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गोरखपुर में बच्चों की मौत: आठ महीने बाद डॉ. कफ़ील को मिली ज़मानत
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई दर्जनों बच्चों की मौत के मामले में गिरफ़्तार डॉक्टर कफ़ील ख़ान को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बुधवार को ज़मानत मिल गई.
कफ़ील अहमद के वकील सदाफ़ुल इस्लाम जाफ़री ने बीबीसी को बताया कि जस्टिस यशवंत वर्मा की एकल पीठ ने डॉक्टर कफ़ील की ज़मानत याचिका मंज़ूर की.
ये हादसा पिछले साल अगस्त में हुआ था जब बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में महज़ दो दिन में दर्जनों बच्चों की मौत हो गई.
दावा किया जा रहा था कि ये मौतें अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुईं, लेकिन योगी सरकार ने इस बात से इनकार कर दिया था.
घटना के कुछ ही दिन बाद उस अस्पताल में नवजात शिशु विभाग में वॉर्ड सुपरिंटेंडेंट के तौर पर काम करने वाले डॉक्टर कफ़ील को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
उन्हें राजधानी लखनऊ में इस मामले की जांच के लिए बनाए गए स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने दो सितंबर को पकड़ा.
कफ़ील ने जेल से 10 पेज का ख़त लिखा
कफ़ील ख़ान के परिवार ने उनकी ज़मानत को लेकर पिछले आठ महीनों में छह बार याचिकाएं दी थीं लेकिन निचली अदालत से ज़मानत याचिकाएं नामंज़ूर होती रहीं.
वकील सदाफ़ुल जाफ़री ने बताया कि इसके बाद परिवार ने हाई कोर्ट में अपील की.
क़रीब एक हफ़्ते पहले कफ़ील ने गोरखपुर जेल से 10 पन्नों की एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वे निर्दोष हैं और उन्हें बड़े स्तर पर हुई प्रशासनिक नाकामी की वजह से निशाना बनाया जा रहा है.
दिल के मरीज़ हैं डॉक्टर कफ़ील
यह चिट्ठी पिछले हफ़्ते उनकी पत्नी डॉक्टर शबिस्ता ख़ान ने मीडिया के सामने पढ़ी थी.
उन्होंने आरोप लगाया था कि जेल प्रशासन उनके पति को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं मुहैया नहीं करा रहा है जबकि डॉक्टर कफ़ील दिल के मरीज हैं.
उन्होंने आशंका ज़ाहिर की थी कि जेल में उनके पति की जान को ख़तरा भी हो सकता है.
इस मामले में लापरवाही के इल्ज़ाम में डॉक्टर कफ़ील समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
एक अन्य अभियुक्त और अस्पताल में ऑक्सीजन गैस सप्लाई करने वाले मनीष भंडारी को भी पिछले दिनों ज़मानत मिल चुकी है.
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