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ब्लॉग: इन तीन लोगों का ज़िक्र होगा मोदी के 'मन की बात' में?
- Author, राजेश जोशी
- पदनाम, रेडियो एडिटर, बीबीसी हिंदी
यशपाल सक्सेना के बेटे अंकित सक्सेना का पश्चिमी दिल्ली के रघुबीर नगर में इसी साल फ़रवरी में दिन दहाड़े क़त्ल कर दिया गया क्योंकि वो एक मुसलमान लड़की से मोहब्बत करता था और लड़की के परिवार वालों को ये गवारा नहीं था.
एक मुसलमान परिवार पर हिंदू युवक की हत्या का मुद्दा हिंदुत्ववादियों के लिए एक पके हुए फल जैसा था जिसे हाथ बढ़ाकर तोड़ा जा सकता था.
पर यशपाल सक्सेना ने इस हत्या को हिंदू-मुसलमान का सवाल बनाना चाह रहे लोगों को सख़्ती से कह दिया कि मेरे बेटे की हत्या को सांप्रदायिक उन्माद फैलाने का बहाना न बनाया जाए.
मौलाना इमदादुल रशीदी के 14 साल के बेटे सिब्तुल्लाह रशीदी को रामनवमी के दौरान आसनसोल में दंगाइयों की भीड़ ने खींच लिया और दो दिन बाद उसकी लाश बरामद की गई.
सिब्तुल्लाह की हत्या से क्रोधित मुसलमान नौजवानों से मौलाना रशीदी ने साफ़ साफ़ कह दिया कि अगर किसी ने उनके बेटे की हत्या का बदला लेने की कोशिश की तो वो शहर छोड़कर चले जाएंगे. मौलाना पिछले 30 बरस से आसनसोल की एक मस्जिद में इमाम हैं.
इमरोज़ ख़ान बिहार के औरंगाबाद ज़िले में एक शो रूम चलाते थे जिसमें काम करने वाले 22 में से 18 कर्मचारी हिंदू थे और चार मुसलमान. पिछले हफ़्ते रामनवमी के दौरान मुसलमानों के बिज़नेस को निशाना बनाने वाली दंगाइयों की भीड़ ने इमरोज़ ख़ान के शो रूम को ख़ाक कर दिया.
इमरोज़ ने बीबीसी हिंदी के संवाददाता रजनीश कुमार को बताया, "हिंदुओं ने मुसलमानों को नहीं मारा है. कुछ लोगों ने अपने फ़ायदे के लिए ये सब किया है. हिंदुओं ने हमारे ससुर साहब के होण्डा शोरूम को बचाया है. हमारे साले साहब के होटल को हिंदुओं ने बचाया है."
हिंदुओं के रोज़गार की चिंता
इमरोज़ ख़ान औरंगाबाद के उन लोगों में से हैं जिनके बिज़नेस को रामनवमी के जुलूस के बहाने दंगाइयों ने निशाना बनाया. अब वो कहते हैं कि कुछ दिन बाद वो हिंदुस्तान छोड़कर सिंगापुर चले जाएंगे. उन्हें चिंता है कि उनके शोरूम में काम करने वाले 18 हिंदू परिवारों की रोज़ी रोटी का क्या होगा.
इमरोज़ ख़ान कहते हैं कि 'इस्लाम में टीका लगाने की मनाही है, पर हम इस्लाम की पाबंदी छोड़कर होली में टीका लगवाते थे, मंदिर में हिंदू भाइयों के साथ बैठते थे उन्हें अपने परिवार की तरह मानते थे. पर हमारे दोमंज़िले शोरूम को बलवाइयों ने इस तरह ख़ाक़ कर दिया कि दीवार-छत सब बरबाद हो गया. '
इसके बावजूद उनके दिल में साधारण हिंदुओं के लिए अब भी कोई कड़वाहट नहीं है.
कौन-सी असाधारण ताक़त
यशपाल सक्सेना, मौलाना इमदादुल रशीदी और इमरोज़ ख़ान हिंदुस्तान के उन सवा अरब साधारण लोगों में हैं जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर गर्व करते हैं. ये अपने नज़दीकी लोगों की हत्या किए जाने और अपनी जायदाद को ख़ाक कर दिए जाने के बावजूद हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी फैलाने वालों को ख़ारिज करते हैं.
ज़ाहिर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन तीन साधारण हिंदुस्तानियों पर गर्व होगा क्योंकि ये वही "मेरे सवा अरब भारतवासी" हैं जिनपर मोदी गर्व करते हैं.
पर इन तीनों के पास वो शक्ति कहाँ से आई जिसने इन्हें भावनाओं में बहकर बदले की आग में झुलसने से बचा लिया? वो कौन-सी असाधारण ताक़त इन साधारण लोगों के पास है जिसके सामने विधर्मियों का विनाश करने को आतुर दंगाइयों के हाथ की नंगी तलवारें, लंबे-लंबे छुरे, तीखे त्रिशूल और सब तर्क स्खलित हो जाते हैं?
शांति का संदेश
आसनसोल की मस्जिद के इमाम इमदादुल रशीदी ने बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टाशाली को बताया कि उनकी ये ताक़त अल्लाह से, इस्लाम से और इस्लाम के रसूल मुहम्मद साहब की शिक्षाओं से आई है.
उन्होंने कहा, "मैं पिछले तीस साल से इस मस्जिद का इमाम हूँ. मेरी ज़िम्मेदारी लोगों को शांति का संदेश देना है. मेरा बेटा चला गया पर मैं नहीं चाहता हूँ कि किसी और के साथ ऐसा हो."
इस इमाम के लिए शहर में अमन क़ायम रखना अपने किशोर बेटे की हत्या का ग़म मनाने से ज़्यादा ज़रूरी था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'मन की बात' में इस बात को सवा अरब देशवासियों के सामने रखना ही चाहिए.
बाबुल सुप्रियो से करें सवाल
दूसरी ओर उन्हें आसनसोल से ही अपनी पार्टी के सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो से पूछना चाहिए कि वोटरों की खाल खिंचवाने की धमकी देने का लाइसेंस उन्हें किस संविधान ने दिेया है?
उन्हें पूछना चाहिए कि जब रामनवमी जुलूसों के दौरान राज्य में कई जगहों पर सांप्रदायिक हिंसा हुई हो, भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष मेज़ पर रखे छुरे, तलवारों और गंडासों का निरीक्षण करते हुए क्या संदेश देना चाहते हैं और किसे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोज़ाना किसी न किसी मंच से इतनी बार अपनी बात कहते हैं कि फिर रेडियो पर उनके 'मन की बात' सुनने की गुंजाइश कम ही रह जाती है.
पर इस बार का प्रसारण मैं ज़रूर सुनूँगा. हो सकता है हिंदुस्तान की एकता बनाए रखने के लिए अपने ज़ख़्मों को भुला देने वाले इन तीन साधारण लोगों का ज़िक्र कर ही दें मोदी जी अपने 'मन की बात' में!
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