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भारत फ्रांस के बीच हुए 14 समझौतों में सबसे अहम क्या है?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच लंबी बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और गोपनीय सूचनाओं के संरक्षण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.
फ्रांस के साथ रफ़ाएल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस के आरोपों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में जोर दिया कि दोनों देशों में द्विपक्षीय संबंधों को लेकर सभी दलों में सहमति है और फ्रांस के साथ संबंधों का ग्राफ सिर्फ ऊंचा ही उठता जाता है, चाहे सरकार किसी की भी हो.
रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष और उच्च प्रौद्योगिकी में भारत और फ्रांस के द्विपक्षीय सहयोग का इतिहास बहुत लम्बा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इस दौरान दोनों देशों के बीच 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. साथ ही शिक्षा, पर्यावरण, शहरी विकास और रेलवे के क्षेत्र में भी करार किए गए हैं.
इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और फ्रांस ने आतंकवाद और कट्टरता से निपटने के लिए मिलकर काम करने का फैसला किया है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग महत्वपूर्ण है.
कंधे से कंधा मिला कर चलेंगे भारत-फ्रांस
भारत और फ्रांस के बीच रिश्ते कितने अहम हैं इसका इसी से अंदाजा लग जाता है कि मोदी ने भी इसकी महत्ता पर फ्रांस से कंधे से कंधा मिला कर चलने की बात कही.
उन्होंने कहा, "आज वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए यदि कोई दो देश कंधे से कंधा मिला कर चल सकते हैं, तो वे भारत और फ्रांस हैं."
रक्षा के क्षेत्र में भारत और फ्रांस के संबंध बहुत घनिष्ठ हैं. भारत, फ्रांस को सबसे विश्वस्त रक्षा साझेदारों में एक मानता है. रक्षा उपकरणों और उत्पादन में दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं. रक्षा क्षेत्र में फ्रांस भारत की मेक इन इंडिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताता रहा है.
इन समझौतों में जो सबसे अहम है वो दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक दूसरे के लॉजिस्टिक के उपयोग में सहयोग देना.
हिन्द महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है. हिन्द महसागर क्षेत्र में चीन के प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के बीच यह समझौता बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बैलेंस ऑफ़ पावर के मद्देनज़र करार
भारत और फ्रांस ने अपनी पुरानी घनिष्ठता को नए सिरे से मज़बूत किया है तो इसकी वजह है इंडो पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताक़त. मोदी और मैक्रों ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा की.
बीबीसी ने इस पर विदेश मामलों के जानकार हर्ष पंत से बात की. उन्होंने कहा, "भारत की सैन्य ताक़त सीमित हैं. वो पश्चिम प्रशांत महासागर में नहीं जा सकती है तो भारत अगर अपनी सैन्य ताक़त की पहुंच बढ़ाना चाहता है तो उसे ऐसी सुविधा की ज़रूरत है."
वो कहते हैं, "फ्रांस की नौसेना कमजोर होती जा रही है लेकिन वो अभी हिंद महासागर में बहुत बड़ी शक्ति है क्योंकि उसके पास बड़ा इलाका है. अगर वो अपनी सीमित नौसेना की शक्ति को भारत को साझा करता है तो इसमें उसका भी फ़ायदा है. ऐसे समय में जब चीन की क्षमता बढ़ती जा रही है और अमरीका की सैन्य ताक़त पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है. भारत और फ्रांस जैसे छोटे देश बैलेंस ऑफ़ पावर में आ रहे परिवर्तन के मद्देनज़र करार कर रहे हैं."
भारत उभरती हुई वैश्विक शक्ति
दोनों देशों ने एक दूसरे के लिए अपने जहाज़ी अड्डों को खोलने का जो फैसला किया है.
हर्ष पंत कहते हैं, "हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए दोनों देशों के पास साथ आने के अलावा कोई और चारा नहीं है. फ्रांस से साथ एक तालमेल है जो पहले से चली आ रही है. दोनों देश रणनीतिक आज़ादी को बरकरार रखना चाहते हैं. फ्रांस के साथ अन्य देशों के मुकाबले भारत सुखद स्थिति में है. भारत ने अमरीका के साथ भी एक लेमोआ (लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ़ एग्रीमेंट) करार भी किया है. उसमें भी भारत और अमरीका एक दूसरे के साथ लॉजिस्टिक सुविधाएं साझा कर सकते हैं."
वो कहते हैं, "पश्चिमी देश भारत को इस क्षेत्र की एक उभरती हुई शक्ति के रूप में देख रहे हैं. वो भारत की शक्ति को अपने साथ मिलाकर एक स्थिर पॉवर ऑफ़ बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहे हैं. यह रणनीति कितनी कामयाब होगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा."
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जमीन से आसमान तक कोई ऐसा विषय नहीं है जिसमें भारत और फ्रांस साथ मिलकर काम ना कर रहें हो.
वहीं, साझा बयान जारी करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा क्षेत्र में भी मजबूत रिश्ते रहे हैं और हम उग्रवाद और आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ेंगे.
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