प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ राष्ट्रपति को मनमोहन सिंह का शिकायती ख़त

नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह

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"कांग्रेस के नेता कान खोलकर सुन लीजिए. अगर सीमाओं को पार करोगे तो ये मोदी है. लेने के देने पड़ जाएंगे..."

कर्नाटक के हुबली में 6 मई को दिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस भाषण को लेकर कांग्रेस ने उनपर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.

इस सिलसिले में कांग्रेस की तरफ़ से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक चिट्ठी लिखकर मोदी के ख़िलाफ़ कड़े लफ़्ज़ों में शिकायत की है.

कांग्रेस का कहना है कि मोदी प्रधानमंत्री पद की मर्यादा लांघ रहे हैं. कांग्रेस की इस चिट्ठी में मनमोहन सिंह के अलावा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी दस्तख़त हैं.

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कांग्रेस की चिट्ठी की सात ख़ास बातें

  • भारत के प्रधानमंत्री को भारत के संविधान के तहत एक विशेष स्थान हासिल है. वे संघीय कैबिनेट का नेतृत्व करते हैं. संघ की कार्यपालिका उन्हें रिपोर्ट करती है और उनसे आदेश लेती है.
  • प्रधानमंत्री के दफ़्तर का कार्यभार संभालते समय वे इस पद की शपथ लेते हैं. अतीत में सभी प्रधानमंत्रियों सार्वजनिक या निजी कामकाज में इसकी मर्यादा बनाए रखी है.
  • इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती कि हमारी लोकतांत्रिक राजव्यवस्था में एक प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख के तौर पर धमकाने और उकसाने वाले शब्दों का इस्तेमाल करेंगे, प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं को सार्वजनिक रूप से चेतावनी देने वाले होंगे.
  • कांग्रेस नेतृत्व को दी गई प्रधानमंत्री की धमकी निंदनीय है. 1.3 अरब की आबादी वाले किसी संविधानिक और लोकतांत्रिक सरकार वाले देश में ये प्रधानमंत्री की भाषा नहीं हो सकती है. ऐसी भाषा चाहे वो सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल की जाए या फिर निजी रूप से, ऐसा बर्ताव स्वीकार किए जाने लायक नहीं है.
कार्टून
  • जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, वे धमकाने और उकसाने वाले हैं. इसका मक़सद अपमानित करना और माहौल ख़राब करने के लिए उकसाना है.
  • कांग्रेस इस देश की सबसे पुरानी पार्टी है और उसने कई चुनौतियों का सामना किया है. कांग्रेस नेतृत्व ने ऐसी चुनौतियों और ख़तरों का सामना करने में हमेशा ही साहस और निडरता दिखलाई है. हम ये कहना चाहते हैं कि न तो हमारी पार्टी और न ही हमारे नेता ऐसी धमकियों के सामने झुकेंगे.
  • भारत संघ के प्रमुख की हैसियत से भारत के राष्ट्रपति की ये बड़ी जिम्मेदारी बनती है वे प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट को सलाह और मार्गदर्शन दें. बता दें कि चुनाव प्रचार में ही सही प्रधानमंत्री से ऐसी धमकी भरी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती है.

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