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आम बजट पर व्यंग्य: कटरीना कैफ़ कृषक प्रोत्साहन योजना
- Author, आलोक पुराणिक
- पदनाम, व्यंग्यकार
बजट पर एक वरिष्ठ ग़रीब का इंटरव्यू इस प्रकार है-
सवाल- बजट में घोषणा हुई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पांच लाख वाई-फ़ाई हॉट-स्पॉट बनाए जाएंगे.
वरिष्ठ ग़रीब-युवक एक बार जमकर फ़ेसबुक व्हॉट्सऐप चैटिंग में रम जाएं, तो रोज़गार की मांग खुद ब खुद खत्म हो जाएगी. रोज़गार प्रॉब्लम ख़त्म.
सवाल- बजट में ग़रीबों के लिए बहुत किया गया बताते हैं, आपको क्या लगता है.
वरिष्ठ ग़रीब-उर्फ वगजी- किस बजट में ग़रीबों के लिए बहुत कुछ ना किया गया. किया बहुत जाता है ग़रीबों के लिए, बस हो ही ना पाता, ग़रीब इस मुल्क का बहुत अड़ियल है, ग़रीबी छोड़कर राजी नहीं है.
ग़रीबी में मजे से आने लगे हैं ग़रीबों को. ग़रीब इस मुल्क का स्टारडम का भूखा हो गया है. उसे पता है कि उसकी ग़रीबी चली गई तो 'पीपली लाइव' जैसी फिल्मों के सेंटर में ग़रीब ना रह जाएगा.
जीएसटी वाले ग़रीब हैं...
सवाल-देखिए आप मजाक कर रहे हैं, मैं संज़ीदा सवाल पूछ रहा हूं. ग़रीबों के लिए बजट से आपको क्या उम्मीदें थीं.
वग-देखिए, इस मुल्क में ग़रीबी का कंसेप्ट बदल गया है. अब इस मुल्क में हर कोई ग़रीब है. अल्टो कारवाला मर्सीडीज के सामने ग़रीब है. दो सिंपल रोटी वाला मैकडोनाल्ड के बर्गर के सामने ग़रीब है. मैं यहां कनाट प्लेस के हनुमान मंदिर में बैठकर भीख मांग रहा हूं, पर मेरे आगे पूर्वी दिल्ली मंगोलपुरी के हनुमान मंदिर का भिखारी ग़रीब है.
और मैं खुद अमरीका के स्वामीनारायण मंदिर के सामने भीख मांगनेवाले भिखारी के सामने ग़रीब हूं. सब ग़रीब हैं. और आप देखें, ग़रीबों के लिए बहुत कुछ हो रहा है. हमारे यहां के टॉप उद्योगपति अमरीका के टॉप उद्योगपतियों के सामने ग़रीब हैं. तो हमारे टॉप उद्योगपतियों की ग़रीबी दूर हो रही है, उनकी संपत्तियां बढ़ रही हैं.
ग़रीबी दूर हो रही है. जिन नेताओं के स्कूटर कभी रिज़र्व में चलते थे, उन पर पचास पचास पेट्रोल पंप हैं. पर हैं वो भी ग़रीब ही हैं, उन्हें सौ पेट्रोल पंप चाहिए. सो ग़रीब हर कोई है. मैं ओरिजनल ग़रीब हूं, साथ में जो भाई बैठे हैं, ये सेनसेक्स वाले ग़रीब हैं. शेयर बाजार में लुटकर यहां बैठे हैं. वो दूर जो बैठे हैं, वो नोटबंदीवाले ग़रीब हैं.
इनके सारे नोट नोटबंदी में बेकार हो गए हैं. और वो जो बैठे हैं वो जीएसटी वाले ग़रीब हैं. जीएसटी में इनका सारा धंधा रिकॉर्ड पर आ गया, तो ये ग़रीब हो गए हैं. पर मैं ओरिजनल ग़रीब हूं बिना जीएसटी, नोटबंदी के चोंचलोंवाला ग़रीब.
कटरीना कैफ कृषक प्रोत्साहन योजना
सवाल-खेती की बेहतरी के लिए क्या ठोस किया जाना चाहिए. आपको इस बजट में ग़रीबी हटाने की कौन सी योजना चाहिए थी.
वग- खेती से सुंदरियों की दिलचस्पी खत्म हो गई. आप देखें पचास के दशक वैजयंती माला जैसी सुंदरी खेती में रुचि रखती थीं. 1957 में आई फिल्म 'नया दौर' में वैजयंती माला दिलीप कुमार के संग खेती में हाथ बंटाती थीं. अब नई सुंदरियां खेती-किसानी नहीं करतीं.
कटरीना कैफ कृषक प्रोत्साहन योजना बनाई जानी चाहिए थी. सुंदरियों को खेती में सब्सिडी दी जानी चाहिए थी. कटरीना कैफ के चक्कर में बहुत ऊर्जावान नौजवान भी खेती में आते, इस तरह से खेती का सम्यक विकास हो जाता. हमें आऊट आफ दि बॉक्स थिंकिंग की ज़रूरत है.
मैं कामना करता हूं कि आलिया भट्ट, कटरीना कैफ आदि वैजयंती माला से प्रेरणा लेकर गांवों का रुख करें और खेती किसानी करें. आलिया भट्ट कृषक मजदूर योजना बनाई जा सकती है अगले बजट में.
फिर वह वरिष्ठ ग़रीब दूसरे टीवी चैनलों को बाइट देने में बिजी हो गया. आज बजट का दिन है -आज के दिन हर चैनल को वरिष्ठ ग़रीब की बाइट चाहिए ही चाहिए.
(लेखक दिल्ली यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर हैं)
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