उन्नाव बलात्कार केस: बीजेपी विधायक के ख़िलाफ़ केस दर्ज, गिरफ़्तारी से यूपी पुलिस ने झाड़ा पल्ला

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक नाबालिग लड़की के रेप के अभियुक्त, भारतीय जनता पार्टी के नेता कुलदीप सिंह सेंगर को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ़्तार करने से अपना पल्ला झाड़ लिया है.
आईपीसी की 363, 366, 376 और 506 धारा के तहत मुक़दमा दर्ज होने और चूंकि पीड़िता नाबालिग है इसलिए पॉक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन फ़्रॉम सेक्सुअल ऑफ़ेंसेस एक्ट, 2012) के तहत ये केस दर्ज किए जाने के बाद माना जा रहा था कि विधायक कुलदीप सेंगर को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.

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लेकिन गुरुवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार और पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके ये जानकारी दी कि ये मामला अब सीबीआई को सौंप दिया गया है. इसलिए कुलदीप सेंगर की गिरफ़्तारी का फ़ैसला अब सीबीआई ही करेगी.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दोनों अधिकारियों ने कहा, "विधायक कुलदीप सिंह सेंगर अभी दोषी नहीं हैं. आरोपों के आधार पर उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है. इस मामले को सीबीआई को सौंपा गया है. इसलिए अब विधायक जी की गिरफ़्तारी के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. और यही प्रचलित प्रक्रिया है."
पॉक्सो एक्ट के बावजूद गिरफ़्तारी नहीं?
पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा कि सीबीआई अब इस मामले में साक्ष्य जुटाने का काम करेगी. इस दौरान पीड़िता के परिवार के लिए हमने सुरक्षा मुहैया कराई है.

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लेकिन जब प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पत्रकारों ने उनसे पूछा कि पॉक्सो एक्ट में पीड़िता के बयान के बाद अभियुक्त को गिरफ़्तार करने का प्रावधान है, तो क्या इस मामले को अलग तरह से ट्रीट किया जा रहा है? वो कैसे आज़ाद घूम सकते हैं?
इसके जवाब में ओपी सिंह ने कहा, "17 अगस्त, 2017 को जब पहली बार इस मामले की शिक़ायत की गई थी तो उसमें विधायक जी का नाम नहीं था. अभी भी वो अभियुक्त हैं. तो आप लोग बताएं कि उन्हें किस आधार पर रोका जा सकता है?"

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इससे पहले लखनऊ ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक राजीव कृष्ण ने इस मामले में एसआईटी की रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी. डीआईजी (जेल) लव कुमार ने इस मामले में जेल प्रशासन की भूमिका पर एक अलग जाँच रिपोर्ट भी पेश की है. वहीं उन्नाव के ज़िला अस्पताल से क्या-क्या ग़लतियां हुईं, इसपर उन्नाव के डीएम से रिपोर्ट ली गई है.

सरकार ने इन रिपोर्टों और सिफ़ारिशों पर विचार करने के बाद जो निर्णय लिए:
- विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य लोगों पर लगे बलात्कार के आरोपों की उचित धाराओं में एफ़आईआर दर्ज होगी.
- बलात्कार के आरोपों की जाँच सीबीआई को सौंपने का फ़ैसला किया गया है. साथ ही 3 अप्रैल को हुई पीड़िता के पिता की मौत की भी जाँच सीबीआई से कराई जाएगी.
- डॉक्टर डीके द्विवेदी और प्रशांत उपाध्याय को उपचार में लापरवाही बरतने के लिए निलंबित कर दिया गया है. साथ ही तीन अन्य डॉक्टरों के ख़िलाफ़ अनुशासनिक कार्यवाही शुरू की गई है.
- पीड़िता की शिक़ायतों को दरकिनार करने और उनपर लापरवाही बरतने के लिए शफ़ीपुर के सीओ कुँवर बहादुर सिंह को भी निलंबित कर दिया गया है.
- कहा गया है कि पीड़िता का परिवार उन्नाव में रहे या अपने गाँव में, उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जायेगी.

इससे पहले कुलदीप सिंह सेंगर बुधवार देर शाम नाटकीय रूप से सामने आए थे और उन्होंने कहा था, "मैं भगोड़ा नहीं हूँ. पुलिस जब बुलाएगी, हम हाज़िर हो जाएंगे."

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रात के क़रीब 11 बजे कुलदीप सिंह सेंगर लखनऊ के एसएसपी से मुलाक़ात करने उनके आवास पहुंचे.
उस वक़्त तक अटकलें लगाई जा रही थीं कि वो पुलिस के सामने सरेंडर करने पहुंचे हैं.
लेकिन फिर ये बात सामने आई कि वो सरेंडर करने नहीं, बल्कि पुलिस को ये बताने के लिए उपस्थित हुए हैं कि वो कोई भगोड़ा नहीं हैं.
जिस समय विधायक सेंगर एसएसपी आवास पहुंचे, उस समय वो वहाँ मौजूद नहीं थे. थोड़ी देर एसएसपी आवास में रुकने के बाद सेंगर अपने समर्थकों के साथ वापस लौट गए.

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एसएसपी आवास से निकलते वक़्त कुलदीप सेंगर ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मैं भाजपा कार्यकर्ता हूँ. पार्टी का जो आदेश होगा उसका पालन करूंगा. मेरे ऊपर लगे सभी आरोप निराधार और झूठे हैं. चाहें तो मामले की जाँच सीबीआई से करवा लें."
क्या हैं आरोप?
कुलदीप सेंगर पर एक नाब़ालिग लड़की के साथ कथित तौर पर जून 2017 में बलात्कार करने का आरोप है.
इस मामले में पिछले साल पीड़ित लड़की की एफ़आईआर पुलिस ने नहीं लिखी थी जिसके बाद लड़की के परिवार वालों ने कोर्ट का सहारा लिया.
पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसके बाद से विधायक के परिजन उन पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं.
वहीं लड़की का कहना है कि न्याय के लिए वह उन्नाव पुलिस के हर अधिकारी के पास गईं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई.
उनका आरोप है कि विधायक और उनके साथी पुलिस में शिक़ायत नहीं करने का दबाव बनाते रहे हैं और इसी क्रम में विधायक के भाई ने तीन अप्रैल को उनके पिता से मारपीट भी की. इसके बाद हिरासत में लड़की के पिता की मौत हो गई.

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चार लोगों की गिरफ़्तारी
पुलिस की इसी कथित निष्क्रियता और विधायक की कथित दबंगई से त्रस्त होकर पीड़ित लड़की ने सीएम आवास के बाहर मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया, इस घटना के बाद ये मामला सुर्खियों में आ गया.
इस मामले में सीबीआई जाँच कराने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी पुलिस हिरासत में पीड़ित लड़की के पिता की मौत का स्वत: संज्ञान लिया है.
कोर्ट ने 12 अप्रैल को सुनवाई की तारीख़ तय की है और इस मामले में एक एमिकस क्यूरी (कोर्ट का सहयोगी) को भी नियुक्त किया है.
मामले में चार लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

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सीएम का बयान
इससे पहले मुख्यमंत्री ने कहा था कि मामले में किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा.
इस बीच माखी थाने के थानाध्यक्ष को सोमवार को निलंबित कर दिया गया था. मंगलवार को तुरंत चार्ज संभालने वाले थानाध्यक्ष राकेश सिंह ने बताया कि पीड़ित लड़की के मृत पिता के ख़िलाफ़ 29 केस और उसके चाचा के ख़िलाफ़ 14 मामले दर्ज हैं.
वहीं विधायक के भाई अतुल सिंह के ख़िलाफ़ भी 3 केस दर्ज हैं.












