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शिलौंग हिंसा: छठे दिन भी हालात तनावपूर्ण
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
मेघालय की राजधानी शिलौंग में पिछले गुरुवार को एक मामूली से विवाद के बाद भड़की हिंसा की वजह से आज छठे दिन भी हालात काफ़ी तनावपूर्ण बने हुए है.
बीते गुरुवार को एक बस में खलासी का काम करने वाले एक खासी युवक और दलित पंजाबी लड़की के बीच कहासुनी और कथित मारपीट वाला यह विवाद अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है.
राज्य सरकार ने विभिन्न समुदाय के लोगों को शामिल कर एक शांति समिति का गठन ज़रूर किया है, लेकिन फिलहाल स्थिति में कोई सुधार दिख नहीं रहा है.
ईस्ट खासी हिल्स ज़िले के डीएम पीएस दखार ने मंगलवार को शिलौंग की मौजूदा स्थिति पर बीबीसी से कहा,"शिलौंग में अभी कर्फ्यू है, लेकिन स्थिति फिलहाल नियंत्रण में हैं. आज हिंसा की कोई घटना अबतक सामने नहीं आई हैं. हमने अर्धसैनिक बलों की एक कंपनी को शहर में तैनात किया है."
पंजाबी कॉलोनी की गुरुद्वारा समिति के सदस्य संगम सिंह ने बीबीसी से कहा, "हमारे इलाके में लगातार कर्फ्यू है. हम बाहर निकल नहीं सकते. ऐसे में हालात सुधरने की बात कैसे कह सकते है. फिलहाल माहौल तनावपूर्ण ही है."
दरअसल, प्रदर्शनकारियों के लगातार विरोध की वजह से प्रशासन के लिए हालात पर काबू पाना मुश्किल होता जा रहा है. इससे पहले रविवार को कर्फ्यू लागू होने के बावजूद दंगाइयों और पुलिसकर्मियों के बीच रात भर चले संघर्ष के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को शहर के 14 क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया.
इसके अलावा, शहर में हिंसा की वारदातों को देखते हुए सोमवार को फिर से सेना ने फ्लैग मार्च किया. इस बीच कई दंगाइयों की गिरफ्तारी भी हुई है लेकिन इन गिरफ्तारियों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे संगठन बेहद गुस्से में हैं.
ऐसे में कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए केंद्र ने अर्धसैनिक बलों की एक कंपनी भेजी है. इलाके में जारी हिंसा और तनाव को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं को बंद कर रखा है.
प्रदर्शनकारियों की मांग
ऐसी ख़बर आ रही है कि मेघालय सरकार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग मान ली है. हालांकि अभी तक इसकी सरकारी पुष्टि नहीं हुई है.
प्रदर्शनकारी शिलौंग शहर के बीचो-बीच पंजाबी लेन की करीब दो एकड़ ज़मीन पर बसे दलित सिखों को तत्काल दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं.
इसका जवाब देते हुए संगम सिंह कहते है," प्रदर्शनकारियों की मांग मान लेने की बात के बारे में हमारे पास कोई जानकारी नहीं है. सरकार मान ले लेकिन हम अपनी जगह नहीं छोड़ेंगे".
वे आगे कहते हैं, "हमारे लोगों ने भी मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के साथ बैठक की है लेकिन ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई. सरकार पहले इलाके में शांति बहाल करना चाहती है. इसके बाद ही कोई बात होगी."
आख़िर ये मामूली-सा विवाद इतना बड़ा कैसे हो गया, इस सवाल का जवाब देते हुए संगम सिंह कहते है, "जो जगह हमारे पास है वो शहर की प्राइम लोकेशन है. काफी मंहगी भी है. इसको लेकर पहले से राजनीति चल रही है. वो लोग हमें यहां से हटाकर मार्केट बनाना चाहते है."
पिछले तकरीबन दो सौ सालों से शिलौंग की पंजाबी लेन में बसे दलित सिखों का यहां गुरुद्वारा है. गुरुनानक प्राथमिक विद्यालय है. शिव मंदिर और चर्च है. इनमें से कई सिख लोगों ने खासी समुदाय की महिलाओं से शादी भी की हुई है.
पंजाबी लेन में रहने वाले सनी सिंह कहते है, "हमें खासी समुदाय के लोगों से कोई परेशानी नहीं है. लेकिन कुछ लोगों का मकसद हमें यहां से हटाकर मार्केट बनाने का है. वहीं लोग इस पूरे विवाद को हवा दे रहें है."
सनी की जानकारी के अनुसार ऐसे सात-आठ सिख परिवार है, जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है. वो इसका मूल कारण नहीं बताते. आमतौर पर देश के अन्य राज्यों में दलित सिखों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला हुआ है. लेकिन मेघालय में दलित सिखों को एसटी का कोई दर्जा नहीं है.
सनी कहते है, "हमारे पास एसटी का प्रमाण पत्र है लेकिन यहां की सरकार इसे नहीं मानती. हमारे पूर्वजों को मेघालय में बसे दो सौ वर्ष से ज्यादा हो गए लेकिन वो (खासी) अब भी हमें बाहरी ही मानते है".
शिलौंग में यूएनएन नामक केबल टीवी न्यूज चलाने वाले स्थानीय पत्रकार दीपक वर्मा भी इस पूरे विवाद के इतना बढ़ने के पीछे राजनीतिक कारण मानते हैं.
वो कहते है, "मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों समेत सभी पक्षों के साथ बैठक कर शहर में शांति बहाल करने की अपील की और सभी लोग सहमत भी हुए. लेकिन फिर भी तनाव बना हुआ है. कुछ लोग अपने फ़ायदे के लिए ऐसा कर रहे हैं."
दीपक कहते हैं, "शिलौंग में दूर-दूर से पर्यटक आते हैं, लेकिन इस हिंसा की वजह से यहां का पर्यटन उद्योग काफी प्रभावित हुआ है. इससे लोकल लोगों को ही नुकसान हो रहा है. ये सभी लोग शांति के पक्ष में है."
खासी संगठनों के विरोध पर वर्मा कहते है, "वे लोग सिख समुदाय के लोगों को तत्काल हटाने की मांग कर रहें है, लेकिन ये इतना आसान भी नहीं है. उस ज़मीन को लेकर कुछ विवाद अदालत में भी है."
"सिख लोगों से इनकी नारजगी की कई वजह है. कुछ संगठनो का आरोप है कि पंजाबी लेन में कई ग़ैर कानूनी काम होते है. इसके अलावा वो इलाका काफी संकरा है जिससे स्थानीय लोगों को कई तरह की दिक्कतें है".
पर्यटकों की मुश्किल
शिलौंग हमेशा से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां हिंसा और तनाव को देखते हुए यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी कमी आई है. यहां तमाम होटलों की बुकिंग तकरीबन रद्द हो गई है.
ज़िला प्रशासन के एक अधिकारी के अनुसार शिलॉन्ग में फंसे पर्यटकों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन ठोस उपाय कर रहा है.
शिलौंग पहुंचने के लिए गुवाहाटी से ही टैक्सी पकड़नी पड़ती है लेकिन पिछले हफ्ते से जारी हिंसा में कथित तौर पर कुछ टैक्सी वालों पर हुए हमलों के बाद टैक्सी ड्राइवरों के संगठनों ने सोमवार से बेमियादी हड़ताल कर दी है. ऐसे में पर्यटकों के लिए शिलौंग से निकलना और मुश्किल हो गया है.
इस बीच, कांग्रेस नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने शिलौंग में उत्पन्न इन हालात के लिए मौजूदा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर कहा कि राज्य की वर्तमान सरकार स्थिति से निपटने में पूरी तरह विफल रही है.
मेघालय में नेशनल पीप्लस पार्टी (एनपीपी) बीजेपी और अन्य सहयोगी दलो की मदद से सरकार चला रही है जबकि कांग्रेस 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. 60 सीटों वाले मेघालय विधानसभा में एनपीपी के पास केवल 19 विधायक है.
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