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ब्लॉग: क्यों साथ नहीं आएंगे कमल हासन और रजनीकांत?
- Author, थंगवेल अपाची
- पदनाम, संपादक, बीबीसी तमिल
अभिनेता कमल हासन ने बुधवार को मदुरै में अपनी पार्टी के नाम का एलान किया और पार्टी का झंडा पेश किया.
नई पार्टी का नाम है 'मक्कल नीति मय्यम' जिसका मतलब है जन न्याय केंद्र.
एक भव्य समारोह में कमल हासन जब अपने समर्थकों के सामने नई पार्टी का 'विज़न' पेश कर रहे थे, उस वक्त दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मंच पर मौजूद थे.
हालिया दिनों में कमल हासन और केजरीवाल की निकटता कई बार सामने आई है.
कमल के साथ रजनी, क्या मुमकिन है?
लेकिन, ठीक उसी वक्त कई राजनीतिक विश्लेषकों के दिमाग में ये सवाल भी था कि क्या सिनेमाई पर्दे से राजनीति की पगडंडी पर उतरने का एलान करने वाले एक और सुपरस्टार रजनीकांत की राहें कभी कमल हासन से मिल सकती हैं?
कमल हासन के प्रसंशक उन्हें 'उलगा नायगन' यानी 'दुनिया का हीरो' कहते हैं. वहीं रजनीकांत को उनके फ़ैन्स ने नाम दिया है 'थलाइवा' यानी बॉस या लीडर.
कमल हासन और रजनीकांत जोड़ी बनाकर राजनीति के मैदान में आएं तो तस्वीर बदल भी सकते हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन से तमिलनाडु की राजनीति में खालीपन आया है. पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि भी बढ़ती उम्र की वजह से सक्रिय नहीं हैं. बरसों से तमिलनाडु की राजनीति के इन दो प्रमुख चेहरों की जगह लेने के लिए फ़िलहाल कोई तैयार नहीं दिखता.
नहीं मिलेंगी राहें!
लेकिन कमल हासन और रजनीकांत का साथ आना आसान नहीं है.
दोनों अभिनेता कई दशकों से सक्रिय हैं, लेकिन इन्होंने साथ में इक्का-दुक्का फ़िल्में ही की हैं.
इनके राजनीति में साथ आने की कल्पना तो अच्छी है, लेकिन ये साथ आएंगे कैसे?
मुख्यमंत्री की कुर्सी कौन छोड़ना चाहेगा?
क्या कमल हासन के लिए रजनीकांत कुर्सी छोड़ेंगे? या फिर कमल छोड़ेंगे? ये सत्ता का मामला है. कोई किसी के लिए दावा नहीं छोड़ना चाहेगा.
राजनीति को लेकर इन्होंने जो नज़रिया पेश किया है, उसमें भी अंतर है.
कमल हासन का ज़ोर द्रविड़ राजनीति पर है. कमल हासन कहते हैं कि वो द्रविड़ विचारधारा के मुताबिक चलेंगे.
रजनी बनेंगे बीजेपी के साथी?
उधर, रजनीकांत का नजरिया अलग है. उनकी नीतियां अलग हैं. उनका रुझान दक्षिणपंथ और हिंदुत्व की तरफ है. रजनीकांत खुलकर कह चुके हैं कि वो 'आध्यात्मिक राजनीति' करेंगे.
ये बात दक्षिणपंथ की राजनीति से मेल खाती है. रजनीकांत और भारतीय जनता पार्टी के बीच एक स्वाभाविक गठजोड़ हो सकता है. भारतीय जनता पार्टी की कोशिश ऐसी ही दिखती है.
रजनीतिकांत के राजनीति में आने के एलान के पहले तक भारतीय जनता पार्टी ने एआईएडीएमके के साथ जाने की कोशिश की.
रजनीकांत के एलान के बाद भारतीय जनता पार्टी एआईएडीएमके से दूरी बढ़ाने की कोशिश में है.
करनी होगी मेहनत
कमल हासन की सोच आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवार के ज़्यादा क़रीब है. केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन और आंध्र के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू जैसे कुछ और राजनीतिक शख़्स उनके दोस्त हैं.
हालांकि, अभी ये भी नहीं कहा जा सकता है कि कमल हासन और रजनीकांत जयललिता और एम करुणानिधि के वोट बैंक को लक्ष्य करके आगे बढ़ेंगे. जब दोनों की नीतियां सामने आएंगी तभी इस बारे में साफ़ तौर पर कुछ कहा जा सकता है.
इतना तय है कि कमल हासन हों या फिर रजनीकांत दोनों को राजनीति में मुकाम बनाने के लिए मेहनत करनी होगी.
सुपरस्टार होने की इमेज राजनीति में एक हद तक ही फ़ायदा दिलाती है.
राजनीति में कितने फ़िट?
एमजी रामचंद्रन के करिश्मे के बात अलग थी. उनकी विरासत को जयललिता ने संभाला. उसके बाद फ़िल्मों से कई लोगों ने राजनीति का रुख़ किया. शिवाजी गणेशन ने भी पार्टी बनाई. किसी को भी ज़्यादा कामयाबी नहीं मिली. किसी का राजनीतिक करियर ज़्यादा नहीं चला.
कामयाबी की कसौटी पर उम्र भी एक पैमान होगी. कमल हासन साठ साल ही दहलीज़ पार कर चुके हैं तो रजनीकांत सत्तर साल की उम्र की तरफ़ बढ़ रहे हैं.
कमल हासन फ़िट नज़र आते हैं, लेकिन रजनीकांत को बीते बरसों में स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ा है.
कुछ साल पहले रजनीकांत को सिंगापुर के एक अस्पताल में दाखिल कराया गया था. राजनीति में बहुत दबाव लेना पड़ता है. चुनाव के दौरान भी बहुत दबाव होता है. इसके बीच वो पार्टी को कैसे आगे ले जाएंगे. ये देखना होगा.
एक व्यक्ति की पार्टी की दिक्कतें ये होती हैं कि अगर प्रमुख नेता सीन से हटता है तो पूरी पार्टी मुश्किल में घिर जाती है.
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