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कर्नाटक का फ़ैसला आज: इन पांच तरीक़ों से सरकार बचा सकती है बीजेपी
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
कर्नाटक विधानसभा में आज शाम चार बजे यानी शनिवार को मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को बहुमत साबित करना है.
15 मई को आए चुनानी नतीजे में बीजेपी को कुल 222 सीटों पर हुए चुनाव में 104 सीटें ही मिली थीं. राज्यपाल वजूभाई वाला ने साधारण बहुमत से 8 सीटें कम होने के बावजूद बीजेपी के येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री की शपथ दिला दी थी.
इससे पहले राज्यपाल ने येदियुरप्पा को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिनों का वक़्त दिया था, लेकिन कांग्रेस ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और शुक्रवार को अदालत ने कहा कि 19 मई को शाम चार बजे ही बहुमत साबित करना होगा.
कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तस्वीर चुनावी नतीजे के दिन स्पष्ट होने में जितना समय लगा था उसकी तुलना में आज शक्ति परीक्षण के बाद की वह तस्वीर कि येदियुरप्पा सरकार रहेगी या जाएगी, साफ़ होने में ज़्यादा वक़्त लग सकता है.
प्रो-टेम स्पीकर की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
आज यानी 19 मई को सुप्रीम कोर्ट दिन में सुबह 10:30 बजे विधानसभा में नव-नियुक्त प्रो-टेम स्पीकर की वैधता पर सुनवाई करने वाला है.
राज्यपाल ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष केजी बोपैया को प्रो-टेम स्पीकर बनाया है और कांग्रेस-जेडीएस (जनता दल सेक्युलर) ने इस नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति पर विवाद यह है कि अब तक की पंरपरा के अनुसार सबसे लंबे समय तक विधायक रहे व्यक्ति को यह पद दिया जाता था. लेकिन राज्यपाल वजूभाई वाला ने केजी बोपैया को प्रो-टेम स्पीकर बनाया जो महज चार बार ही विधायक चुने गए हैं जबकि सदन में ऐसे विधायक भी हैं जो आठ बार से विधायक चुने जा रहे हैं, लेकिन उनकी उपेक्षा की गई.
अगर प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट मुहर नहीं लगाता है तो कि किसी अन्य विधायक को इस पद की शपथ दिलाई जाएगी. इसके बाद नया प्रो-टेम स्पीकर सभी विधायकों को विधानसभा में शपथ दिलाएगा और इसके बाद सदन विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव करेगा. इसके बाद ही बहुमत हासिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी.
पर इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि सबसे बड़े दल के रूप में बीजेपी येदियुरप्पा की मुख्यमंत्री की कुर्सी कैसे बचा पाएगी जबकि उसके पास बहुमत से आठ विधायक कम हैं.
दूसरी तरफ़ कांग्रेस के 78 और जेडीएस के 37 विधायक हैं (जेडीएस के साथ बीएसपी के एक विधायक भी हैं) और इन्हें मिलाकर 116 विधायक हो रहे हैं. मतलब इस गठबंधन के पास साधारण बहुमत से तीन विधायक ज़्यादा हैं.
इसके साथ ही दो निर्दलीय विधायक हैं. 224 सीटों वाली विधानसभा में 222 सीटों पर ही मतदान हुए थे और दो सीटों पर अभी चुनाव बाकी है.
बीजेपी को सरकर बचाने के लिए ये पांच रास्ते
1. अगर बीजेपी 15 विधायकों को बहुमत परीक्षण के दौरान विधनसभा से ग़ैरमौजूद रखने में कामयाब रहती है तो इससे सदन में मौजूद विधायकों की कुल संख्या 208 हो जाएगी.
बीजेपी के पास 104 विधायक हैं और सदन में मौजूद कुल विधायकों के हिसाब से साधारण बहुमत के लिए ये पर्याप्त विधायक हैं. बीजेपी इस तरीक़े से अपनी सरकार गिरने से बचा सकती है.
2. अगर जेडीएस या कांग्रेस के 15 विधायक अपनी पार्टी के व्हिप की अवहेलना कर बीएस येदियुरप्पा का समर्थन कर दें या फिर सदन से ये इस्तीफ़ा दे दें तो बीजेपी की सरकार बच जाएगी. दोनों मामलों में इन विधायकों के अपनी विधायकी से हाथ धोना पड़ेगा.
3. विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान कुछ विधायक हंगामा खड़ा कर दें और उन विधायकों को अध्यक्ष सदन से बाहर करने का आदेश दें तो इससे सदन में मौजूद विधायकों की कुल संख्या कम हो जाएगी. इससे भी बीजेपी की येदियुरप्पा सरकार बच सकती है.
4. कांग्रेस में एक दर्जन से ज़्यादा लिंगायत विधायक हैं. लिंगायत मठाधीशों की तरफ़ से अपील की जा सकती है कि येदियुरप्पा लिंगायत हैं और शक्ति परीक्षण में लिंगायत विधायक उनका साथ दें. यह तर्क दिया जा सकता है कि कांग्रेस पहले से ही वीरशैव समुदाय के ज़रिए लिंगायतों की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही थी.
5. बीजेपी कोशिश कर रही है कि बहुमत हासिल करने के दौरान गोपनीय बैलेट का इस्तेमाल किया जाए जिससे विधायकों की पहचान ज़ाहिर नहीं हो. येदियुरप्पा की सीएम कुर्सी इससे भी बच सकती है.
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