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कश्मीर: 'पत्थरबाज़ों' ने स्कूली बस को भी नहीं छोड़ा
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत प्रशासित कश्मीर में बुधवार को दक्षिणी कश्मीर के शोपियां ज़िले में छात्रों से भरी एक स्कूली बस पर पथराव किया गया. पथराव की इस घटना में दो स्कूली छात्र घायल हो गए.
श्रीनगर से क़रीब 60 किलोमीटर दूर शोपियां के जावूरा गांव के क़रीब रेनबो इंटरनेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की बस पर कुछ पत्थरबाज़ों ने कथित तौर पर पथराव किया.
शोपियां में बुधवार को चरमपंथी कमांडर समर टाइगर की मुठभेड़ में मौत को लेकर ज़िले भर में हड़ताल थी.
घायल में से एक छात्र रेहान को श्रीनगर के श्री महाराजा हरी सिंह अस्पताल में दाखिल किया गया. घायल छात्र के सिर और हाथ में चोट लगी है.
रेहान ने बताया,"मैं उस समय बस की बीच वाली सीट पर बैठा था, जब मुझे पत्थर लगा."
रेहान के पिता नूरुद्दीन नूरानी गोरसी ने बीबीसी से कहा, "मेरा बेटा सुबह साढ़े आठ बजे स्कूल बस में बैठा था. जब पथरबाज़ों ने बस पर पथराव किया तो बच्चे भी घायल हो गए, लेकिन मेरा बच्चा कुछ ज़्यादा ही ज़ख़्मी हो गया."
रेहान के पिता आगे कहते हैं," एक पिता होने के नाते में पथरबाज़ों से गुज़ारिश करूंगा कि आप भी हमारे बच्चे हो, सब बच्चे एक जैसे हैं और स्कूल बस पर पथराव नहीं करना चाहिए ."
ये पूछे जाने पर कि इस तरह की घटनाओं से समाज पर क्या असर पड़ेगा वो कहते हैं," इससे दूरियां भी पैदा होंगी, शिक्षा पर भी असर पड़ेगा. लोग अनपढ़, जाहिल रहेंगे. यही सबसे बड़ी गुलामी है."
राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि 'दोषियों को क़ानून का सामना करना होगा. शोपियां में स्कूल बस पर पथराव की घटना की ख़बर सुनने से मुझे सदमा पहुंचा है. इस बददिमाग़ और वहशियाना हरकत को अंजाम देने वालों को सज़ा मिलेगी.'
घटना की निंदा
इस घटना के फ़ौरन बाद कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों से लेकर अलगावादियों ने भी इस घटना की निंदा की है.
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के गिलानी गुट के चेयरमैन सैय्यद अली शाह गिलानी ने स्कूल बस पर पत्थर मारने पर अफ़सोस जताया है.
गिलानी ने प्रेस को जारी बयान में कहा है कि 'हमारी ताकत अनुशासन में है.'
उन्होंने कहा,"हमें ऐसे लोगों पर कड़ी नज़र रखनी होगी जो इस तरह की घटनाओं में शामिल हैं. साथ ही विरोध प्रदर्शनों में हमें पुख़्ता सोच और अनुशासन दर्शाना होगा."
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्विटर पर लिखा, "पत्थरबाज़ों को माफ़ी देने का मतलब ये था एक अच्छी नीयत से उनकी हौसला अफ़ज़ाई करना. लेकिन कुछ गुंडा तत्व इस बात पर तुले हैं कि जो मौका उनको दिया गया था वह उसका ग़लत फ़ायदा उठाकर और पत्थर मार सकें."
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मीरवाइज़ गुट के चेयरमैन मौलवी उमर फ़ारूक़ ने कहा है कि स्कूल बस पर पथराव करना चिंताजनक है. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि 'कोई भी ये समझ नहीं पा रहा है कि छात्रों से भरी बस को क्यों निशाना बनाया गया? जो भी इस तरह कि गतिविधियों में शामिल हैं उनको ये समझ लेना चाहिए कि इससे हमारे आंदोलन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और ये मौका दिया जा रहा है कि वह इस तहरीक को बदनाम करें.'
मीरवाइज़ ने एक और ट्वीट में लिखा, 'ये हर कश्मीरी की ज़िम्मेदारी बनती है कि जो लोगों का आंदोलन चल रहा है और जिसके लिए कई क़ुर्बानियां दी जा रही हैं, उसे बचाया जाए और ऐसा कुछ नहीं किया जाए जिससे इसे नुकसान पहुंचे.'
'अलगाववादियों की अब कोई सुनता नहीं है'
वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख एसपी वैद ने भी कहा है कि स्कूल बस पर पत्थर मारना सरासर पागलपन है और इन अपराधियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी.
वहीं शोपियां के एसपी शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि 'इस मामले में पुलिस की टीम को पत्थरबाज़ों के पीछे लगाया जाएगा और बहुत जल्द उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा.'
कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कश्मीर एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहां हालात अब अलगावादी नेताओं के काबू से बाहर हो रहे हैं.
कश्मीर के शिक्षा मंत्री ज़ुल्फ़िकार अली ने कहा, "हम तो सिर्फ़ निंदा ही कर सकते हैं, भविष्य में ऐसा नहीं होना चाहिए और छात्रों को ऐसी स्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए कि वे ख़ुद को असुरक्षित महसूस करें. कश्मीरी समाज में सबसे ज़्यादा प्रभावित बच्चे और उनकी शिक्षा हुई है."
कश्मीर में सभी वर्ग के नेताओं की स्कूल बस पर हमले की निंदा पर रेहान के पिता कहते हैं," गिलानी, महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्लाह ने इंसानियत के तौर पर इस तरह का बयान दिया, लेकिन इन बच्चों को सुरक्षा दी जाए, नहीं तो बच्चे डर जाएंगे. आप स्कूल वालों से पूछ सकते हैं कि मेरा बच्चा कितना ज़हीन है. मेरा बच्चा क़रीब पंद्रह किलोमीटर की दूरी तय कर के पढ़ने जाता है."
वरिष्ठ पत्रकार ताहिर मोहिउद्दीन कहते हैं, " जो घटना है वह बहुत दुखद है. ऐसा लग रहा है कि अब कश्मीर में अलगाववादियों की बात कोई सुनता नहीं है. जिसका जो जी चाहता है, वह करता है. हक़ीक़त ये है कि जो ये पत्थरबाज़ी होती है उसमें छोटे-छोटे बच्चे शामिल होते हैं. उनको पता नहीं होता है कि वो क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं.''
"अब अगर हम अलगाववादियों की बात करें तो ये हालात उनके काबू से बाहर हैं. अब तो दूसरे क़िस्म का ही कट्टरपंथ शुरू हो गया है. मुझे लगता है कि अब हमारे हुर्रियत और दूसरे नेताओं का अब इस पर बस नहीं है. मुझे ये भी महसूस होता है कि हुर्रियत और समाज के जो दूसरे तबके हैं उनको भी इस गम्भीर स्थिति पर सोचना चाहिए कि कश्मीर किस तरफ़ जा रहा है. ज़ुबानी तौर पर तो सब इसकी निंदा कर रहे हैं, लेकिन ज़रूरत इस बात की है कि सब ये सोचों कि इस पर काबू कैसे पाया जाए."