You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नज़रिया: ‘कचरा पेटी’ से मैक्रों को लुभाने का मोदी फॉर्मूला
- Author, अतुल भारद्वाज
- पदनाम, विदेश एवं रक्षा नीति विश्लेषक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में कार्यक्रमों के ज़रिए चर्चा में रहने को लेकर एक ग़ज़ब की भूख है. अगर वह राजनेता नहीं होते तो शायद बॉलीवुड में एक सफल स्टार ज़रूर होते.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क विभाग ने उनकी एक बेहद प्रसिद्ध तस्वीर प्रसारित की थी, जिसमें वह और अभिनेता अमिताभ बच्चन एक ही जैसी शॉल ओढ़े साथ खड़े हैं. यह पक्का है कि मोदी तस्वीर में 'बिग बी' से कम नहीं दिखना चाहते थे.
भारतीय प्रधानमंत्री न केवल ख़ुद की ओर लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं बल्कि वो निडर भी हैं. वह किसी कार्यक्रम को बड़ा करने का मौका नहीं छोड़ने देना चाहते हैं.
मोदी एक बड़े इवेंट मैनेंजर हैं जो कचरा-पेटी से भी ऐसे कार्यक्रमों को सूंघ लेते हैं.
मैक्रों के सम्मान में कचरा महोत्सव
हाल ही के 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ में देश का पहला 'कचरा महोत्सव' आयोजित करने की तारीफ़ की थी. यह महोत्सव कचरा प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों को दिखाने के लिए किया गया था.
मोदी इससे ख़ासा प्रभावित हुए और उन्होंने ऐसा ही कार्यक्रम फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और प्रथम महिला ब्रिजेट के सम्मान में अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित करने का फ़ैसला लिया है.
आख़िरी बार जब जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे भारत आए थे तो काशी में उनके लिए 45 मिनट लंबी गंगा आरती कराई गई थी.
मोदी अपना एक परिधान दोबारा पहनना पसंद नहीं करते हैं और न ही कोई कार्यक्रम दोबारा करना पसंद करते हैं. उन्होंने फ़्रांस के प्रथम परिवार के लिए एक बिल्कुल अलग कार्यक्रम आयोजित करने का फ़ैसला लिया है.
खाने और फ़ैशन से प्यार करने वाले पेरिस के इस दंपति को नाव से घाट दिखाए जाएंगे और फिर दोपहर में एक भव्य भोज का आयोजन होगा.
यह काफ़ी दिलचस्प है कि 2015 में फ़्रांस की यात्रा के दौरान पूर्व राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद ने मोदी को नाव के ज़रिए सीन नदी घुमाई थी.
हालांकि, इस बार फ़्रांस के साथ विवादित रफ़ाएल सौदा भी विवाद का विषय बना हुआ है.
विपक्ष ने आरोप लगाए हैं कि मोदी सरकार ने 36 रफ़ाएल लड़ाकू विमान मिस्र और क़तर से भी अधिक महंगे ख़रीदे हैं.
सत्तारूढ़ बीजेपी ने प्रधानमंत्री की ओर से किसी भी ग़लत काम के होने से इनक़ार किया है.
सैन्य बेस का इस्तेमाल
मैक्रों के दौरे से जुड़ा एक समझौता भी ख़ासा चर्चा में है. इस समझौते के तहत फ़्रांस के नौसैनिक पोत भारतीय तट पर ठीक हो सकेंगे और जा सकेंगे. साथ ही भारत अपने जहाज़ों के लिए फ़्रांस के हिंद महासागर में स्थित सैन्य बेसों का इस्तेमाल कर सकेगा.
इसके अलावा फ़्रांस रियूनियन द्वीप, अबुधाबी और जिबूती में अपनी सैन्य सुविधाओं पर भारत के युद्धपोतों के इस्तेमाल की अनुमति भी देगा.
फ़्रांस और भारतीय पक्ष की हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर एक-सी चिंताएं हैं और दोनों ही चाहते हैं कि यह कम हो.
अंतरिक्ष, नागरिक-परमाणु ऊर्जा और आतंकवाद के मोर्चे पर सहयोग के अलावा जलवायु परिवर्तन के इन योद्धाओं ने अक्षय ऊर्जा के स्रोतों के विकास पर काम करने का फ़ैसला भी किया है.
11 मार्च को फ़्रांस के राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए थे. यह एक भारतीय पहल है, जो दो साल पहले पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान शुरू हुई थी.
आईएसए का मक़सद 125 देशों और विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर तकनीक की लागत कम करना और 2030 तक सौर ऊर्जा स्थापित करने के लिए एक हज़ार अरब डॉलर से अधिक जुटाना है.
प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति मिर्ज़ापुर में सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन करेंगे.
कचरा महोत्सव की वजह चीन
चीनी ड्रेगन द्वारा हिंद महासागर में बढ़ता दख़ल ही चिंता की बात नहीं है. बल्कि वाराणसी में हो रहे कचरा महोत्सव की वजह भी चीन है. इसमें रिसाइकल किए गए कई उत्पाद दिखाए जाएंगे.
साथ ही इसमें कचरा की एक अनोखी वेंडिंग मशीन भी होगी, जिसका हाल में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उद्घाटन किया था.
कचरा प्रबंधन की और भारतीय बाज़ार का रुख़ चीन के कारण हुआ है, क्योंकि चीन ने जनवरी 2018 में घोषणा की थी कि वह 'विदेशी कचरे' को स्वीकार नहीं करेगा. चीन के इस फ़ैसले ने पश्चिमी देशों को चौंका दिया था.
कुछ समय पहले तक चीन दुनिया के आधे प्लास्टिक और काग़ज़ उत्पादों को रिसाइकल करता था.
पिछले साल चीन ने विश्व व्यापार संगठन को सूचित किया था कि वह बाहरी कचरे को अपने देश में स्वीकार नहीं करेगा.
तो अब क्या मोदी इसमें व्यापार का मौका सूंघ रहे हैं?
क्या वह फ्रांस के राष्ट्रपति को हमारी कचरा प्रबंधन की काबिलियत दिखाकर बताना चाहते हैं कि भारत पश्चिमी कचरे के लिए अद्भुत जगह है?
मोदी और उनकी टीम शायद कचरा पेटी को भरने के लिए उत्सुक है और चीन को पीछे छोड़ना चाहती है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)