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गोरखपुर त्रासदी: बच्चों की मौत के मामले में अब तक क्या हुआ
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को कथित तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाने से 30 से भी ज़्यादा बच्चों के मौत हो गई.
1. गोरखपुर के डीएम रौतेला ने मीडिया से कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली एजेंसी ने क़रीब 70 लाख रुपये बकाया होने के कारण सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी, बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने इसकी जानकारी किसी को नहीं उपलब्ध कराई.
2. हालांकि इस अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला 7 अगस्त को ही शुरू हो गया था. अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक 7 अगस्त को नौ, 8 अगस्त को 12, 9 अगस्त को 9, 10 अगस्त को 23 और 11 अगस्त को 7 नवजातों की मौत हो गई थी.
3. प्रदेश सरकार का कहना है कि सभी मौतें ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से नहीं हुई हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ मौतें एईएस, इनफेक्शन और कुछ मौतें इसलिए हुईं क्योंकि बच्चे कमज़ोर पैदा हुए थे. जबकि एक बच्चे का लीवर फेल हो गया था.'
4. अस्पताल के एक दूसरे डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि नवजात शिशुओं और इंसेफ़ेलाइटिस के इन वॉर्डों में सामान्य तौर पर 8-10 बच्चों की मौत हर रोज़ होती है.
5. मुख्यमंत्री ने गैस सिलेंडर सप्लायर की भूमिका की जांच के लिए मुख्य सचिव की अगुवाई में जांच समिति बनाई गई है जो हफ़्ते भर में रिपोर्ट देगी. इस सप्लायर को पिछली सरकार ने 2014 में उन्हें आठ वर्ष के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया है.'
6. हालांकि मरने वाले बच्चों की संख्या को लेकर अब भी पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. सरकारी विभागों के आंकड़ों में भी एकरूपता नहीं है. बच्चों के परिजनों का कहना है कि सरकार के दावों के उलट यह संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है.
7. शुक्रवार को ज़िलाधिकारी की ओर से 30 बच्चों के मरने की ख़बर आई तो सीएमओ की ओर से 21 की. इसके बाद शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने 23 बच्चों के मौत की बात कही.
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