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'पद्मावत' पर अहमदाबाद में बवाल, गाड़ियां फूंकी
संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' के विरोध में गुजरात के अहमदाबाद में तीन प्रमुख मल्टीप्लेक्स के बाहर हिंसा हुई है.
तीनों जगहों पर तोड़फोड़ की गई, कुछ वाहनों के कांच तोड़ दिए गए और कुछ वाहनों को आग लगा दी गई.
थलतेज के एक्रोपॉलिस मॉल, गुरुकुल मेमनगर के हिमालया मॉल और वस्त्रापुर के अल्फा वन मॉल के बाहर ये आगज़नी और तोड़फोड़ हुई है.
कैंडल मार्च के बाद भड़की हिंसा
फिल्म के विरोध में इस्कॉन मंदिर से एक्रोपॉलिस मॉल तक एक कैंडल मार्च निकाला गया था. बीबीसी गुजराती संवाददाता सागर पटेल के मुताबिक, इसी मार्च के ख़त्म होने के साथ ही हिंसा और तोड़फोड़ शुरू हुई.
हिमालया और अल्फा वन मॉल वस्त्रापुर थाने के अंतर्गत आते हैं. यहां के पुलिस इंस्पेक्टर एमएम जडेजा ने बीबीसी गुजराती संवाददाता रॉक्सी गागेडकर को बताया कि दोनों जगहों पर जमा हुई भीड़ ने तोड़फोड़ की है.
उन्होंने बताया कि हिमालया मॉल के पास हालात ज़्यादा ख़राब थे. हालांकि अल्फा वन मॉल के बाहर प्रदर्शनकारियों को समय रहते रोक लिया गया और वे ज़्यादा नुकसान नहीं कर पाए.
करणी सेना का हिंसा से इनकार
हालांकि गुजरात में 'श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना' के प्रदेश अध्यक्ष राज शेखावत ने हिंसा में संलिप्तता से इनकार करते हुए घटना की निंदा की है.
बीबीसी से बातचीत में राज शेखावत ने कहा, ''करणी सेना इन घटनाओं के पीछे बिल्कुल नहीं है. फिल्म पद्मावत के विरोध में ये राजपूत समाज की तरफ से एक कैंडल मार्च निकाला गया था, वहीं ये घटनाएं हुई हैं. ये तो मॉब ने किया है. भीड़ का दिमाग कैसा होता है, आपको पता ही है. करणी सेना के नाम पर कोई कुछ भी करेगा तो इसके लिए करणी सेना ज़िम्मेदार नहीं हो सकती. इसके पीछे राजपूत हैं.''
उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि इस हिंसा के पीछे असामाजिक तत्वों का हाथ है. क्योंकि करणी सैनिक और राजपूत भी ऐसा नहीं करते हैं. कुछ लोग होते हैं जो मौके का फायदा उठाते हैं. करणी सेना हिंसा का समर्थन बिलकुल नहीं करती है. भीड़ बेकाबू होती है तो वो किसी के काबू में नहीं रहती है. हमने शांति संदेश भेजा है कि हिंसा न की जाए. आम आदमी और सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए. ये तरीका आंदोलन करने का नहीं होता है.''
बीबीसी संवाददाता सागर पटेल घटना के तुरंत बाद एक्रोपॉलिस मॉल के बाहर पहुंचे तो वहां सड़क पर कांच और जले हुए वाहन दिख रहे थे. उन्हें एक परिवार मिला जिसके लोग अपनी क्षतिग्रस्त कार के पास रो रहे थे.
सागर के मुताबिक, घटना की शुरुआत पत्थरबाज़ी से हुई और फिर बाहर खड़े छह दुपहिया वाहनों और चार कारों को आग लगा दी गई. मॉल के अंदर जो लोग थे, उन्हें सुरक्षा के लिहाज़ से भीतर ही लॉक कर लिया गया.
सागर पटेल के मुताबिक, "एक हज़ार से ज़्यादा लोग इस कैंडल मार्च में शामिल थे. लेकिन इस दौरान संभवत: पुलिस बल पर्याप्त नहीं था. थोड़ी देर में फायर ब्रिगेड आई और उसने आग बुझाई."
एक्रोपॉलिस मॉल में शॉपिंग करने आए मयूर सेवानी की बाइक भी जला दी गई. उन्होंने बताया, "हम लोग शाम 6.30 बजे शॉपिंग करने आए थे और 8 बजे के आस-पास कई लोगों ने तमाशे करना शुरू कर दिया. हम लोग दौड़ते हुए बाहर आए तो देखा कि बाहर बहुत लोग तोड़फोड़ कर रहे हैं. हम डरकर दोबारा अंदर चले गए."
हिमालय मॉल के बाहर डॉमिनोज़ और बर्गर किंग के रेस्त्रां के बाहर खड़े वाहनों को आग के हवाले कर दिया और कांच तोड़ दिए. कुछ लोग बेसमेंट पार्किंग में भी घुस गए और वहां तोड़-फोड़ की. फिर पुलिस पहुंची और उन्हें हवा में फायरिंग करनी पड़ी.
बताया जा रहा है कि एक्रोपॉलिस पीवीआर और हिमालया मॉल के सिनेमा मालिकों ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि उनके थियेटरों में फिल्म 'पद्मावत' नहीं दिखाई जाएगी. इसके बावजूद यह हिंसा की गई.
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