You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
प्रेस रिव्यू: 'कांग्रेस ने भी जोड़ा था आंबेडकर के नाम में रामजी'
दैनिक जागरण की ख़बर के मुताबिक़, संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर के नाम के बीच में रामजी 1991 में कांग्रेस की केंद्र सरकार के दौरान भी जोड़ा गया था.
उस वक्त जब राम मंदिर आंदोलन चरम पर था तब कांग्रेस की केंद्र सरकार की ओर से जारी एक डाक टिकट पर आंबेडकर का पूरा नाम डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर लिखा गया था.
गुरुवार को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वह डाक टिकट भी मीडिया के बीच प्रसारित किया.
मेदांता के खिलाफ़ शिकायत
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक पिछले साल 22 नवंबर को डेंगू के हाथों अपने 7 साल के बेटे को खो चुके पिता ने मेदांता अस्पताल के ख़िलाफ़ अपनी शिकायत वापस ले ली है.
गोपेंद्र परमार ने मेदांता अस्पताल पर 16 लाख रुपये का बिल वसूलने का आरोप लगाया था जिस पर मेडिकल बोर्ड जांच कर रहा था.
परमार ने बताया कि अस्पताल ने उन्हें पैसा वापस कर दिया है.
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के अतिरिक्त निजी सचिव ओ पी शर्मा ने मेदांता के डॉ नरेश त्रेहान को खत लिखकर परमार की मदद करने को कहा था.
परमार का कहना है, "मैंने पैसा इसलिए स्वीकार किया क्योंकि मैं गरीब हूं और मेरे पास कोर्ट में केस लड़ने के लिए संसाधन नहीं हैं. मैंने बेटे के इलाज के लिए घर गिरवी रखा था और मेरा एक और बच्चा है जिसकी चिंता मुझे करनी है."
मंत्री बाबुल सुप्रियो पर पुलिस ने किया मामला दर्ज
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो पश्चिम बंगाल के आसनसोल में फैले सांप्रदायिक तनाव को और बढ़ाते नज़र आए.
अपने खिलाफ़ नारे लगा रहे लोगों को उन्होंने धमकाया कि वे सबकी खाल उधेड़ देंगे.
आसनसोल बाबुल सुप्रियो का लोकसभा क्षेत्र भी है. आसनसोल में रामनवमी के मौके पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद सुप्रियो एक राहत कैंप में जा रहे थे जब पुलिस ने उन्हें रोक लिया.
इसके बाद उनकी पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई. पुलिस की ओर से उनके ख़िलाफ़ धारा 144 के उल्लंघन और पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है.
विदेश नहीं जा सकेंगे आपराधिक मामलों में फंसे नौकरशाह
दैनिक जागरण की ख़बर के मुताबिक आपराधिक या भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे सरकारी अधिकारियों को पासपोर्ट के लिए सतर्कता विभाग से मंज़ूरी नहीं दी जाएगी.
अगर किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों और जांच लंबित हो, प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हो, सरकारी निकाय ने मामला दर्ज किया हो या वह सस्पेंड हो तो पासपोर्ट को रोका जा सकता है.
कार्मिक मंत्रालय के तय किए गए नए दिशा निर्देशों में ऐसा कहा गया है.
संबंधित प्राधिकरण उस मामले में फ़ैसले ले सकते हैं जिसमें ऐसे अधिकारियों को मेडिकल इमरजेंसी जैसे कारणों से विदेश जाने की ज़रूरत हो.
फ़र्जी दस्तावेज़ों पर राष्ट्रपति भवन में नौकरी
अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा चूक का बड़ा मामला सामने आया है.
फ़र्ज़ी कागज़ात व डिग्री से 6 लोगों ने माली की नौकरी हासिल कर ली.
एक साल बाद इस बात का पता चल पाया है. फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.
राष्ट्रपति भवन में अंडर सेक्रेटरी रूबीना चौहान ने शिकायत में कहा कि फरवरी 2017 में बतौर माली 6 लोगों ने काम शुरू किया था.
भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन हुई थी. जांच के बाद कागज़ात फ़र्ज़ी निकले.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)