछ बुज़ुर्गों ने समझाने की कोशिश भी की थी.
"भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो इसके प्रयास जारी हैं. इस मामले में पुलिस कार्रवाई न हो और बात आगे न बढ़े इसकी भी कोशिश की जा रही है."
गुजरात में दलितों के मामले में क्या कर रही है सरकार?
गुजरात में दलितों के साथ अत्याचार की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ऊना कांड के बाद देशभर में इसकी चर्चा भी हुई. इस मामले पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के मंत्री ईश्वर परमार से बीबीसी गुजराती ने बात की. उनका कहना है कि गुजरात में बढ़ते दलित अत्याचार के मामले पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है.
उन्होंने कहा कि गुजरात के हर गांव के सरपंच को बुलाकर सौहार्दपूर्ण स्थिति कायम करने की बात की जाएगी. उन्होंने गुजरात में जातियों के बीच बढ़ रहे अंतर को चिंताजनक बताया. उन्होंने कहा कि पारसा गांव के सरपंच ने दो गुटों के बीच झगड़े को रोककर उदाहरण पेश किया है. इसी तरह और गांवों के सरपंच को भी ऐसा रवैया बनाना चाहिए.
गुजरात में दलितों की स्थिति
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2016 में अनुसूचित जाति पर अत्याचार के 1322 मामले दर्ज किए गए. 2015 में ये आंकड़ा 1010 का था.
दलितों पर अत्याचार के मामलों में गुजरात पांच सबसे बुरे राज्यों में से एक है. आरटीआई एक्टिविस्ट कौशिक परमार की याचिका से गुजरात में दलित अत्याचार के आंकड़े सामने आए हैं. इस याचिका के अनुसार, गुजरात में 2017 में प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटी एक्ट में 1515 मामले दर्ज़ हुए.
2017 में दलितों पर हुए अत्याचार की घटना में 25 हत्याएं, 71 हमले और 103 रेप के मामले दर्ज़ हुए हैं.
वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश शाह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि दलितों के विरोध में अत्याचार गुजरात में होते रहे हैं लेकिन भाजपा की सरकार में ऐसे मामले बढ़ रहे हैं. "इस समय हो रहे इन अत्याचार में अलग बात ये है कि इसमें उच्च वर्णीय मानसिकता का गौरव छलक रहा है. भाजपा की सरकार और हिंदुत्व की विचारधारा के कारण भी दलित विरोधी मानसिकता में उछाल आया है."
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