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प्रेस रिव्यू: वांग छी ने 'ज़्यादतियों' के लिए भारत से मांगा मुआवजा
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक भारत में लंबे वक़्त तक रहने के बाद अपने देश चीन लौटे सैनिक वांग छी ने कथित ज़्यादतियों के लिए भारत सरकार से मुआवज़ा मांगा है.
वांग छी पिछले 54 साल से भारत में फंसे थे.
पिछले साल बीबीसी में कहानी छपने के बाद चीनी दूतावास के अधिकारी उनसे मिलने मध्य प्रदेश स्थित उनके गांव गए थे और इसके बाद 11 फ़रवरी में अपने देश चीन लौटे थे.
खबर के मुताबिक वांग बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास पहुँचे और भारतीय सेना द्वारा उन पर की गई कथित ज़्यादतियों के लिए मुआवजे की मांग की.
दूतावास के अधिकारियों ने वांग से वादा किया कि वो उनके ज्ञापन को संबंधित अधिकारियों तक भेज देंगे.
वांग ने कहा है कि उन्होंने पाँच दशक मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित ज़िले में बिताए और इसकी ऐवज़ में उन्हें मुआवज़ा दिया जाना चाहिए.
वांग छी ने चीन की सरकार को भी एक आवेदन दिया है जिसमें उन्हें बतौर सैनिक सेवानिवृत्ति के लाभ देने की मांग की गई है.
वांग छी के मुताबिक 1963 में वो ग़लती से भारत में घुस गए और पकड़े गए, उधर भारतीय अधिकारियों के अनुसार वो भारत में बिना कागज़ात के घुसे. वांग छी जासूस होने के आरोपों से इनकार करते हैं.
वांग छी विभिन्न जेलों में छह से सात साल रहे और उसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश के एक गांव तिरोड़ी में छोड़ दिया गया. वहां उन्होंने एक आटे की चक्की पर काम करना शुरू किया.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक चार देशों भारत, अमरीका ऑस्ट्रेलिया और जापान के नौसेना अध्यक्षों ने चीन को विध्वंसकारी ताक़त करार दिया है.
नई दिल्ली में हुए एक सम्मेलन में इन देशों ने कहा कि चीन के आक्रामक रुख का सामना करने के लिए ठोस रणनीति बनाए जाने की ज़रूरत है.
नवभारत टाइम्स के अनुसार फ्लेक्सी फेयर की समीक्षा के लिए बनी कमिटी की सिफारिशों को स्वीकार किया तो आने वाले दिनों में ऐसी ट्रेनों में सफर सस्ता होता है, जो देर रात अपने डेस्टिनेशन पर पहुंच रही होंगी.
इसी तरह से अगर त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ का सीजन है तो उस वक्त किराए में बढ़ोतरी और जब भीड़भाड़ का सीजन न हो तो रेल टिकट सस्ता भी मिल सकता है.
पिछले साल दिसंबर में इंडियन रेलवे ने इस कमेटी का गठन किया था और हाल ही में कमिटी ने रेलवे को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.
हालांकि पहले कयास लगाए जा रहे थे कि फ्लेक्सी फेयर को समाप्त किया जा सकता है लेकिन कमिटी ने ऐसी कोई सिफारिश नहीं की है.
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि डोकलाम में यथास्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है जहां पिछले साल करीब दो महीने तक भारत और चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध की स्थित बनी रही थी.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस तरह की धारणाओं को खारिज करते हुए कहा, ''हमारा ध्यान कुछ खबरों की ओर गया है जो डोकलाम में हालात के संबंध में सरकार की ओर से बताई गयी स्थिति की सटीकता पर सवाल खड़ा करती हैं.'' उन्होंने कहा कि गतिरोध वाली जगह पर यथास्थिति में किसी तरह के बदलाव के बारे में बार-बार पूछे गये सवालों के जवाब में सरकार कह चुकी है कि इस तरह के आरोपों का कोई आधार नहीं है.
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